5 लाख संविदा कर्मियों की एक और जीत! सरकार को हाईकोर्ट की दो टूक - अब काम करो

Neel Tiwari | Apr 22, 2026, 15:11 IST
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mp high court victory contractual employees permanent status
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मध्य प्रदेश के लाखों संविदा कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सरकार द्वारा आदेश पर रोक लगाने की मांग को कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट के सख्त रुख से अब स्थायी दर्जा और न्यूनतम वेतन की उम्मीद और मजबूत हो गई है।

News in short

  • हाईकोर्ट ने संविदा कर्मचारियों को स्थायी मानने के आदेश पर स्टे देने से इन्कार कर दिया है।
  • लगभग पांच लाख कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
  • सरकार की दलीलों को कोर्ट ने अपर्याप्त बताया है।
  • कोर्ट ने कहा - अब वक्त आ गया है कि विभाग सक्रिय होकर काम करें।
  • सरकार को सिंगल बेंच के सामने फिर से अपना पक्ष रखने को कहा गया है।

News in detail

सरकार की कोशिश नाकाम

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में संविदा कर्मचारियों से जुड़े इस बड़े मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगाने के लिए डिवीजन बेंच का दरवाजा खटखटाया था। वहीं, कोर्ट ने साफ शब्दों में स्टे देने से इन्कार कर दिया है। इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के लगभग पांच लाख संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिन्हें अब राहत मिलने की उम्मीद और बढ़ गई है।

2020 से चल रहा था मामला

यह पूरा विवाद वर्ष 2020 में दायर रिट याचिका से जुड़ा है। इसमें राधेश्याम वर्मा सहित अन्य कर्मचारियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे वर्ष 2009 से लगातार सेवा दे रहे हैं।

करीब 16 साल तक काम करने के बावजूद उन्हें 07 अक्टूबर 2016 की नीति का लाभ नहीं दिया जा रहा था, जबकि इसी नीति के तहत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी घोषित कर न्यूनतम वेतनमान दिया जाता है।

सिंगल बेंच ने दिया था ऐतिहासिक आदेश

09 अप्रैल 2026 को जस्टिस विशाल धगत की सिंगल बेंच ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इसमें कहा था कि यदि सरकार 10 वर्षों से अधिक समय तक किसी कर्मचारी से संविदा पर काम ले रही है, तो इसका अर्थ है कि उस कार्य की स्थायी आवश्यकता है।

कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 38, 39(a) और 43 का हवाला देते हुए राज्य को श्रमिकों को सम्मानजनक जीवन और उचित वेतन देने का दायित्व भी याद दिलाया था।

डिवीजन बेंच में सरकार की दलीलें पड़ीं कमजोर

सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देते हुए सरकार ने चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान सरकार ने तर्क दिया कि कुछ अहम दस्तावेज पहले पेश नहीं किए जा सके थे, इसलिए आदेश पर रोक जरूरी है। वहीं, कोर्ट ने इन दलीलों को अपर्याप्त मानते हुए स्टे देने से साफ इन्कार कर दिया है।

हाईकोर्ट की दो टूक - अब विभाग काम करें

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह मामला लाखों कर्मचारियों को प्रभावित करता है, इसलिए इसे रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि विभाग सक्रिय होकर काम करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई दस्तावेज छूट गए हैं तो सरकार सिंगल जज के सामने जाकर अपनी बात रख सकती है।

कर्मचारियों के लिए खुला स्थायी दर्जे का रास्ता

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सिंगल बेंच का आदेश प्रभावी बना रहेगा। इसका मतलब है कि संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थायी कर्मी के रूप में वर्गीकृत करने और न्यूनतम वेतनमान देने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। वर्षों से इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह फैसला किसी बड़ी जीत से कम नहीं माना जा रहा है।

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