हाईकोर्ट की पुलिस को चेतावनी: वर्दी पुलिस की, लेकिन दिल अपराधियों के साथ न लगाए
Ratan Kumar Mishra | Jul 07, 2026, 22:46 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने पुलिस को चेतावनी दी है। गिरफ्तारी के लिखित कारण न बताना अब निलंबन का आधार बनेगा। डीजीपी को एक माह में सर्कुलर जारी करने का निर्देश।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने पुलिस अफसरों को सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के लिखित कारण न बताना अपराधियों को फायदा पहुंचाने जैसा माना जाएगा। यह आदेश दतिया जिले के एक एनडीपीएस मामले में सुनवाई के दौरान आया। कोर्ट ने आरोपी की गिरफ्तारी को वैध ठहराया, लेकिन पुलिस की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई। डीजीपी को एक माह में सख्त सर्कुलर जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह पूरा मामला दतिया जिले के बसई थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां एनडीपीएस एक्ट के तहत एक मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 86.850 किलोग्राम गांजा बरामद किया था। आरोपी के भाई धर्मेंद्र लोधी ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की।
याचिका में दावा किया गया कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में नहीं बताए गए। इसी आधार पर गिरफ्तारी को चुनौती दी गई थी। मामला जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ के सामने पहुंचा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच की। कोर्ट ने पाया कि आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के तहत लिखित नोटिस दिया गया था। यह प्रक्रिया कानूनी रूप से सही पाई गई। इसी आधार पर कोर्ट ने गिरफ्तारी को वैध मानते हुए याचिका खारिज कर दी।
हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक बड़ी बात कही। खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में प्रक्रिया सही रही, लेकिन कई अन्य मामलों में ऐसा नहीं होता। कोर्ट ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया।
पुलिस मुख्यालय के सर्कुलर के बावजूद
खंडपीठ ने अपने आदेश में एक अहम तथ्य बताया। पुलिस मुख्यालय ने 13 फरवरी 2026 को एक सर्कुलर जारी किया था। यह सर्कुलर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में जारी हुआ था। इसके बावजूद कई जांच अधिकारी गिरफ्तारी के दौरान तय प्रक्रिया नहीं अपना रहे।
कोर्ट ने साफ कहा कि पुलिस का काम अपराधियों को कानून के दायरे में लाना है। निर्दोष लोगों की रक्षा करना भी पुलिस की जिम्मेदारी है। लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती से अपराधियों को राहत देना स्वीकार नहीं होगा।
कोर्ट ने मध्यप्रदेश के डीजीपी को सीधे निर्देश दिए हैं। भविष्य में अगर किसी मामले में गिरफ्तारी के लिखित कारण नहीं दिए जाते, तो सख्त कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित जांच अधिकारी को तुरंत निलंबित किया जाएगा। साथ ही उसके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू होगी।
कोर्ट ने डीजीपी को एक माह के भीतर सख्त चेतावनी वाला सर्कुलर जारी करने को कहा है। यह सर्कुलर सभी जांच अधिकारियों तक पहुंचना जरूरी होगा। कोर्ट ने इसकी अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है।
हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में एक समयसीमा भी तय की है। पुलिस विभाग को की गई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट 18 अगस्त तक जमा करनी होगी। यह रिपोर्ट हाईकोर्ट के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के समक्ष पेश की जाएगी।
इस आदेश के बाद प्रदेश भर के पुलिस थानों में हलचल तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि यह आदेश गिरफ्तारी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम है। आने वाले दिनों में इसका असर जमीनी स्तर पर दिखने की उम्मीद है।
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दतिया के मामले से शुरू हुई सुनवाई
याचिका में दावा किया गया कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में नहीं बताए गए। इसी आधार पर गिरफ्तारी को चुनौती दी गई थी। मामला जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ के सामने पहुंचा।
कोर्ट ने क्या पाया जांच में
हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक बड़ी बात कही। खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में प्रक्रिया सही रही, लेकिन कई अन्य मामलों में ऐसा नहीं होता। कोर्ट ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया।
पुलिस मुख्यालय के सर्कुलर के बावजूद लापरवाही
कोर्ट ने साफ कहा कि पुलिस का काम अपराधियों को कानून के दायरे में लाना है। निर्दोष लोगों की रक्षा करना भी पुलिस की जिम्मेदारी है। लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती से अपराधियों को राहत देना स्वीकार नहीं होगा।
डीजीपी को मिले सख्त निर्देश
कोर्ट ने डीजीपी को एक माह के भीतर सख्त चेतावनी वाला सर्कुलर जारी करने को कहा है। यह सर्कुलर सभी जांच अधिकारियों तक पहुंचना जरूरी होगा। कोर्ट ने इसकी अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है।
18 अगस्त तक देनी होगी रिपोर्ट
इस आदेश के बाद प्रदेश भर के पुलिस थानों में हलचल तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि यह आदेश गिरफ्तारी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम है। आने वाले दिनों में इसका असर जमीनी स्तर पर दिखने की उम्मीद है।
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