डायल 112 विवाद : 1 लाख से ज्यादा कॉल, सिर्फ 20 गड़बड़ियां, हाईकोर्ट में तीखी बहस, डीजी-एसएसपी से जवाब तलब
Neel Tiwari | Feb 19, 2026, 23:23 IST
Photograph: (the sootr)
डायल 112 के 972 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को लेकर कानूनी विवाद छिड़ गया है। हाईकोर्ट में 1 लाख कॉल्स और सिर्फ 20 गड़बड़ियों की चर्चा, पुलिस विभाग और टेंडर कंपनी के बीच तीखी बहस।
News in Short
- EMRI का दावा: 15 दिनों में 1 लाख से ज्यादा कॉल डिस्पैच।
- पुलिस का आंकड़ा: सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी के 20 मामले सामने रखे।
- कोर्ट ने कहा-चलता टेंडर निरस्त किए बिना दूसरा नहीं दिया जा सकता।
- स्वतंत्र कमेटी से मध्यस्थता का सुझाव, पुलिस ने किया इनकार।
- पुलिस पर डाटा सेंटर और सर्वर पर जबरन कब्जे की कोशिश के लगे आरोप
- हाईकोर्ट ने डीजी व एसएसपी पुलिस टेलिकम्युनिकेशन से 21 फरवरी तक जवाब मांगा।
News in Detail
डेटा, तकनीकी खामियों और कथित दबाव की कहानी ने मामले को सिर्फ ठेका विवाद से आगे बढ़ाकर पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा बना दिया है। टेंडर कंपनी की ओर से गुरुवार को कोर्ट के सामने खुलकर यह आरोप लगाए गए कि पिछली सुनवाई की रात उनके इक्विपमेंट और सर्वर पर पुलिस ने जबरन कब्जा करने की कोशिश की।
15 दिन, 1 लाख से अधिक कॉल-डेटा से बचाव
पुलिस विभाग की ओर से भी कॉल्स का आंकड़ा पेश किया गया, जिसमें यह दर्शाया गया कि कुछ मामलों में डायल 112 सिस्टम ने पास की गाड़ी के बजाय दूर खड़ी FRV (फर्स्ट रिस्पॉन्स व्हीकल) को अलर्ट भेजा। हालांकि कोर्ट के सामने यह तथ्य भी आया कि एक लाख से अधिक कॉल्स में पुलिस ने मात्र 20 इंसिडेंट ऐसे बताए, जहां सॉफ्टवेयर की गलती थी।
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‘उबर-ओला’ का उदाहरण देकर दी सफाई
उन्होंने उबर और ओला का उदाहरण देते हुए कहा-जैसे एक बार राइड शुरू होने के बाद दूसरी बुकिंग नहीं हो सकती, उसी तरह डायल 112 की गाड़ी भी एक साथ दो जगह नहीं जा सकती। ऐसे में यदि कोई वाहन व्यस्त दिख रहा है तो सिस्टम स्वतः दूसरी उपलब्ध गाड़ी को अलर्ट भेजता है, जिसे सॉफ्टवेयर की गलती नहीं कहा जा सकता।
कोर्ट का सुझाव-बनाइए स्वतंत्र कमेटी
एमपी हाईकोर्ट की डिविजन बेंच-चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ-ने सुझाव दिया कि विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए एक स्वतंत्र कमेटी बनाई जा सकती है, जिसमें पुलिस अधिकारी न होकर निष्पक्ष और जिम्मेदार लोग हों।
EMRI पहले इस प्रस्ताव के लिए तैयार हो गई, लेकिन थोड़ी देर बहस मध्यस्थता से इनकार कर दिया। पुलिस विभाग ने भी कंपनी की परफॉर्मेंस का हवाला देते हुए मध्यस्थता से इनकार कर दिया।
‘अपराधियों जैसा व्यवहार’—कोर्ट में गंभीर आरोप
अगर किसी और को दिया टेंडर तो ढप हो जाएगी 112
EMRI ग्रीन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस सॉफ्टवेयर से जुड़े हुए सभी अन्य सॉफ्टवेयर जैसे जीपीएस मैसेजिंग, कॉल्स जैसी सुविधाओं के लिए EMRI ने एयरटेल वोडाफोन जैसे अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ अनुबंध किया है। उन्होंने बताया कि यदि नया सॉफ्टवेयर उपयोग किया जाता है तो डायल 112 की सभी प्रमुख सर्विस ढप हो जाएंगी।
डीजी और एसएसपी टेलिकम्युनिकेशन से जवाब तलब
972 करोड़ पर पहले ही उठ चुके हैं सवाल
कोर्ट ने 6 करोड़ 29 लाख रुपए के CAD सॉफ्टवेयर के लिए जारी नए टेंडर पर अंतरिम रोक लगा दी थी और राज्य से विस्तृत जवाब तथा मौजूदा सॉफ्टवेयर की कार्यक्षमता रिपोर्ट मांगी थी।
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अब आगे क्या?
डायल 112 जैसी आपातकालीन सेवा से जुड़ा यह विवाद अब सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट का मसला नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और सरकारी जवाबदेही की कसौटी बन गया है।
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