भोपाल जिला पंचायत और NHM संविदा कर्मियों को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से राहत, नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठाया सवाल

Neel Tiwari | Sootr Creatives | Oct 01, 2026, 17:04 IST
Share
NHM संविदा कर्मियों को हाईकोर्ट से राहत​
NHM संविदा कर्मियों को हाईकोर्ट से राहत​

भोपाल के 41 संविदा कर्मचारियों को कोर्ट से राहत मिली है। जिला पंचायत और दूसरे विभागों के ये कर्मचारी भर्ती से बाहर हुए थे। हाई कोर्ट ने इन सबकी नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कुल 84 रिक्त पदों में से 41 पद सुरक्षित रखने को कहा है। ये खाली पद अगले 90 दिनों तक पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

कर्मचारियों के संविदा पद पे मैट्रिक्स लेवल 4 या 5 के थे। वहीं सुपरवाइजर का नियमित पद पे मैट्रिक्स लेवल 6 का था। हालांकि हाई कोर्ट ने इन 41 कर्मचारियों को सीधे नियुक्ति नहीं दी है। कोर्ट ने सिर्फ उनके लिए 41 खाली पद सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। इस फैसले से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।

सुपरवाइजर भर्ती से शुरू हुआ पूरा विवाद

महिला एवं बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर की भर्ती निकली थी। यह वर्ग-III का नियमित पद था। इस पद का पे मैट्रिक्स लेवल 6 था। भर्ती में संविदा कर्मचारियों के लिए 50 प्रतिशत पद रखे गए थे। यह व्यवस्था सामान्य प्रशासन विभाग के 22 जुलाई 2023 के सर्कुलर के आधार पर लागू की गई थी।

परीक्षा पास करने के बाद भी नियुक्ति नहीं मिली

याचिकाकर्ताओं ने संविदा कोटे से भर्ती परीक्षा दी थी। उन्होंने परीक्षा पास की। मेरिट लिस्ट में भी जगह बनाई। भोपाल जिला पंचायत की प्रियंका शर्मा इसका उदाहरण हैं। वह 2019 से डेटा एंट्री ऑपरेटर हैं। उन्होंने 98.65 प्रतिशत अंक हासिल किए। उनकी 24वीं रैंक आई थी।

उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन भी हो गया था। इसके बाद 9 फरवरी 2026 को 158 उम्मीदवारों की नियुक्ति हुई।लेकिन याचिकाकर्ताओं को नियुक्ति नहीं मिली। उनसे नीचे रैंक वाले कई उम्मीदवार नियुक्त हो गए।

इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंच गया।

संविदा पद के लेवल को लेकर अटक गई नियुक्ति

विभाग ने संविदा कर्मचारियों को अयोग्य ठहरा दिया है। उनके मौजूदा पद लेवल 4 या 5 के हैं। वहीं सुपरवाइजर का पद लेवल 6 का था। विभाग ने दोनों पदों के इस अंतर को समस्या माना। इसी वजह से इन्हें समतुल्य पद की कमी मान लिया गया।

कर्मचारियों को इस अयोग्यता की कोई लिखित जानकारी नहीं दी गई थी। उन्हें इस बात की सूचना केवल मौखिक रूप से दी गई थी।

कर्मचारियों ने पुराने सर्कुलर का दिया हवाला

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कैलाश चंद्र घिल्डियाल पेश हुए। उन्होंने कहा कि दोनों पद वर्ग-III के हैं। इसलिए दोनों पदों को बराबर माना जाना चाहिए।

इसके लिए उन्होंने 5 जून 2018 के GAD सर्कुलर का हवाला दिया। कर्मचारियों ने 2023 के सर्कुलर के अलग-अलग कॉलम भी बताए। उनका कहना था कि वर्ग और पे मैट्रिक्स अलग चीजें हैं। सिर्फ कम संविदा वेतन के आधार पर मौका नहीं रोका जाना चाहिए।

उन्होंने पुराने नियमितीकरण के उदाहरण भी कोर्ट के सामने रखे। इनमें लेवल 4 से लेवल 6 और लेवल 7 तक की नियुक्तियां शामिल थीं।

सरकार ने 2023 के नियम को माना निर्णायक

राज्य की ओर से सरकारी वकील प्रभांशु शुक्ला ने याचिका का विरोध किया। सरकार ने 22 जुलाई 2023 के सर्कुलर का हवाला दिया। सरकार का कहना था कि इस सर्कुलर ने 2018 की व्यवस्था बदल दी है।

नई व्यवस्था में पदों की बराबरी पे मैट्रिक्स लेवल से तय होगी। सरकार ने बताया कि सुपरवाइजर का पद लेवल 6 का है। सभी 41 याचिकाकर्ता लेवल 4 या 5 पर काम कर रहे थे। इसलिए वे तय शर्त पूरी नहीं करते थे।

सरकार ने 26 और 27 सितंबर 2023 के समतुल्यता आदेश भी कोर्ट के सामने रखे।

हाई कोर्ट ने लेवल 4 और 5 को लेवल 6 नहीं माना

जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने इस दलील पर विस्तार से विचार किया। कोर्ट ने 2023 के सर्कुलर को साफ व्यवस्था माना। कोर्ट के अनुसार उसमें पे मैट्रिक्स लेवल महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए केवल वर्ग-III होने से दोनों पद समान नहीं हो जाते।

कोर्ट ने 9 फरवरी की नियुक्तियां रद्द करने से इनकार किया। पहले से नियुक्त 158 उम्मीदवारों को हटाने का आदेश भी नहीं दिया। इस हिस्से में राज्य की मुख्य दलील स्वीकार की गई।

भर्ती प्रक्रिया के तरीके पर कोर्ट ने सवाल उठाया

इसके बावजूद कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया के तरीके पर चिंता जताई। विभाग को आवेदन के समय कर्मचारियों का वेतन स्तर पता था। इसके बावजूद उन्हें परीक्षा में शामिल किया गया। उन्हें मेरिट में आने दिया गया। दस्तावेज सत्यापन भी पूरा कराया गया।

इसके बाद अंतिम चरण में उन्हें अयोग्य बताया गया। कोर्ट ने इस तरीके को प्रक्रियागत रूप से उचित नहीं माना। कोर्ट ने कर्मचारियों के वास्तविक काम को भी महत्व दिया। उनके पास जिला पंचायत और NHM का व्यापक अनुभव था।

अब 41 कर्मचारियों के काम की होगी अलग जांच

कोर्ट ने तीनों याचिकाओं के 41 कर्मचारियों के मामले समिति को भेजे हैं। यह समिति 22 जुलाई 2023 के सर्कुलर के तहत बनी है। समिति अब कर्मचारियों के वास्तविक काम की जांच करेगी। वह इन कामों की तुलना सुपरवाइजर के काम से करेगी।

जांच केवल पे मैट्रिक्स के अंतर तक सीमित नहीं रहेगी। कर्मचारियों की वास्तविक जिम्मेदारियां भी देखी जाएंगी। उनके मूल और प्रशासनिक काम की भी जांच होगी। समिति को कारण सहित अंतिम फैसला देना होगा। यह फैसला 90 दिनों में करना होगा।

84 खाली पदों में से 41 पद सुरक्षित रहेंगे

इस मामले में महिला संविदा कर्मचारियों के लिए 126 पद रखे गए थे। इनमें से केवल 42 पद भरे गए थे। इससे 84 पद खाली रह गए थे। याचिकाकर्ताओं ने इन्हीं खाली पदों पर मौका मांगा था।

कोर्ट ने इस मांग को ध्यान में रखते हुए बड़ा निर्देश दिया। राज्य को 84 खाली पदों में से 41 पद सुरक्षित रखने होंगे। ये 41 पद फिलहाल खाली ही रखे जाएंगे। इन पर नई नियुक्ति नहीं की जाएगी। यह व्यवस्था समिति के फैसले तक लागू रहेगी।

MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती: हाईकोर्ट ने 3 को दी राहत, 1 की याचिका खारिज, योग्यता का पेंच सुलझा | MPPSC Assistant Professor Recruitment: High Court grants relief to 3, dismisses 1 petition, resolves eligibility issue
MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में योग्यता का पेंच, हाईकोर्ट ने तीन उम्मीदवारों को दी राहत, 1 की याचिका खारिज
01 Oct 2026 ,
By Neel Tiwari
MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में योग्यता के नियमों पर हाई कोर्ट ने आयोग की मनमानी को झटका दिया। कोर्ट ने तीन उम्मीदवारों की अयोग्यता रद्द कर दी। वहीं एक उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी गई। कोर्ट ने सह-विषयों पर MPPSC के कड़े रुख को गलत माना। नियमों की संकीर्ण व्याख्या को अदालत ने रद्द कर दिया।
MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में योग्यता के नियमों पर हाई कोर्ट ने आयोग की मनमानी को झटका दिया। कोर्ट ने तीन उम्मीदवारों की अयोग्यता रद्द कर दी। वहीं एक उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी गई। कोर्ट ने सह-विषयों पर MPPSC के कड़े रुख को गलत माना। नियमों की संकीर्ण व्याख्या को अदालत ने रद्द कर दिया।

158 नियुक्त कर्मचारियों की नौकरी पर असर नहीं

कोर्ट ने पहले से नियुक्त 158 उम्मीदवारों की नियुक्तियां रद्द नहीं कीं। याचिकाकर्ताओं ने भी उनकी नियुक्तियां हटाने की मांग नहीं की थी। उनका दावा खाली बचे पदों तक सीमित था। कोर्ट ने इसी आधार पर मामले को आगे बढ़ाया।

इसलिए मौजूदा नियुक्त कर्मचारियों की स्थिति बनी रहेगी। दूसरी तरफ 41 याचिकाकर्ताओं के लिए पद सुरक्षित रहेंगे। समिति की रिपोर्ट आने तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं होगी।

हाई कोर्ट ने सीधे नियुक्ति का आदेश नहीं दिया

इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि 41 कर्मचारियों को नौकरी मिल गई। कोर्ट ने उनकी पात्रता पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। अब समिति उनके काम की वास्तविक समानता देखेगी। समिति की रिपोर्ट के बाद आगे की स्थिति साफ होगी।

कोर्ट ने मुख्य नियुक्ति आदेश को रद्द करने से इनकार किया। साथ ही कर्मचारियों की शिकायत को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया। कोर्ट ने दोनों पहलुओं के बीच रास्ता निकाला। इसमें 41 पदों को सुरक्षित रखना अहम हिस्सा है।

मध्यप्रदेश की जमीन का केस छत्तीसगढ़ में क्यों चलेगा? हाई कोर्ट ने CPC धारा 17 के तहत दिया फैसला | Why will the case of land in Madhya Pradesh be heard in Chhattisgarh? High Court gave decision under CPC Section 17
मध्यप्रदेश की जमीन का केस छत्तीसगढ़ में क्यों चलेगा? हाई कोर्ट ने CPC धारा 17 के तहत दिया फैसला
01 Oct 2026 ,
By Umeshwari Baghel
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की जमीन से जुड़े विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि अगर एक ही विवाद से जुड़ी जमीन अलग-अलग राज्यों या अदालतों की सीमा में आती है तो मुकदमा उस अदालत में भी चल सकता है जहां संबंधित संपत्तियों में से कोई एक स्थित हो।
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की जमीन से जुड़े विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि अगर एक ही विवाद से जुड़ी जमीन अलग-अलग राज्यों या अदालतों की सीमा में आती है तो मुकदमा उस अदालत में भी चल सकता है जहां संबंधित संपत्तियों में से कोई एक स्थित हो।

90 दिन में सामने आएगा अगला फैसला

समिति को हाई कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने से समय गिना जाएगा। इसके बाद उसे 90 दिनों में फैसला देना होगा। फैसला कारण सहित होना जरूरी है। जांच में कर्मचारियों के वास्तविक काम की तुलना की जाएगी।

इस तरह भर्ती का विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब अगला फैसला समतुल्यता समिति के स्तर पर होगा। फिलहाल 41 पदों पर किसी अन्य की नियुक्ति नहीं होगी। इन्हें 41 याचिकाकर्ताओं के संभावित अधिकार के लिए खाली रखा जाएगा।

हाई कोर्ट के आदेश का सीधा असर

इस मामले में 41 संविदा कर्मचारियों को तत्काल नियुक्ति नहीं मिली है। लेकिन उनके लिए 41 पद सुरक्षित कर दिए गए हैं। ये पद समिति के अंतिम फैसले तक रिक्त रहेंगे। समिति उनके काम और सुपरवाइजर पद की समानता जांचेगी।

वहीं 158 पहले से नियुक्त उम्मीदवारों की नियुक्तियां बरकरार रहेंगी। इस तरह कोर्ट ने पुरानी नियुक्तियों को नहीं छेड़ा है। साथ ही संविदा कर्मचारियों के दावे को जांच का मौका दिया है। अब पूरे मामले की अगली दिशा समिति तय करेगी।

FAQ

  1. हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के लिए क्या फैसला सुनाया है?
    हाई कोर्ट ने 41 कर्मचारियों के लिए 41 खाली पद सुरक्षित रखने का आदेश दिया है, लेकिन उन्हें सीधे नियुक्ति नहीं दी है।
  2. सुपरवाइजर भर्ती विवाद का मुख्य कारण क्या था?
    यह विवाद इसीलिए शुरू हुआ क्योंकि सुपरवाइजर का नियमित पद पे मैट्रिक्स लेवल 6 का था, जबकि याचिकाकर्ता संविदा कर्मचारियों के पास लेवल 4 और 5 थे।
  3. समिति को क्या जांच करनी है और उसका निर्णय कब तक आएगा?
    समिति को कर्मचारियों के वास्तविक काम की जांच करनी है और सुपरवाइजर के काम से उसकी समानता की तुलना करनी है। समिति को 90 दिनों में अपना निर्णय देना होगा।
Tags:
  • भोपाल जिला पंचायत
  • मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
  • NHM
  • महिला एवं बाल विकास विभाग
  • सुपरवाइजर भर्ती
  • डेटा एंट्री ऑपरेटर
  • जस्टिस विवेक कुमार सिंह
  • जिला पंचायत
  • संविदा कर्मचारियों को कोर्ट से राहत
  • GAD सर्कुलर
मध्य भारत में मौसम ने बदली करवट! मध्यप्रदेश में आंधी-बारिश, राजस्थान में बादल, छत्तीसगढ़ में सूखा रहेगा मौसम

By Amresh Kushwaha

मध्य भारत में मौसम ने बदली करवट! मध्यप्रदेश में आंधी-बारिश, राजस्थान में बादल, छत्तीसगढ़ में सूखा रहेगा मौसम
मध्य भारत में मौसम ने बदली करवट! मध्यप्रदेश में आंधी-बारिश, राजस्थान में बादल, छत्तीसगढ़ में सूखा रहेगा मौसम

By Amresh Kushwaha

मध्य भारत में मौसम ने बदली करवट! मध्यप्रदेश में आंधी-बारिश, राजस्थान में बादल, छत्तीसगढ़ में सूखा रहेगा मौसम
मध्य भारत में मौसम ने बदली करवट! मध्यप्रदेश में आंधी-बारिश, राजस्थान में बादल, छत्तीसगढ़ में सूखा रहेगा मौसम

By Amresh Kushwaha

मध्य भारत में मौसम ने बदली करवट! मध्यप्रदेश में आंधी-बारिश, राजस्थान में बादल, छत्तीसगढ़ में सूखा रहेगा मौसम
मध्य प्रदेश में सरप्लस उत्पादन फिर भी महंगी बिजली खरीदेगी सरकार, कांग्रेस ने उठाए सवाल

By Sanjay Sharma

मध्य प्रदेश में सरप्लस उत्पादन फिर भी महंगी बिजली खरीदेगी सरकार, कांग्रेस ने उठाए सवाल
पहले शिकायत, फिर नियुक्ति और अब विदाई! डिप्टी सीएम देवड़ा के यहां किसकी चली? OSD की नियुक्ति की फाइलों पर सवाल

By Ramanand Tiwari

पहले शिकायत, फिर नियुक्ति और अब विदाई! डिप्टी सीएम देवड़ा के यहां किसकी चली? OSD की नियुक्ति की फाइलों पर सवाल
27% ओबीसी आरक्षण: हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस की चूक गिनाई, अब भाजपा का रास्ता क्या?

By Ramanand Tiwari

27% ओबीसी आरक्षण: हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस की चूक गिनाई, अब भाजपा का रास्ता क्या?
OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला: CM मोहन यादव की पहली प्रतिक्रिया, बोले- कानूनी परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी सरकार

By Sumit Kumar

OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला: CM मोहन यादव की पहली प्रतिक्रिया, बोले- कानूनी परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी सरकार