सिर्फ 980 रुपए के लिए अटके ढाई करोड़, HC ने पूरे प्रदेश के लिए जारी किए निर्देश
Neel Tiwari | Jul 28, 2026, 10:47 IST
शराब कारोबारी का खाता फ्रीज
भोपाल की शराब कारोबारी का ढाई करोड़ वाला बैंक खाता केवल 980 के संदिग्ध लेन-देन पर फ्रीज कर दिया गया। एमपी हाईकोर्ट ने इसे गलत बताते हुए बैंक और पुलिस के लिए सख्त नियम तय किए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल की शराब कारोबारी का बैंक खाता 980 रु के संदिग्ध लेनदेन पर फ्रीज हुआ था।
- खाते में करीब 2.52 करोड़ रूपए अधिक की राशि मौजूद थी।
- कारोबारी ने पूरे खाते की बजाय केवल 980 रुपए रोकने की मांग की।
- अदालत ने भविष्य के मामलों के लिए सभी बैंकों और पुलिस को नए निर्देश जारी किए।
छोटे विवाद पर उठा बड़ा सवाल
छोटे से लेनदेन पर ढाई करोड़ का खाता फ्रीज
बाद में पता चला कि हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बल्ह थाना प्रभारी के नोटिस पर कार्रवाई हुई। नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 106 के तहत जारी हुआ था। विवाद केवल 980 रूपए के एक संदिग्ध साइबर लेनदेन का था। जबकि खाते में 2 करोड़ 51 लाख रुपए से अधिक मौजूद थे।
कारोबारी ने कहा, सिर्फ विवादित रकम रोकिए
याचिकाकर्ता ने बताया कि इसी खाते से लाइसेंस शुल्क जमा होता है। आबकारी विभाग को भुगतान भी इसी खाते से किया जाता है। पूरा खाता बंद होने से कारोबार रुक गया। आर्थिक नुकसान बढ़ने लगा।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
पूरा खाता फ्रीज तभी किया जाए जब उसके ठोस कारण लिखित रूप में मौजूद हों। अदालत ने साफ कहा कि ऐसी कार्रवाई नागरिक के कारोबार और संपत्ति के अधिकार को भी प्रभावित करती है। इसलिए हर फैसला संतुलित और उचित होना चाहिए।
बैंकों की जिम्मेदारी भी तय
जांच एजेंसियों के लिए भी नियम तय
पूरे खाते को फ्रीज करने का फैसला केवल विशेष परिस्थितियों में लिया जाए। इसके लिए लिखित कारण दर्ज करना जरूरी होगा। जांच अधिकारी को मजिस्ट्रेट को भी समय पर सूचना देनी होगी। हर कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा।
बैंक और जांच अधिकारी के लिए समय सीमा
वहीं जरूरत होने पर मामला जिला शिकायत निवारण अधिकारी के पास जाएगा। वहां भी पंद्रह दिन में निर्णय देना होगा। यदि 90 दिन तक मामला नहीं सुलझता और आगे रोक का वैध आदेश नहीं होता, तो बैंक तय प्रक्रिया पूरी कर खाता खोल सकेगा।
हाईकोर्ट ने क्या दिया आदेश
पूरे प्रदेश में लागू होंगे ये निर्देश
यह निर्देश भविष्य में साइबर शिकायतों के कारण बैंक खाते फ्रीज करने वाले मामलों में लागू होंगे। हालांकि यदि कोई नया कानून, सुप्रीम कोर्ट का फैसला या सरकारी निर्देश आता है, तो वही प्रभावी रहेगा।
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