17 में 16 पहुंचे, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नहीं: मध्य प्रदेश भाजपा में नए समीकरणों की आहट?

Ramanand Tiwari | Oct 01, 2026, 24:02 IST
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MP BJP में नए समीकरणों की आहट? सिंधिया गैरहाजिर, कोर ग्रुप बैठक में संगठन और रणनीति पर मंथन
MP BJP में नए समीकरणों की आहट? सिंधिया गैरहाजिर, कोर ग्रुप बैठक में संगठन और रणनीति पर मंथन

BHOPAL. मध्य प्रदेश भाजपा की कोर ग्रुप बैठक में MP BJP, भाजपा संगठन बदलाव और मध्य प्रदेश राजनीति को लेकर चर्चा तेज हुई। 17 में से 16 नेता बैठक में पहुंचे, जबकि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल नहीं हुए। नए प्रभारी बिप्लब कुमार देब ने संगठन की चुनौतियों और आगामी रणनीति पर नेताओं से सुझाव लिए।

मध्य प्रदेश भाजपा में नई संगठनात्मक व्यवस्था के बीच बुधवार की कोर ग्रुप बैठक ने सियासी हलचल बढ़ा दी। करीब तीन घंटे चली बैठक में अपेक्षित 17 नेताओं में 16 मौजूद रहे। जबकि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल नहीं हुए। नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब ने नेताओं से चुनौतियों, उनके समाधान और आगे की संगठनात्मक रणनीति पर अलग-अलग सुझाव लिए। अब नजर इस बात पर है कि नई टीम प्रदेश भाजपा के प्रभावशाली समूहों के बीच संतुलन कैसे बनाती है।

सिंधिया की खाली कुर्सी बनी चर्चा का बिंदु

भोपाल में हुई भाजपा कोर ग्रुप की बैठक को सामान्य संगठनात्मक बैठक भर मानना जल्दबाजी होगी। प्रदेश में प्रभारी से लेकर संगठन महामंत्री तक नई व्यवस्था बनने के बाद यह पहला बड़ा मौका था, जब पार्टी के प्रमुख चेहरे एक टेबल पर बैठे।

बैठक करीब तीन घंटे चली। इसमें कुल 17 नेताओं के शामिल होने की अपेक्षा थी। उपलब्ध बैठक विवरण के मुताबिक, ज्योतिरादित्य सिंधिया को छोड़कर शेष 16 नेता बैठक में मौजूद रहे।

सिंधिया क्यों नहीं आए, इसका पुष्ट कारण सामने नहीं होने से उनकी अनुपस्थिति को नाराजगी या किसी राजनीतिक संदेश से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा। फिर भी प्रदेश की राजनीति में उनके प्रभाव को देखते हुए इतनी महत्वपूर्ण बैठक से उनकी गैरमौजूदगी राजनीतिक चर्चा का विषय जरूर बन गई।

MP BJP में नया पावर सेंटर? 2028 से पहले बदलेगा पुराना रोडमैप, 2028 चुनाव से पहले संगठन और बूथ रणनीति पर मंथन
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BHOPAL. मध्य प्रदेश भाजपा की कोर ग्रुप बैठक में 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी पर मंथन हुआ। MP BJP, भाजपा संगठन रणनीति और बूथ मंडल समीक्षा के जरिए कमजोर सीटों, कम अंतर वाली विधानसभा क्षेत्रों और सरकार-संगठन तालमेल को मजबूत करने की योजना पर चर्चा हुई। नई टीम के रोडमैप पर नजर है।
BHOPAL. मध्य प्रदेश भाजपा की कोर ग्रुप बैठक में 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी पर मंथन हुआ। MP BJP, भाजपा संगठन रणनीति और बूथ मंडल समीक्षा के जरिए कमजोर सीटों, कम अंतर वाली विधानसभा क्षेत्रों और सरकार-संगठन तालमेल को मजबूत करने की योजना पर चर्चा हुई। नई टीम के रोडमैप पर नजर है।

तीन घंटे में सिर्फ बैठक नहीं, फीडबैक भी

बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब का वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लेना रहा। बैठक में मौजूद नेताओं से प्रदेश में पार्टी के सामने खड़ी चुनौतियों, उनसे निपटने के उपाय और संगठन को आगे बढ़ाने के तरीकों पर राय ली गई।

नेताओं ने अपने-अपने सुझाव रखे। यही प्रक्रिया संकेत देती है कि नई प्रदेश व्यवस्था फिलहाल कोई एकतरफा फॉर्मूला थोपने के बजाय पहले संगठन के भीतर मौजूद अलग-अलग राय और समीकरण समझने की कोशिश कर रही है।

बिप्लब देब का यह पहला महत्वपूर्ण मध्य प्रदेश संगठनात्मक दौरा है। उनके कार्यक्रम में वरिष्ठ नेताओं और संगठन पदाधिकारियों से मुलाकात के साथ बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से संवाद भी शामिल किया गया है।

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
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मध्यप्रदेश भाजपा (BJP – Bharatiya Janata Party) में 30 सितंबर को तीन नए नेताओं की आमद प्रस्तावित है। चंद्रशेखर को 24 सितंबर को प्रदेश महामंत्री (संगठन) बनाया गया। विप्लब कुमार देब प्रभारी और रेखा वर्मा सह-प्रभारी बनाए गए हैं। इन दोनों की नियुक्ति 23 सितंबर को घोषित हुई थी। विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है।
मध्यप्रदेश भाजपा (BJP – Bharatiya Janata Party) में 30 सितंबर को तीन नए नेताओं की आमद प्रस्तावित है। चंद्रशेखर को 24 सितंबर को प्रदेश महामंत्री (संगठन) बनाया गया। विप्लब कुमार देब प्रभारी और रेखा वर्मा सह-प्रभारी बनाए गए हैं। इन दोनों की नियुक्ति 23 सितंबर को घोषित हुई थी। विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है।

नए पावर सेंटर से बड़ा सवाल, कैसे बनेगा संतुलन?

भाजपा के लिए असली परीक्षा किसी एक नेता का प्रभाव बढ़ना या घटना नहीं, बल्कि अलग-अलग राजनीतिक धाराओं को एक संगठनात्मक लाइन पर बनाए रखना होगी।

प्रदेश भाजपा में पुराने कार्यकर्ताओं के साथ ऐसे कई प्रभावशाली नेता भी हैं, जो पिछले वर्षों में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए। इनमें अपने-अपने क्षेत्रों में जनाधार और समर्थक रखने वाले चेहरे शामिल हैं।

ऐसे में यदि नई नियुक्तियों या भविष्य के राजनीतिक फैसलों में किसी एक समूह को ज्यादा और दूसरे को कम प्रतिनिधित्व मिलने की धारणा बनती है, तो संगठन के भीतर असंतोष की गुंजाइश पैदा हो सकती है।

यही नई टीम की सबसे कठिन परीक्षा होगी, जमीनी भाजपा कार्यकर्ता को महत्व देते हुए दूसरे दलों से आए प्रभावशाली नेताओं और उनके समर्थकों को भी संगठनात्मक ढांचे में संतुलित रखना।

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वैसे तो चौमासे में मध्यप्रदेश का मौसम खुशनुमा ही रहता है, लेकिन इस बार दिग्गज नेताओं के दौरों की झड़ी लगी है। करीब-करीब 15 दिन में ही राहुल दूसरी बार एमपी आ रहे हैं तो बीजेपी भी पीछे नहीं है। सितंबर में नितिन नबीन, मोहन भागवत और राहुल गांधी आए। अब बिप्लब देब, राहुल गांधी का बालाघाट दौरा और अमित शाह का गोपालक सम्मेलन है।
वैसे तो चौमासे में मध्यप्रदेश का मौसम खुशनुमा ही रहता है, लेकिन इस बार दिग्गज नेताओं के दौरों की झड़ी लगी है। करीब-करीब 15 दिन में ही राहुल दूसरी बार एमपी आ रहे हैं तो बीजेपी भी पीछे नहीं है। सितंबर में नितिन नबीन, मोहन भागवत और राहुल गांधी आए। अब बिप्लब देब, राहुल गांधी का बालाघाट दौरा और अमित शाह का गोपालक सम्मेलन है।

चुनिंदा मुलाकातों पर भी रहेंगी निगाहें

नए प्रभारी का वरिष्ठ और चुनिंदा नेताओं से व्यक्तिगत संवाद स्वाभाविक संगठनात्मक प्रक्रिया है, लेकिन मध्य प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में ऐसी मुलाकातों के अपने संकेत भी पढ़े जाते हैं।

किस नेता से कितनी बातचीत हुई, किसकी राय संगठन की आगामी रणनीति में जगह पाती है और भविष्य की नियुक्तियों में उसका कितना असर दिखाई देता है। असली तस्वीर आने वाले फैसलों से स्पष्ट होगी।

फिलहाल किसी नए “पावर सेंटर” के बनने की घोषणा करना जल्दबाजी होगी। लेकिन प्रभारी और संगठन महामंत्री बदलने के बाद शक्ति-संतुलन दोबारा परखा जाना स्वाभाविक है।

सबसे बड़ी माइनस मार्किंग: गुटों का आभास

नई टीम के सामने सबसे बड़ा जोखिम यही है कि संगठनात्मक बदलाव को कार्यकर्ता अलग-अलग खेमों की जीत या हार के रूप में देखने लगें। अगर पुराने संगठन के नेता, जमीनी कार्यकर्ता और कांग्रेस से भाजपा में आए प्रभावशाली चेहरे अपने-अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग-अलग केंद्रों की तरफ देखने लगे, तो संगठनात्मक एकजुटता पर दबाव बढ़ सकता है।

इसीलिए कोर ग्रुप की बैठक का असली महत्व आज लिए गए सुझावों से ज्यादा उन फैसलों में दिखाई देगा, जो आने वाले महीनों में नियुक्तियों, जिम्मेदारियों और राजनीतिक प्राथमिकताओं के रूप में सामने आएंगे।

तीन घंटे की बैठक खत्म हो गई है, लेकिन मध्य प्रदेश भाजपा की नई संगठनात्मक व्यवस्था की असली परीक्षा अब शुरू हुई है—क्या नई टीम सभी प्रभावशाली धाराओं को एक साथ साध पाएगी, या बदलते समीकरण नई खींचतान को जन्म देंगे?

  1. मध्य प्रदेश भाजपा कोर ग्रुप बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
    मध्य प्रदेश भाजपा कोर ग्रुप बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक रणनीति पर चर्चा करना और नेताओं से चुनौतियों एवं उनके समाधान के सुझाव प्राप्त करना था।
  2. ज्योतिरादित्य सिंधिया की बैठक में अनुपस्थिति के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
    ज्योतिरादित्य सिंधिया की बैठक में अनुपस्थिति का पुष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन उनकी अनुपस्थिति को नाराजगी या राजनीतिक संदेश से जोड़ना उचित नहीं होगा।
  3. नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब की जिम्मेदारियों में क्या शामिल है?
    नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब की जिम्मेदारियों में नेताओं से फीडबैक लेना, प्रदेश भाजपा के सामने खड़ी चुनौतियों का समाधान खोजना और संगठन को आगे बढ़ाने की रणनीति विकसित करना शामिल है।
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