MP Cyber Fraud Alert: एमपी में चार महीने में आए 26 हजार से ज्यादा केस, भोपाल और इंदौर सबसे आगे
Kaushiki | May 17, 2026, 14:36 IST
MP Cyber Fraud Alert
मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामले डराने वाले हैं। साल 2026 के पहले चार महीनों में लोगों से 137 करोड़ रुपए ठग लिए। इस दौरान 26 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। अकेले भोपाल और इंदौर में 40 प्रतिशत अपराध हुए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- MP में साइबर क्राइम और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं।
- साल 2026 के शुरुआती 120 दिनों में ही ठगों ने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
- प्रदेश के नागरिकों से करीब 137 करोड़ रुपए की भारी रकम ठग ली गई है।
- इस अवधि में राज्य भर से ठगी की 26 हजार से ज्यादा शिकायतें आई हैं।
- ठगी की इन वारदातों में अकेले भोपाल और इंदौर शहर सबसे आगे रहे हैं।
सिर्फ 120 दिनों के भीतर प्रदेश में बड़ा खेल हो गया। ठगों ने आम लोगों की जेब पर करारा डाका डाला है। इस दौरान ठगों ने करीब 137 करोड़ रुपए उड़ा लिए हैं। इतनी बड़ी रकम लोगों के खातों से गायब हो चुकी है। आइए डिटेल से जानें...
क्या हैं ठगी के अब तक के आंकड़े
पिछले साल भी हालात काफी ज्यादा खराब थे। बीते साल प्रदेश में 64 हजार से अधिक शिकायतें मिली थीं। तब ठगों ने लोगों के 300 करोड़ रुपए पार किए थे। इस साल यह रिकॉर्ड टूटने की कगार पर है। इस मामले में बड़े शहर सबसे ज्यादा निशाने पर आ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल और इंदौर में सबसे ज्यादा फ्रॉड हैं।
कुल मामलों का 40 फीसदी हिस्सा इन्हीं दो शहरों का है। इसके बाद जबलपुर, ग्वालियर और रीवा जैसे शहरों का नंबर आता है। सागर में भी ठगों का नेटवर्क काफी ज्यादा एक्टिव हो चुका है। वे नए-नए तरीकों से लोगों को फंसा रहे हैं। सिर्फ 120 दिनों के इस छोटे से अंतराल में पूरे प्रदेश से 26 हजार से अधिक ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए हैं।
इन मामलों में साइबर अपराधियों ने मासूम नागरिकों के बैंक खातों से करीब 137 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि पर हाथ साफ कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, राज्य के दो सबसे बड़े और प्रमुख शहर, भोपाल और इंदौर इन अपराधों के मुख्य केंद्र बने हुए हैं। यहां राज्य के कुल साइबर अपराधों के लगभग 40 प्रतिशत मामले सामने आ रहे हैं।
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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी
डिजिटल अरेस्ट के मामले में ठग पीड़ित को वीडियो कॉल करते हैं और खुद को सीबीआई, पुलिस, कस्टम या नारकोटिक्स विभाग का बड़ा अधिकारी बताते हैं। वे पीड़ित को डराते हैं कि उनके नाम से कोई अवैध पार्सल आया है या उनके बैंक खाते से मनी लॉन्ड्रिंग हुई है।
उन्हें घर में ही डिजिटल रूप से बंधक बनाकर डरा-धमकाकर लाखों रुपए ट्रांसफर करवा लेते हैं। वहीं दूसरी तरफ, पार्ट-टाइम जॉब या वर्क फ्रॉम होम के नाम पर ठग टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर संपर्क करते हैं।
शुरुआत में वे यूट्यूब वीडियो लाइक करने या होटल रिव्यू करने के बदले छोटे-छोटे प्रॉफिट देते हैं, और बाद में बिटकॉइन या क्रिप्टो ट्रेडिंग में बड़े निवेश के नाम पर लाखों रुपए ठग लेते हैं।
साइबर फ्रॉड से कैसे बचें
- अलर्ट रहें
साइबर फ्रॉड से बचने का सबसे पहला नियम है हमेशा अलर्ट रहना। किसी भी अनजान फोन कॉल पर अपनी निजी जानकारी बिल्कुल न दें। अपना ओटीपी या यूपीआई पिन कभी शेयर न करें। - पासवर्ड न दें
कोई भी सरकारी एजेंसी या बैंक फोन पर पासवर्ड नहीं मांगता। अगर कोई ऐसा कॉल आए तो तुरंत फोन काट दें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से हमेशा बचें। - इसका रखें ध्यान
आजकल मोबाइल पर केवाईसी अपडेट करने के मैसेज बहुत आते हैं। बिजली बिल जमा करने या सिम ब्लॉक होने वाले मैसेज नकली होते हैं। इन पर बिना जांच किए भरोसा कभी न करें। - अनजान वेबसाइट से ऐप इंस्टॉल न करें
अपने मोबाइल में हमेशा ऑफिशियल ऐप स्टोर से ही ऐप्स डाउनलोड करें। किसी अनजान वेबसाइट से कोई भी फाइल या ऐप इंस्टॉल न करें। यह आपके फोन का डेटा चुरा सकता है। - अनजान ट्रेडिंग ग्रुप से तुरंत हटें
ज्यादा मुनाफे या गारंटीड प्रॉफिट वाली स्कीमों से हमेशा दूर रहें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले अनजान ट्रेडिंग ग्रुप से तुरंत हट जाएं। टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर निवेश की सलाह नकली होती है। - मजबूत पासवर्ड का यूज करें
इंटरनेट बैंकिंग के लिए हमेशा मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करना चाहिए। अपने पासवर्ड में नाम या जन्मतिथि जैसी आसान चीजें न रखें। समय-समय पर अपने पासवर्ड बदलते रहना बहुत जरूरी है। - बुजुर्गों-बच्चों को भी बताएं
अपने घर के बुजुर्गों और बच्चों को इसके प्रति जागरूक करें। उन्हें बताएं कि इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय क्या सावधानी रखनी है। जागरूकता ही इस बड़े खतरे से एकमात्र बचाव है।
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साइबर फ्रॉड होने पर क्या कदम उठाए
इसके साथ ही पीड़ित को तुरंत अपने संबंधित बैंक से संपर्क करके अपने एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड, मोबाइल बैंकिंग और नेट बैंकिंग सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक करवा देना चाहिए ताकि आगे कोई और ट्रांजैक्शन न हो सके।
इसके बाद, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर जाकर स्क्रीनशॉट और ट्रांजैक्शन आईडी के साथ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करनी चाहिए। जितनी जल्दी शिकायत होगी, ठगी गई रकम के फ्रीज होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।
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