बैकफुट पर IAS एसोसिएशन; जबलपुर स्मार्ट सिटी के CEO अरविंद शाह अकेले पड़े, अब क्या होगी एफआईआर?
Ravi Kant Dixit | Apr 28, 2026, 16:07 IST
minister rakesh singh ias arvind shah case
मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक प्रशासनिक विवाद सत्ता, सिस्टम और साख की लड़ाई में बदल गया है। महिला कर्मचारी को फटकार से शुरू हुआ यह मामला अब पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह और जबलपुर स्मार्ट सिटी के सीईओ, आईएएस अरविंद शाह के बीच टकराव की शक्ल ले चुका है।
बैकफुट पर आया आईएएस एसोसिएशन
इस मामले को सबसे पहले द सूत्र ने ही उजागर किया था। खबर सामने आते ही प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। अब पर्दे के पीछे डैमेज कंट्रोल जारी है, लेकिन इस कोशिश में किसे बचाया जा रहा है और किसे बलि का बकरा बनाया जा रहा है, यही इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल है।
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पढ़िए 'द सूत्र' की इनसाइड स्टोरी...
सूत्र बताते हैं कि कुछ ही घंटों बाद रात करीब 8 बजे आईएएस एसोसिएशन के सदस्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने पहुंचे। दिलचस्प बात यह रही कि मुख्यमंत्री अपने साथ मंत्री राकेश सिंह को भी लेकर पहुंच गए। इस बैठक में जो चर्चा हुई, उसने पूरे मामले की दिशा बदल दी।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में आईएएस अरविंद शाह के व्यवहार पर सवाल उठाए गए। उन्हें मूडी अफसर बताया गया। उनके कामकाज की जांच की बात कही गई। वहीं, महिला कर्मचारी की उपस्थिति को लेकर भी अलग-अलग तर्क दिए गए। एक तरफ कहा गया कि वह नियमित ऑफिस आती थीं और ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज है। वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा गया कि वह सिर्फ थंब लगाकर चली जाती थीं। कुल मिलाकर, बैठक का नतीजा यह निकला कि किसी तरह इस मामले को शांत किया जाए। यह काम आईएएस एसोसिएशन को सौंपा गया।
पर्दे के पीछे का दबाव
इसके बाद दबाव बढ़ाया गया। उनसे कहा गया कि वे मंत्री के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करें और मीडिया में चल रही खबरों को भ्रामक बताएं। शाह ने ऐसा करने से भी मना कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद उनसे कहा गया कि महिला कर्मचारी ने शपथ पत्र दिया है और उनके खिलाफ एफआईआर हो सकती है। इस पर शाह का जवाब भी उतना ही सख्त था। बोले, यदि उनके खिलाफ एफआईआर होती है तो वे भी रिपोर्ट दर्ज कराएंगे।
क्या आईएएस एसोसिएशन कमजोर पड़ गया?
यहां तक कहा जा रहा है कि इस मामले में आईएएस लॉबी कमजोर साबित हुई है। तुलना आईपीएस एसोसिएशन से की जा रही है, जहां दूसरे मामले में आईपीएस आयुष जाखड़ के समर्थन में आईपीएस एसोसिएशन ने खुलकर मोर्चा संभाला था। इसके बाद विधायक प्रीतम लोधी को माफी मांगनी पड़ी थी।
अरविंद शाह अब सिस्टम में अकेले?
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हालांकि, कई युवा आईएएस और मैदानी कलेक्टर अरविंद शाह के समर्थन में हैं। वे खुलकर सामने तो नहीं आ रहे, लेकिन आपस में चर्चा कर रहे हैं और अपना समर्थन जता रहे हैं। दिल्ली स्तर पर भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है, लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई सामने आने को तैयार नहीं है।
द सूत्र ने कई अफसरों से बात की, पर किसी ने ऑन रिकॉर्ड कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।
फ्लैश बैक: तीन किरदार...तीन तर्क...
1. महिला कर्मचारी दिलप्रीत कौर भल्ला
दिलप्रीत के मुताबिक, 22 अप्रैल को उन्हें सीईओ के चैंबर में बुलाया गया, जहां उनके साथ अपमानजनक और चारित्रिक टिप्पणी की गई। आरोप है कि बातचीत के दौरान बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। यहां तक कि मंत्री राकेश सिंह को लेकर भी अनुचित टिप्पणी की गई।
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2. स्मार्ट सिटी सीईओ अरविंद शाह
मामला (mp ias news) यहीं खत्म नहीं होता। अरविंद शाह का आरोप है कि 22 अप्रैल 2026 को मंत्री राकेश सिंह ने उन्हें अपने बंगले पर बुलाकर आधे घंटे तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्होंने दावा किया कि मंत्री ने व्यक्तिगत स्तर पर अपशब्द कहे, यहां तक कि उनकी मां के लिए भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। शाह का यह भी कहना है कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और कहा गया कि एक इशारे पर पूरी सिख कौम उनके खिलाफ खड़ी हो जाएगी।
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3. पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह
मंत्री का कहना है कि उन्होंने केवल यह कहा कि खासकर महिला कर्मचारियों के प्रति इस तरह की भाषा का इस्तेमाल गलत है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने कोई गाली-गलौज नहीं की।
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अब सबसे बड़ा सवाल…
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