दवा के बाद शराब में जहर, फिर भी बेपरवाह FDA? जानिए क्यों नाकाम हो रहा MP का सिस्टम
Amresh Kushwaha | Sept 10, 2026, 13:40 IST
MP FDA System Failure
छिंदवाड़ा सिरप कांड और सागर शराबकांड के बाद मध्यप्रदेश एफडीए की भूमिका पर सवाल उठे हैं। महाराष्ट्र में एफडीए ने शराब ब्रांड तक बैन किया, लेकिन एमपी में एफडीए शराब की जांच आबकारी विभाग पर छोड़ देता है। जानें क्यों नाकाम है सिस्टम...
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश का एफडीए विभाग अब सवालों के घेरे में है।
- सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों में एफडीए की भूमिका पर चर्चा हो रही है।
- महाराष्ट्र में एफडीए ने एक बड़ी शराब कंपनी को बैन किया था।
- मध्यप्रदेश में शराब की जांच सिर्फ आबकारी विभाग तक सीमित रहती है।
- सूत्रों का कहना है कि एफडीए को महाराष्ट्र के मॉडल से सीखना चाहिए।
कुछ महीने पहले ही महाराष्ट्र में एफडीए ने एक नामी शराब ब्रांड को अमानक पाते हुए तुरंत बैन कर दिया था। पूरे देश में फूड सेफ्टी के मानक एक जैसे ही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब महाराष्ट्र में यह एक्शन हो सकता है, तो मध्यप्रदेश का एफडीए उदासीन क्यों बना रहता है।
आबकारी विभाग तक सीमित जांच
महाराष्ट्र मॉडल से सीखने की सलाह
इससे पूरे देश में लोगों का ध्यान उस राज्य की कार्रवाई की तरफ गया है। इसी बीच मध्यप्रदेश में लगातार खानपान की चीजों में मिलावट और बड़ी घटनाएं सामने आ रही हैं। इसके बाद लोग यहां भी महाराष्ट्र जैसी सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे हैं।
एफडीए के पास अधिकार, फिर भी सुस्ती
वहीं, अफसर इस अधिकार का इस्तेमाल करने की हिम्मत ही नहीं दिखा पाते। इससे पहले एफडीए ने बालाघाट, भोपाल और सतना जैसे जिलों में बियर के सैंपल लिए थे। सवाल यह है कि जब बियर के सैंपल लिए गए, तो नकली शराब के सैंपल कभी क्यों नहीं लिए गए।
छिंदवाड़ा में भी सचेत नहीं हुआ विभाग
जांच में सामने आया कि उस सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 48.6 प्रतिशत तक थी, जो तय मानक से कहीं ज्यादा और बेहद जानलेवा थी। अगर सिरप के सैंपल की जांच पहले हो जाती, तो बाजार में इसकी बिक्री रोकी जा सकती थी। इस लापरवाही के बाद उस समय एफडीए के प्रभारी नियंत्रक रहे आईएएस दिनेश मौर्य को तुरंत हटा दिया गया।
सागर में भी वही लापरवाही दोहराई
अब तक मरने वालों की संख्या 30 के पार पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि एफडीए के अफसरों की तैनाती सागर में भी है। अगर विभाग समय रहते शराब की सैंपलिंग या जांच कराता, तो शायद यह बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी।
पुरानी सरकार में हुई थी सख्त कार्रवाई
तीन आईएएस अफसरों के पास रही कमान
मनोज पुष्प से पहले 2024 में एफडीए की कमान आईएएस मयंक अग्रवाल के पास थी। इससे पहले 2020-21 में पी नरहरि और छिंदवाड़ा सिरप कांड के समय आईएएस दिनेश मौर्य इस पद पर थे। चर्चा यह भी है कि यह पद आर्थिक दृष्टि से काफी अहम माना जाता है।
अब क्या बदलाव जरूरी
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर बताती है कि सरकारी विभागों के बीच जिम्मेदारी का बंटवारा सही न होने से आम लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है। अधिकारियों की जवाबदेही तय होना पारदर्शी और जिम्मेदार प्रशासन के लिए जरूरी है। इसलिए यह खबर सामाजिक सुरक्षा और सुशासन दोनों नजरिए से पाठकों के लिए जरूरी है।
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