MP बजट 2025-26 का 1.74 लाख करोड़ खर्च नहीं कर पाया विभाग, अब तिमाही सीमा लागू
Amresh Kushwaha | Apr 03, 2026, 15:14 IST
mp budget unspent 174 lakh crore 2025 26
वित्त वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश के विभाग 4.91 लाख करोड़ के बजट में से 30% से ज्यादा खर्च नहीं कर पाए। नवीकरणीय ऊर्जा, वित्त और पर्यावरण विभाग सबसे पिछड़े रहे। वहीं, अब 2026-27 में तिमाही खर्च सीमा लागू होगी।
News In Short
- वित्त वर्ष 2025-26 में MP को 4.91 लाख करोड़ का बजट मिला था।
- इसमें से 30% से ज्यादा यानी 1.74 लाख करोड़ रुपए खर्च नहीं हुए हैं।
- 9 विभाग ऐसे हैं जो अपना 50% बजट भी खर्च नहीं कर पाए हैं।
- नवीकरणीय ऊर्जा विभाग सबसे फिसड्डी रहा, सिर्फ 0.67% खर्च हुआ है।
- अब 2026-27 से सरकार ने तिमाही खर्च सीमा की नई व्यवस्था लागू की है।
News In Detail
वित्त वर्ष खत्म, लेकिन पड़ा रहा खजाना
यानी पूरे साल में सिर्फ करीब 3.16 लाख करोड़ रुपए ही खर्च हुए। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले करीब 40 हजार करोड़ रुपए कम है। नौ विभागों ने अपना आधा बजट भी नहीं छुआ है।
बना नया रिकॉर्ड
वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी अंतिम आंकड़े आना बाकी हैं। अकाउंटेंट जनरल (Accountant General), आरबीआई (RBI - Reserve Bank of India) और अंतरराज्यीय लेन-देन के आंकड़े जुड़ने के बाद खर्च में पांच से सात हजार करोड़ रुपए तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
9 विभागों ने 50% भी नहीं खर्चा
एमपी वित्त विभाग ने 15%, पर्यावरण ने 21.46% और प्रवासी भारतीय विभाग ने 23.09% ही खर्च किया। विमानन विभाग 28.81%, लोक परिसंपत्ति 35.89%, सहकारिता 43.04%, पीएचई (PHE - Public Health Engineering) 47.57% और आनंद विभाग 47.62% पर ही रुक गए।
5 बड़े विभागों का हाल भी निराशाजनक
एमपी अप्रोप्रिएशन (MP Appropriation) अकाउंट के आंकड़े यह भी बताते हैं कि सप्लीमेंट्री बजट जोड़ने से कुल बजट राशि ज्यादा दिखती है, जबकि वास्तविक खर्च उतना नहीं हो पाता।
वरिष्ठ अधिकारी का बयान
अब 2026-27 में क्या बदलेगा?
पहली श्रेणी में वेतन, भत्ते, पेंशन, छात्रवृत्ति, कर्ज अदायगी और प्राकृतिक आपदा के खर्च रखे गए हैं। इन्हें अति आवश्यक माना गया है और 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक किसी भी रोक के बिना खर्च किया जा सकेगा। यह राशि करीब एक लाख करोड़ रुपए है।
दूसरी श्रेणी में केंद्र प्रवर्तित योजनाएं (Centrally Sponsored Schemes) हैं। इन पर कोई कैपिंग नहीं होगी और विभाग केंद्र से अपना हिस्सा लेते रहेंगे। तीसरी श्रेणी सामान्य खर्चों की है। इन पर तिमाही यानी तीन महीने की सीमा तय की गई है। यदि विभाग तय सीमा में खर्च नहीं करते तो स्वचालित रूप से 25% की कैपिंग लागू हो जाएगी।
सरकार ने सभी 63 विभागों को निर्देश दिए हैं कि पहले लंबित दायित्वों का निपटारा करें और उसके बाद ही नए कार्य शुरू करें। 4.21 लाख करोड़ रुपए के कुल बजट में पूंजीगत और राजस्व व्यय के लिए शत-प्रतिशत आवंटन जारी किया गया है।
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