मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अच्छी आय वाली पत्नी को नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता
Manya Jain | Jun 24, 2026, 15:45 IST
mp high court jabalpur maintenance rejected working wife
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सवा लाख रुपए मासिक कमाने वाली भोपाल की महिला का भरण-पोषण आवेदन खारिज किया। जस्टिस विवेक जैन ने इसे शेक्सपियर के मर्चेंट ऑफ वेनिस से जोड़ते हुए कहा यह मांग उचित नहीं।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल की एक कामकाजी महिला की अंतरिम भरण-पोषण याचिका खारिज कर दी।
- अदालत ने पाया कि महिला की खुद की मासिक आय सवा लाख रुपये से ज्यादा है।
- जस्टिस विवेक जैन ने इस मामले में शेक्सपियर के मशहूर नाटक की मिसाल दी।
- कोर्ट ने साफ किया कि भरण-पोषण का कानून सिर्फ जरूरतमंदों की मदद के लिए है।
- हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही फैमिली कोर्ट के पुराने फैसले को सही माना।
जब अदालत ने शेक्सपियर याद किया
उन्होंने कहा कि इस नाटक में एक किरदार एक पाउंड मांस की मांग करता है। यह मांग जायज नहीं होती। ठीक उसी तरह सवा लाख रुपए महीना कमाने वाली पत्नी का पति से भरण-पोषण मांगना भी उचित नहीं है।
क्या था पूरा मामला
महिला ने हाईकोर्ट में फेमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। उसका तर्क था कि उसकी आय कम हो गई है और उसे आर्थिक सहायता की जरूरत है।
कोर्ट ने क्या पाया
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भले ही उसकी सालाना आय 14.81 लाख रुपए मानी जाए, तब भी वह हर महीने 1.25 लाख रुपए कमा रही है। इतनी आय में वह खुद अपना भरण-पोषण करने में पूरी तरह सक्षम है।
क्यों नहीं बना आर्थिक निर्भरता का मामला
जस्टिस विवेक जैन ने कहा कि जब दोनों की आर्थिक स्थिति लगभग बराबर हो, तो आर्थिक निर्भरता का सवाल ही नहीं उठता। भरण-पोषण का मकसद कमजोर पक्ष की मदद करना है। यहां ऐसी कोई स्थिति नहीं थी।
भरण-पोषण का असली मकसद क्या है
जब दोनों पक्ष आर्थिक रूप से एक जैसी स्थिति में हों, तो एक का दूसरे से भरण-पोषण मांगना कानूनन उचित नहीं ठहरता। यह फैसला उसी सोच पर मुहर लगाता है।
हाईकोर्ट का अंतिम फैसला
FAQ
- क्या नौकरीपेशा पत्नी को भरण-पोषण मिल सकता है?
कानूनन भरण-पोषण उस पक्ष को मिलता है जो आर्थिक रूप से जरूरतमंद हो। अगर पत्नी खुद पर्याप्त कमा रही है और आत्मनिर्भर है, तो कोर्ट उसकी मांग खारिज कर सकता है। यह मामला उसी का उदाहरण है। - इस मामले में हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने महिला की याचिका खारिज कर दी। फेमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखा गया। कोर्ट ने कहा कि सवा लाख रुपए कमाने वाली महिला को भरण-पोषण देने की जरूरत नहीं है। - मर्चेंट ऑफ वेनिस का इस मामले से क्या संबंध है?
शेक्सपियर के नाटक मर्चेंट ऑफ वेनिस में एक किरदार एक पाउंड मांस की अनुचित मांग करता है। जस्टिस विवेक जैन ने आर्थिक रूप से सक्षम पत्नी की भरण-पोषण मांग को उसी से जोड़ा। यह एक साहित्यिक उपमा थी जो अनुचित मांग को दर्शाती है।
मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री, 12 जिलों से पहुंचा, 33 जिलों में तेज आंधी-बारिश का अलर्ट
बॉक्स ऑफिस पर Maa Inti Bangaram की धूम, बनी साल की 7वीं बड़ी साउथ फिल्म
अशोकनगर में मंदिरों की 2164 एकड़ जमीन होगी नीलाम, संत समाज ने जताई नाराजगी
बिजली कर्मचारी हड़ताल पर, नियमितीकरण की मांग, कंपनी ने थमाया नोटिस
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
By Ashish Bhardwaj