तीन मुख्यमंत्रियों तक पहुंची आयुष्मान कैशलेस योजना की फाइल, 6 साल बाद भी स्थिति जस की तस
Dablu Kumar | Aug 21, 2025, 09:38 IST
Cashless yogna
मध्य प्रदेश के 12 लाख कर्मचारी 6 साल से आयुष्मान कैशलेस स्वास्थ्य योजना का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कर्मचारी अभी भी इंतजार में हैं।
मध्य प्रदेश के 12 लाख कर्मचारी 6 साल बाद भी आयुष्मान कैशलेस स्वास्थ्य योजना का इंतजार कर रहे हैं। यह योजना 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के शासनकाल में घोषित की गई थी, लेकिन आज तक यह योजना कर्मचारियों तक नहीं पहुंच पाई है। तीन मुख्यमंत्रियों (कमलनाथ, शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव) के पास यह योजना फाइल के रूप में पहुंची, लेकिन कर्मचारियों को केवल आश्वासन ही मिला। मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कमेटी में शामिल अधिकारियों की सूची में मुख्य सचिव के अलावा अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा, जो पहले एसीएस विभाग प्रमुख थे, अब प्रमुख सचिव हैं, और अपर मुख्य सचिव पंचायत और ग्रामीण विकास, जो पहले एसीएस विभाग प्रमुख थे, अब प्रमुख सचिव के रूप में कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, प्रमुख सचिव वित्त विभाग, जो पहले प्रमुख सचिव थे, अब अपर मुख्य सचिव के पद पर हैं।
कमेटी में प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, सचिव लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग शामिल हैं। इसके अलावा कमेटी में सचिव सामान्य प्रशासन विभाग, प्रबंध संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और मुख्य कार्यपालन अधिकारी आयुष्मान भारत निरामयम मध्यप्रदेश भी शामिल हैं।
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कमलनाथ ने बनाई थी
यह योजना 6 साल पहले 2019 में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमल नाथ के नेतृत्व में कैबिनेट बैठक में मंजूर की गई थी। उस समय यह योजना 1 अप्रैल से लागू होने वाली थी और प्रदेश के सभी कर्मचारियों को इसका लाभ मिलने वाला था। इसके साथ ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया गया था। योजना के तहत साधारण बीमारियों के लिए 5 लाख रुपए और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जानी थी।
इस स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में शासकीय कर्मचारी, संविदा कर्मचारी, शिक्षक संवर्ग और नगर सैनिक के अलावा राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारी शामिल थे। इसके अलावा यह योजना निगम मंडलों में काम करने वाले कर्मचारियों और अखिल भारतीय सेवा के कर्मचारियों के लिए विकल्प के तौर पर रखा गया है।
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इस बीमा योजना के लागू होने से एमपी सरकार पर 756.56 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार होने की संभावना जताई गई है। मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रदेश के कर्मचारियों को आयुष्मान जैसी योजना के तहत स्वास्थ्य सेवा का लाभ देने की बात की थी। हालांकि, कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, इसके चलते मामले में देरी आई।
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तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि तीन मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बावजूद प्रदेश के कर्मचारियों को अब तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का लाभ नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी अन्य राज्यों में लागू आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा की तरह 5 लाख से 10 लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब तक किसी प्रकार का आदेश जारी नहीं किया गया है। कर्मचारी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी इस सुविधा से वंचित हैं।
वर्तमान में कर्मचारियों के इलाज की व्यवस्था कुछ इस प्रकार है। जब कर्मचारी इलाज कराते हैं, तो उन्हें खर्च की हुई राशि का रिम्बर्समेंट कराने के लिए अपने विभाग में आवेदन करना होता है। इसके लिए पहले डॉक्टर, मेडिकल बोर्ड या डायरेक्टर हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन से मंजूरी प्राप्त करनी होती है।
अगर कर्मचारी अस्तपताल में भर्ती होकर इलाज कराते हैं, तो ऐसे में उन्हें 5 लाख रुपये तक के क्लेम की मंजूरी संभागीय स्तर के सरकारी अस्पताल के डीन की अध्यक्षता में बनी कमेटी की ओर से जाती है। यदि क्लेम 5 लाख से अधिक और 20 लाख रुपये तक होता है, तो इस मामले में संचालक स्वास्थ्य सेवाओं की अध्यक्षता में बनी कमेटी रिम्बर्समेंट को मंजूरी देती है।
यदि कर्मचारी भर्ती नहीं होते, तो वे या उनके परिजन बाह्य रोगी के रूप में इलाज कराते हैं। इसका मतलब है कि अस्पताल में दिखाया जाता है और फिर लौट आते हैं। इस स्थिति में एक साल में अधिकतम 20 हजार रुपये का रिम्बर्समेंट होता है। यदि इलाज निरंतर चल रहा हो, तो तीन माह में 8000 रुपये से अधिक का रिम्बर्समेंट नहीं किया जा सकता है। इसके लिए जिला मेडिकल बोर्ड की मंजूरी जरूरी होती है।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर 9 फरवरी 2024 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति का उद्देश्य शासकीय कर्मचारी, कार्यकर्ता और संविदा कर्मचारियों को आयुष्मान भारत निरामयम प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल करने का निर्णय लेना था। यह कमेटी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में 4 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक के निर्णय के आधार पर गठित की गई थी, जिसमें शासकीय कर्मचारियों को सालाना 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य सुरक्षा लाभ देने की स्वीकृति दी गई थी। हालांकि, अब तक इस मामले पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
योजना तैयार करने पर काम जारी
कमेटी में प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, सचिव लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग शामिल हैं। इसके अलावा कमेटी में सचिव सामान्य प्रशासन विभाग, प्रबंध संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और मुख्य कार्यपालन अधिकारी आयुष्मान भारत निरामयम मध्यप्रदेश भी शामिल हैं।
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कमलनाथ ने बनाई थी कैशलेस इलाज की योजना
इस स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में शासकीय कर्मचारी, संविदा कर्मचारी, शिक्षक संवर्ग और नगर सैनिक के अलावा राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारी शामिल थे। इसके अलावा यह योजना निगम मंडलों में काम करने वाले कर्मचारियों और अखिल भारतीय सेवा के कर्मचारियों के लिए विकल्प के तौर पर रखा गया है।
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योजना से एमपी सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय भार
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तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि तीन मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बावजूद प्रदेश के कर्मचारियों को अब तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का लाभ नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी अन्य राज्यों में लागू आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा की तरह 5 लाख से 10 लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब तक किसी प्रकार का आदेश जारी नहीं किया गया है। कर्मचारी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी इस सुविधा से वंचित हैं।
अभी इस व्यवस्था पर हो रहा है काम
अगर कर्मचारी अस्तपताल में भर्ती होकर इलाज कराते हैं, तो ऐसे में उन्हें 5 लाख रुपये तक के क्लेम की मंजूरी संभागीय स्तर के सरकारी अस्पताल के डीन की अध्यक्षता में बनी कमेटी की ओर से जाती है। यदि क्लेम 5 लाख से अधिक और 20 लाख रुपये तक होता है, तो इस मामले में संचालक स्वास्थ्य सेवाओं की अध्यक्षता में बनी कमेटी रिम्बर्समेंट को मंजूरी देती है।
यदि कर्मचारी भर्ती नहीं होते, तो वे या उनके परिजन बाह्य रोगी के रूप में इलाज कराते हैं। इसका मतलब है कि अस्पताल में दिखाया जाता है और फिर लौट आते हैं। इस स्थिति में एक साल में अधिकतम 20 हजार रुपये का रिम्बर्समेंट होता है। यदि इलाज निरंतर चल रहा हो, तो तीन माह में 8000 रुपये से अधिक का रिम्बर्समेंट नहीं किया जा सकता है। इसके लिए जिला मेडिकल बोर्ड की मंजूरी जरूरी होती है।
FAQ
- 1. आयुष्मान कैशलेस स्वास्थ्य योजना क्या है और इसे क्यों लागू नहीं किया गया?
आयुष्मान कैशलेस स्वास्थ्य योजना, मध्य प्रदेश सरकार की एक योजना है जिसमें कर्मचारियों को 5 लाख से 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज प्रदान किया जाना था। यह योजना 2019 में मुख्यमंत्री कमल नाथ के नेतृत्व में घोषित की गई थी, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है। योजना के लागू होने में देरी की वजह से कर्मचारियों को अभी तक इसका लाभ नहीं मिल पाया है। - 2. कर्मचारियों को आयुष्मान कैशलेस स्वास्थ्य योजना का लाभ कब मिलेगा?
आयुष्मान कैशलेस स्वास्थ्य योजना का लाभ कर्मचारियों को मिलना था, लेकिन तीन मुख्यमंत्रियों के शासनकाल में इसकी फाइलें सिर्फ आश्वासन तक सीमित रही हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर एक कमेटी गठित की गई है, लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। - 3. क्या वर्तमान में कर्मचारियों के इलाज का कोई अन्य तरीका है?
वर्तमान में कर्मचारियों को इलाज के लिए रिम्बर्समेंट प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। अगर कर्मचारी अस्पताल में भर्ती होते हैं, तो 5 लाख तक के क्लेम की मंजूरी संभागीय अस्पताल की कमेटी द्वारा दी जाती है। बाह्य रोगी के लिए इलाज के मामले में, एक साल में अधिकतम 20 हजार रुपये तक रिम्बर्समेंट होता है।
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