अब मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनाएंगे सड़क
Sanjay Sharma | Apr 16, 2025, 16:09 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में अब सड़क निर्माण की निगरानी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर करेंगे। पहले ही ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के काम घटिया गुणवत्ता के चलते सवालों में घिरे रहे हैं।
BHOPAL. एमपी अजब है, सबसे गजब है की टैग लाइन को प्रदेश के अधिकारियों का मनमाना रवैया चरितार्थ कर रहा है। जिस अधिकारी के मन में जो आता है वो विभाग की गाइडलाइन को ताक पर रख कर उस व्यवस्था को थोप देता है। ताजा मामला सड़क विकास निगम का है। यहां विभाग के अधिकारियों ने सड़क निर्माण का ककहरा भी न जानने वाले इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की नियुक्ति कर दी है। ऐसा उन इंजीनियरों के आवेदनों को दरकिनार करके किया गया जो सड़क निर्माण की योग्यता रखते हैं और उनके पास कई सालों का अनुभव भी है।
गुणवत्ता की अनदेखी करके सड़क बनाने के मामले प्रदेश में बेहिसाब हैं। ग्रामीण विकास विभाग के अधीन सड़क विकास प्राधिकरण राजकीय राजमार्ग के साथ ही जिला मार्गों का निर्माण और मेंटेनेंस का काम संभालता है। घटिया गुणवत्ता वाली सड़कों की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं। पूरे प्रदेश में ऐसे अनगिनत मामले हैं। जिन्हें दबाने विभाग और प्राधिकरण एक अरसे से तकनीकी अधिकारियों की कमी का रोना रोते आ रहे हैं।
तकनीकी अधिकारियों की कमी को पूरा करने सड़क विकास प्राधिकरण ने हाल ही में प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए सड़क निर्माण के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले इंजीनियरों से आवेदन बुलाए गए थे। जिसके लिए सैकड़ों इंजीनियरों ने अपनी दावेदारी पेश की थी। आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद चयन के लिए अधिकारियों का पैनल बनाया गया लेकिन उसमें ऐसे तकनीकी एक्सपर्ट रख दिए जो खुद ही अनुभव के मामले में कमजोर थे और उनके पास पैनल की योग्यता नहीं थी।
अब सड़कों के निर्माण इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की निगरानी में होगा। जबकि इसके लिए सिविल इंजीनियर होना चाहिए। इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के पास सड़क बनाने का अनुभव और योग्यता नहीं होता। इसके बावजूद अधिकारियों के पैनल ने सिविल वर्क के लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों का चयन कर लिया।
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सड़क विकास प्राधिकरण के पैनल ने सड़क बनाने के लिए जिन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों का चयन किया है वे बीएचईएल, बीएसएनएल, बार्डर फोर्स, बिजली कंपनी, एनएचडीसी, एनएचपीसी, और यूएडीडी में कार्यरत रहे हैं। यानि उनके पास बिजली से संबंधित तकनीकी कार्यों का अनुभव रखते हैं। उनके द्वारा अब तक एक भी सड़क निर्माण नहीं किया गया। इस स्थिति में ये तकनीकी अधिकारी कैसे सड़क निर्माण की निगरानी कर पाएंगे।
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तकनीकी अधिकारियों का चयन करने वाले पैनल पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। दरअसल पैनल में ऐसे अधिकारी रखे गए थे जो स्वयं इंटरव्यू में फेल हो गए थे। पैनल में शामिल एमपीआरडीए के प्रमुख अभियंता विजय गुप्ता का मूल पद अधीक्षण यंत्री है। उन्हें मुख्य महाप्रबंधक के पद पर नामांकित किया गया है। वर्ष 2022 में इस पद के लिए हुए इंटरव्यू में वे स्वयं फेल हो चुके हैं।
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चयन प्रक्रिया में शामिल सुरेश शेजकर यूएडीडी में एसई के पद पर कार्यरत हैं। वे भी इंटरव्यू पास नहीं कर पाए थे और उनके नाम से कई विवाद भी जुड़े हैं। वे ऐसे अधिकारी है जिन्हें ईएनसी के पद से डिमोट कर चीफ इंजीनियर बनाया गया था। बाद में वे यूएडीडी में चले गए। इस पैनल ने चीफ इंजीनियर बीआरओ सुनील वर्मा, सीनियर डीजीएम बीएचईएल प्रशांत पाठक, अधीक्षण यंत्री आरईएस पीके गुप्ता, ओपी दंसोरा, एसई एमएल डाबर, ईई बिजली कंपनी एफजे खान, सीई बीएसएनएल कुमार मनोज, सीई एनएचडीसी अनुराग सेठ, एसई एनएचएआई कृष्णपाल सिंह और सीई एनएचपीसी पराग सक्सेना जैसे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों का चयन किया गया है।
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गुणवत्ता की अनदेखी करके सड़क बनाने के मामले प्रदेश में बेहिसाब हैं। ग्रामीण विकास विभाग के अधीन सड़क विकास प्राधिकरण राजकीय राजमार्ग के साथ ही जिला मार्गों का निर्माण और मेंटेनेंस का काम संभालता है। घटिया गुणवत्ता वाली सड़कों की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं। पूरे प्रदेश में ऐसे अनगिनत मामले हैं। जिन्हें दबाने विभाग और प्राधिकरण एक अरसे से तकनीकी अधिकारियों की कमी का रोना रोते आ रहे हैं।
चयन में ताक पर रखी गाइडलाइन
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों के जिम्मे सड़क निर्माण की कमान
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भेल-बीएसएनएल के इंजीनियरों के चयन पर सवाल
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इंटरव्यू में फेल अधिकारियों ने किया चयन
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खुद डिमोट हो चुके हैं चयनकर्ता
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