जस्टिस विशाल मिश्रा ने सोम डिस्टिलरीज केस की सुनवाई से खुद को किया अलग
Neel Tiwari | Feb 24, 2026, 20:33 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश की विवादित शराब कंपनी सोम डिस्टिलरीज के लाइसेंस निलंबन मामले में जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद को सुनवाई से अलग किया। अब यह केस नई बेंच के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
JABALPUR. मध्य प्रदेश में विवादों से घिरी शराब कंपनी सोम डिस्टिलरीज के लाइसेंस निलंबन मामले में नया मोड़ आ गया है। Madhya Pradesh High Court की जबलपुर पीठ में सुनवाई से पहले ही जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद को इस केस से अलग कर लिया है। अब यह मामला नई बेंच के सामने पेश किया जाएगा। हालांकि, जस्टिस ने खुद को इस मामले से अलग करने का कोई कारण आदेश में नहीं बताया है।
यह मामला साल 2023 में सामने आया था। सोम डिस्टलरी ने नकली परमिट के जरिए अवैध शराब का परिवहन किया था। इस मामले में देपालपुर की सत्र अदालत ने कंपनी से जुड़े कुछ कर्मचारियों को IPC की गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया था।
दोष सिद्ध कर्मचारियों में उमाशंकर शर्मा, जीडी अरोड़ा, दिनकर सिंह, मोहन सिंह तोमर और दीनानाथ सिंह के नाम शामिल थे। अदालत ने उन्हें कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। अब लगातार आरोपों से घिरी रही कंपनी सरकार के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची है।
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महाधिवक्ता से कानूनी राय लेने के बाद तत्कालीन आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने 4 फरवरी 2026 को सोम डिस्टिलरीज के सेहतगंज और रोजराजक (जिला रायसेन) स्थित दो लाइसेंस निलंबित कर दिए।
विभाग का तर्क है कि भले ही सजा पर हाईकोर्ट ने अस्थायी रोक दी हो, लेकिन दोषसिद्धि अभी भी प्रभावी है। ऐसे में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई वैध है।
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4 फरवरी 2026 को जारी आदेश, जिसे चैलेंज किया गया है---
फरवरी 2024 में भेजा गया कारण बताओं नोटिस--
सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड और सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रुअरीज प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में उनके लाइसेंस के निलंबन पर सवाल उठाए हैं। हकीकत यह है कि इस कंपनी के खिलाफ बिजली विभाग से लेकर इसके कर्मचारियों तक ने कोर्ट में मामले दायर कर रखें हैं। लगातार अवैध शराब के परिवहन से लेकर शराब से जुड़े कई मामलों में यह कंपनी हाई कोर्ट सहित जिला अदालत में भी आरोपी बनी हुई है।
यह मामला जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच में 6 फरवरी 2026 को लिस्ट था। जिसका आदेश आज 24 फरवरी को अपलोड हुआ है। आदेश मे जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद को इस केस की सुनवाई से अलग कर लिया। उन्होंने आदेश में कोई कारण दर्ज नहीं किया, लेकिन निर्देश दिया कि मामला ऐसी बेंच के सामने रखा जाए, जिसमें वे सदस्य न हों।
हाईकोर्ट के गलियारों में यह चर्चाएं तेज हैं कि जब इस मामले की सुनवाई 6 फरवरी 2026 को हुई थी तो 24 फरवरी 2026 तक इस मामले का आदेश सामने क्यों नहीं आया। कानूनी जानकार यह भी चर्चा कर रहे हैं कि यदि किसी मामले को हर्ड एंड रिजर्व रखा जाता है तो पिछले आदेश में यह लिखा होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।
अब कोर्ट में यह चर्चाएं चल रही हैं कि सोम डिस्टलरी में बैठे धनकुबेर खुद को कोर्ट से भी ऊपर समझते हैं और वह इतने दिनों तक मामले को अपने पक्ष में लाने के सेटअप में जुड़े हुए थे। चर्चाएं तो यह भी हैं कि हाईकोर्ट इंटेलिजेंस ने इस मामले में दखलंदाजी की है। हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं है। 'द सूत्र' भी इस तरह के किसी आरोप या चर्चा की पुष्टि नहीं करता।
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अब यह मामला हाईकोर्ट की नई बेंच के सामने सुना जाएगा। सबकी नजर इस बात पर है कि क्या कोर्ट निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगाता है या फिर आबकारी विभाग की कार्रवाई को सही ठहराता है।
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दोष सिद्ध कर्मचारियों में उमाशंकर शर्मा, जीडी अरोड़ा, दिनकर सिंह, मोहन सिंह तोमर और दीनानाथ सिंह के नाम शामिल थे। अदालत ने उन्हें कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। अब लगातार आरोपों से घिरी रही कंपनी सरकार के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची है।
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विभाग का तर्क है कि भले ही सजा पर हाईकोर्ट ने अस्थायी रोक दी हो, लेकिन दोषसिद्धि अभी भी प्रभावी है। ऐसे में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई वैध है।
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4 फरवरी 2026 को जारी आदेश, जिसे चैलेंज किया गया है---
फरवरी 2024 में भेजा गया कारण बताओं नोटिस--
आरोपों से घिरी कंपनी खुद को बता रही पाक साफ
जस्टिस विशाल मिश्रा ने क्यों किया खुद को मामले से अलग?
कोर्ट के गलियारों में चर्चाएं हुई तेज
अब कोर्ट में यह चर्चाएं चल रही हैं कि सोम डिस्टलरी में बैठे धनकुबेर खुद को कोर्ट से भी ऊपर समझते हैं और वह इतने दिनों तक मामले को अपने पक्ष में लाने के सेटअप में जुड़े हुए थे। चर्चाएं तो यह भी हैं कि हाईकोर्ट इंटेलिजेंस ने इस मामले में दखलंदाजी की है। हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं है। 'द सूत्र' भी इस तरह के किसी आरोप या चर्चा की पुष्टि नहीं करता।
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