एमपी स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खेल: 66 पद की मंजूरी, बांट दिए 318 नियुक्ति पत्र
Amresh Kushwaha | Aug 05, 2026, 15:10 IST
एमपी स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खेल
मंदसौर के स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स भर्ती घोटाला सामने आया है। यहां 66 पदों की मंजूरी थी, लेकिन 318 नियुक्तियां कर दी गईं। सीएमएचओ डॉ. गोविंद सिंह चौहान निलंबित हुए हैं। उनके भतीजे जयदीप पर पैसों की डील करने का आरोप है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मंदसौर सीएमएचओ दफ्तर में भर्ती घोटाला सामने आया है।
- 66 पदों की मंजूरी थी, लेकिन 318 नियुक्तियां कर दी गईं।
- सीएमएचओ डॉ. गोविंद सिंह चौहान को निलंबित कर दिया गया है।
- उनके भतीजे जयदीप पर पैसों की डील करने का आरोप है।
- गांव-गांव तक फैले दलालों के नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है।
66 पद, 318 नियुक्तियां
अतिरिक्त भर्ती के लिए न शासन से अनुमति ली गई, न वेतन के मद पर कोई फैसला हुआ। कई नियुक्तियां सिर्फ आउटसोर्स एजेंसी के लेटरहेड पर जारी कर दी गईं। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में इनमें से कई नामों का जिक्र तक नहीं है।
भतीजे की भूमिका पर सवाल
मंदसौर विधायक विपिन जैन का कहना है कि उन्होंने कई बार कलेक्टर और सीएमएचओ (CMHO) से इसकी शिकायत की थी। उनके मुताबिक एक युवक से भर्ती के नाम पर 70 हजार रुपए लिए गए थे। शिकायत के बाद विधायक के हस्तक्षेप से यह राशि वापस कराई गई।
वेतन न मिलने पर खुला राज
हनुमंतिया के गोवर्धनलाल चंद्रवंशी का दावा है कि छह लोगों की भर्ती के लिए उन्होंने नौ लाख रुपए से ज्यादा दिए थे। छह में से सिर्फ चार को ही वेतन मिला था। इसके बाद जयदीप ने फोन उठाना बंद कर दिया। बनी गांव के वीरेंद्र सिंह ने भी 11 लोगों की भर्ती के लिए सात लाख 70 हजार रुपए देने का आरोप लगाया है। बाद में उनसे लिखवाया गया कि उन्होंने किसी को पैसे नहीं दिए। शक होने पर उन्होंने कलेक्टर से शिकायत कर दी।
बिना मंजूरी कैसे हुई भर्ती
एजेंसी ने झाड़ा पल्ला
उन्होंने कहा कि अगर किसी ने एजेंसी के लेटरहेड का गलत इस्तेमाल किया है तो यह गलत है। एजेंसी ने अतिरिक्त कर्मचारियों को हटाने के लिए विभाग को पत्र भी भेजा है। हालांकि 132 नियुक्तियां किस आधार पर हुईं, इस पर उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया।
गांव-गांव फैला नेटवर्क
उन्होंने एक साथ कई अभ्यर्थियों की भर्ती के लिए पैसे लिए और आगे पहुंचाए। जांच में यह भी सामने आया कि डॉक्टरों के जरिए भी जयदीप तक पैसा पहुंचाने के आरोप हैं। पड़ताल में कुछ डॉक्टरों के नाम भी सामने आए हैं, जिनके जरिए रकम पहुंचाई जाने की बात कही जा रही है।
सीएमएचओ की सफाई
यह खबर क्यों जरूरी है
यह मामला अभी जांच के दायरे में है, इसलिए अंतिम फैसला जांच पूरी होने के बाद ही आएगा। संवैधानिक व्यवस्था में हर नागरिक को निष्पक्ष जांच और सुनवाई का अधिकार है। यह खबर प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता की जरूरत को भी सामने रखती है।
FAQ
- मंदसौर सीएमएचओ दफ्तर में क्या घोटाला सामने आया है?
जिले में सिर्फ 66 मल्टी टास्क वर्करों की भर्ती को मंजूरी मिली थी, लेकिन कथित तौर पर 318 नियुक्तियां कर दी गईं। इस मामले में सीएमएचओ डॉ. गोविंद सिंह चौहान को निलंबित किया गया है।
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