क्या सच में भूत-प्रेतों ने खड़ा किया था एमपी का ये रहस्यमयी मंदिर
Kaushiki | Jul 09, 2026, 16:30 IST
Kakanmath Temple
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित ककनमठ मंदिर अपनी अनोखी बनावट के लिए प्रसिद्ध है। बिना सीमेंट और चूने के पत्थरों को एक के ऊपर एक रखकर बने इस शिव मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसे भूतों ने एक रात में बनाया था।
Kakanmath Temple Mystery: हमारे देश में रहस्यों और चमत्कारों से भरे कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं। ऐसा ही एक अनोखा मंदिर मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित है। मुरैना के सिहोनिया गांव में स्थित इस प्राचीन धरोहर को ककनमठ मंदिर कहते हैं।
जो भी व्यक्ति इस मंदिर को पहली बार देखता है, वह दंग रह जाता है। यह ऐतिहासिक मंदिर बहुत ज्यादा ऊंचा और देखने में बेहद पतला है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है कि यह ढांचा कभी भी गिर जाएगा।
लेकिन यह अद्भुत मंदिर सदियों से इसी तरह मजबूती से खड़ा हुआ है। मंदिर के पत्थर ऐसे दिखते हैं मानो वे बस एक-दूसरे पर रख दिए गए हों। इन पत्थरों को जोड़ने के लिए किसी मजबूत जोड़ का इस्तेमाल नहीं दिखता।
![Kakanmath Mandir mystery: काकनमठ मंदिर मुरैना का रहस्य, इतिहास और अद्भुत स्थापत्य कला. - News18 हिंदी]()
इतिहास के पन्नों को पलटें तो इस मंदिर का निर्माण बहुत पुराना है। ये पावन मंदिर 11वीं शताब्दी के आस-पास बनकर तैयार हुआ था। इसे कच्छपघात वंश के प्रतापी राजा कीर्तिराज ने विशेष रूप से बनवाया था।
यह पूरा भव्य मंदिर देवों के देव भगवान शिव को समर्पित है। पुराने समय में यहां एक बहुत बड़ा और सुंदर मंदिर परिसर होता था। उस बड़े परिसर के अंदर कई छोटे-छोटे सुंदर मंदिर भी बने हुए थे।
समय की मार के कारण अब वहां केवल मुख्य मंदिर ही बचा है। आज यह मुख्य मंदिर चारों तरफ फैले खंडहरों के बीच अकेला खड़ा है। फिर भी इसकी भव्यता देखने लायक है और पर्यटकों को आकर्षित करती है।
![Kakanmath Temple]()
इस मंदिर की सबसे बड़ी और खास बात इसकी अनोखी बनावट है। ककनमठ मंदिर को बनाने में सीमेंट का उपयोग बिल्कुल नहीं किया गया। इसके निर्माण में किसी प्रकार के चूने या मसाले का जोड़ नहीं है।
कारीगरों ने बड़े-बड़े पत्थरों को केवल एक के ऊपर एक सजाकर रखा है। प्राचीन काल की इस कला को ड्राई स्टोन तकनीक कहा जाता है। यही वजह है कि इसके पत्थर आज भी हिलते हुए दिखाई देते हैं।
यह देखने में भले ही बहुत ढीला-ढाला और असुरक्षित ढांचा लगता है। लेकिन हजारों साल बीत जाने के बाद भी यह आंधी-तूफान में अडिग है। इस अनोखी बनावट की वजह से कई लोक कथाएं भी बहुत प्रसिद्ध हैं।
![Kakanmath Temple: क्या भूतों ने बनवाया था मध्य प्रदेश का यह मंदिर? जानें ककनमठ का अद्भुत रहस्य - kakanmath temple morena madhya pradesh history stories facts tvisg - AajTak]()
इस गांव के स्थानीय लोगों के बीच एक डरावनी कहानी प्रसिद्ध है। गांव वालों का मानना है कि इस मंदिर को इंसानों ने नहीं बनाया। इसे अदृश्य भूत-प्रेतों या कुछ अलौकिक शक्तियों ने मिलकर तैयार किया था।
कहा जाता है कि इन शक्तियों ने सिर्फ एक ही रात में इसे बनाया। रातभर ये रहस्यमयी ताकतें पत्थर से पत्थर जोड़कर ढांचा खड़ा कर रही थीं। लेकिन काम पूरा होने से पहले ही सुबह की पहली किरण आ गई।
सुबह होते ही वे सभी शक्तियां अचानक वहां से गायब हो गईं। इस वजह से यह मंदिर ऊपर से थोड़ा अधूरा ही रह गया। लोग मानते हैं कि इसकी अजीब बनावट इसी अलौकिक घटना का सबूत है।
![morena kakanmath mandir ghosts built this unique temple in one night know full story | एक रात में भूतों ने बनाया था ये मंदिर, चंबल के बीहड़ में बसा है अनोखा शिवधाम]()
मुरैना के आसपास इस मंदिर को लेकर एक दूसरी कहानी भी प्रचलित है। इसके अनुसार राजा कीर्तिराज भगवान शिव के बहुत बड़े अनन्य भक्त थे। वह शिव जी के लिए एक बेहद भव्य मंदिर बनाना चाहते थे।
लेकिन मंदिर के निर्माण कार्य में बार-बार कई भयंकर अड़चनें आ रही थीं। तब स्वयं भगवान शिव ने राजा के सपने में आकर एक उपाय बताया। शिव जी ने कहा कि मंदिर केवल एक रात में बन सकता है।
लेकिन इसके लिए शर्त यह थी कि कोई इंसान इसे बनते न देखे। राजा ने तुरंत आदेश दिया कि उस रात कोई घर से बाहर न निकले। मगर एक उत्सुक छोटे लड़के ने चुपके से खिड़की से बाहर झांक लिया।
![f7386acc-d47]()
जैसे ही उन रहस्यमयी कारीगरों को पता चला कि कोई उन्हें देख रहा है। उन्होंने गुस्से में आकर तुरंत मंदिर का निर्माण कार्य वहीं रोक दिया। इस वजह से ककनमठ का यह मंदिर हमेशा के लिए अधूरा रह गया।
तभी से इसके पत्थर ऐसे बिखरे और हवा में लटके दिखाई देते हैं। यह कहानी आज भी बुजुर्ग लोग चाव से बच्चों को सुनाते हैं। हालांकि, इतिहासकार और पुरातत्व विशेषज्ञ इन बातों को पूरी तरह काल्पनिक मानते हैं।
इतिहासकारों के मुताबिक, इस मंदिर की असली कहानी कोई अलौकिक नहीं है। ककनमठ मंदिर का निर्माण कच्छपघात वंश के बेहतरीन वास्तुकला का हिस्सा था। यह वंश उस दौर में मध्य भारत के बहुत बड़े हिस्से पर राज करता था।
इसके अलग दिखने की वजह इसके आसपास की इमारतों का नष्ट होना है। आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के अध्ययन बताते हैं कि ये मूल रूप से पंचायतन शैली में था। मुख्य मंदिर के चारों ओर कई छोटे-छोटे मंदिर बने हुए थे।
समय के साथ आए भीषण भूकंपों और नेचुरल डिसास्टर्स ने उन्हें तोड़ दिया। उन झटकों के कारण सिर्फ यह मुख्य और मजबूत ढांचा ही बच सका। बाकी सभी बाहरी दीवारें और छोटे मंदिर पूरी तरह से ध्वस्त हो गए।
चाहे आप वैज्ञानिकों की बात मानें या भूतों वाली डरावनी कहानियों पर विश्वास करें। एक बात पूरी तरह से तय है कि ककनमठ मंदिर बेहद खास है। इसकी गगनचुंबी ऊंचाई और पत्थरों का संतुलन दुनिया भर के लोगों को चौंका देता है।
मुरैना के बीहड़ों और जंगलों के बीच इसकी लोकेशन इसे और आकर्षक बनाती है। मध्य भारत के सबसे अनोखे और रहस्यमयी खंडहरों में इसकी गिनती हमेशा होती है। शायद यही इस मंदिर की कहानी का सबसे बड़ा और असली रहस्य माना जाएगा।
हजार साल (मंदिरों का रहस्य)पुराना यह रहस्यमयी मंदिर आज भी सीना ताने खड़ा हुआ है। इसे देखकर लगता है कि यह पल भर में अभी नीचे गिर जाएगा। मगर तमाम प्राकृतिक आपदाओं को झेलकर भी यह मंदिर कभी नहीं गिरता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर से सुनाई देती रहस्यमयी आवाजें, क्या छिपा है खजाने में?
शायद ही जानते होंगे जगन्नाथ पुरी के चमत्कारी रहस्य, जानें क्या है सबसे बड़ा राज
देवों के देव महादेव को भी मिले थे भयंकर श्राप, जानें इनसे जुड़ी पौराणिक रहस्य
शुरू हुआ आषाढ़ का महीना, सूर्य और भगवान वामन की पूजा का है खास महत्व
जो भी व्यक्ति इस मंदिर को पहली बार देखता है, वह दंग रह जाता है। यह ऐतिहासिक मंदिर बहुत ज्यादा ऊंचा और देखने में बेहद पतला है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है कि यह ढांचा कभी भी गिर जाएगा।
लेकिन यह अद्भुत मंदिर सदियों से इसी तरह मजबूती से खड़ा हुआ है। मंदिर के पत्थर ऐसे दिखते हैं मानो वे बस एक-दूसरे पर रख दिए गए हों। इन पत्थरों को जोड़ने के लिए किसी मजबूत जोड़ का इस्तेमाल नहीं दिखता।
Kakanmath Mandir mystery: काकनमठ मंदिर मुरैना का रहस्य, इतिहास और अद्भुत स्थापत्य कला. - News18 हिंदी
राजा कीर्तिराज ने कराया था निर्माण
यह पूरा भव्य मंदिर देवों के देव भगवान शिव को समर्पित है। पुराने समय में यहां एक बहुत बड़ा और सुंदर मंदिर परिसर होता था। उस बड़े परिसर के अंदर कई छोटे-छोटे सुंदर मंदिर भी बने हुए थे।
समय की मार के कारण अब वहां केवल मुख्य मंदिर ही बचा है। आज यह मुख्य मंदिर चारों तरफ फैले खंडहरों के बीच अकेला खड़ा है। फिर भी इसकी भव्यता देखने लायक है और पर्यटकों को आकर्षित करती है।
Kakanmath Temple
बिना सीमेंट और चूने का अनोखा चमत्कार
कारीगरों ने बड़े-बड़े पत्थरों को केवल एक के ऊपर एक सजाकर रखा है। प्राचीन काल की इस कला को ड्राई स्टोन तकनीक कहा जाता है। यही वजह है कि इसके पत्थर आज भी हिलते हुए दिखाई देते हैं।
यह देखने में भले ही बहुत ढीला-ढाला और असुरक्षित ढांचा लगता है। लेकिन हजारों साल बीत जाने के बाद भी यह आंधी-तूफान में अडिग है। इस अनोखी बनावट की वजह से कई लोक कथाएं भी बहुत प्रसिद्ध हैं।
Kakanmath Temple: क्या भूतों ने बनवाया था मध्य प्रदेश का यह मंदिर? जानें ककनमठ का अद्भुत रहस्य - kakanmath temple morena madhya pradesh history stories facts tvisg - AajTak
क्या वाकई इसे भूतों ने बनाया था
कहा जाता है कि इन शक्तियों ने सिर्फ एक ही रात में इसे बनाया। रातभर ये रहस्यमयी ताकतें पत्थर से पत्थर जोड़कर ढांचा खड़ा कर रही थीं। लेकिन काम पूरा होने से पहले ही सुबह की पहली किरण आ गई।
सुबह होते ही वे सभी शक्तियां अचानक वहां से गायब हो गईं। इस वजह से यह मंदिर ऊपर से थोड़ा अधूरा ही रह गया। लोग मानते हैं कि इसकी अजीब बनावट इसी अलौकिक घटना का सबूत है।
morena kakanmath mandir ghosts built this unique temple in one night know full story | एक रात में भूतों ने बनाया था ये मंदिर, चंबल के बीहड़ में बसा है अनोखा शिवधाम
राजा के सपने की कहानी
लेकिन मंदिर के निर्माण कार्य में बार-बार कई भयंकर अड़चनें आ रही थीं। तब स्वयं भगवान शिव ने राजा के सपने में आकर एक उपाय बताया। शिव जी ने कहा कि मंदिर केवल एक रात में बन सकता है।
लेकिन इसके लिए शर्त यह थी कि कोई इंसान इसे बनते न देखे। राजा ने तुरंत आदेश दिया कि उस रात कोई घर से बाहर न निकले। मगर एक उत्सुक छोटे लड़के ने चुपके से खिड़की से बाहर झांक लिया।
f7386acc-d47
कारीगरों के काम रोकने का रहस्य
तभी से इसके पत्थर ऐसे बिखरे और हवा में लटके दिखाई देते हैं। यह कहानी आज भी बुजुर्ग लोग चाव से बच्चों को सुनाते हैं। हालांकि, इतिहासकार और पुरातत्व विशेषज्ञ इन बातों को पूरी तरह काल्पनिक मानते हैं।
क्या कहते हैं पुरातत्व और इतिहासकार
इसके अलग दिखने की वजह इसके आसपास की इमारतों का नष्ट होना है। आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के अध्ययन बताते हैं कि ये मूल रूप से पंचायतन शैली में था। मुख्य मंदिर के चारों ओर कई छोटे-छोटे मंदिर बने हुए थे।
समय के साथ आए भीषण भूकंपों और नेचुरल डिसास्टर्स ने उन्हें तोड़ दिया। उन झटकों के कारण सिर्फ यह मुख्य और मजबूत ढांचा ही बच सका। बाकी सभी बाहरी दीवारें और छोटे मंदिर पूरी तरह से ध्वस्त हो गए।
सदियों पुराना यह अद्भुत शिव धाम
मुरैना के बीहड़ों और जंगलों के बीच इसकी लोकेशन इसे और आकर्षक बनाती है। मध्य भारत के सबसे अनोखे और रहस्यमयी खंडहरों में इसकी गिनती हमेशा होती है। शायद यही इस मंदिर की कहानी का सबसे बड़ा और असली रहस्य माना जाएगा।
हजार साल (मंदिरों का रहस्य)पुराना यह रहस्यमयी मंदिर आज भी सीना ताने खड़ा हुआ है। इसे देखकर लगता है कि यह पल भर में अभी नीचे गिर जाएगा। मगर तमाम प्राकृतिक आपदाओं को झेलकर भी यह मंदिर कभी नहीं गिरता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- ककनमठ मंदिर कहां स्थित है और इसका निर्माण किसने करवाया था?
ककनमठ मंदिर मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सिहोनिया गांव में स्थित है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में कच्छपघात वंश के राजा कीर्तिराज ने भगवान शिव के सम्मान में करवाया था। - ककनमठ मंदिर बिना सीमेंट और चूने के कैसे टिका हुआ है?
इस मंदिर का निर्माण प्राचीन 'ड्राई स्टोन तकनीक' से किया गया है, जिसमें बड़े-बड़े पत्थरों को बिना किसी सीमेंट, चूने या मसाले के सिर्फ एक के ऊपर एक संतुलन बनाकर रखा गया है। - ककनमठ मंदिर को लेकर भूतों वाली लोक कथा क्या है?
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर को अदृश्य भूत-प्रेतों ने केवल एक रात में बनाया था। सुबह होने और एक बच्चे द्वारा काम देखते ही कारीगरों ने काम रोक दिया, जिससे यह अधूरा रह गया।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर से सुनाई देती रहस्यमयी आवाजें, क्या छिपा है खजाने में?
शायद ही जानते होंगे जगन्नाथ पुरी के चमत्कारी रहस्य, जानें क्या है सबसे बड़ा राज
देवों के देव महादेव को भी मिले थे भयंकर श्राप, जानें इनसे जुड़ी पौराणिक रहस्य
शुरू हुआ आषाढ़ का महीना, सूर्य और भगवान वामन की पूजा का है खास महत्व
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari