मध्यप्रदेश में नए जिले बनने का इंतजार बढ़ा! 51 जिलों में सुनवाई पूरी, लेकिन मार्च 2027 तक नहीं बदलेंगी सीमाएं
Ramanand Tiwari | Oct 30, 2026, 22:00 IST
आयोग की सुनवाई पूरी होने के बाद भी नहीं बदलेगी तस्वीर।
मध्यप्रदेश में नए जिले बनाने और मौजूदा जिलों की सीमाएं बदलने की प्रक्रिया अभी आगे नहीं बढ़ पाएगी। प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग ने प्रदेश के 51 जिलों में लोगों की सुनवाई पूरी कर ली है। लेकिन जनगणना की वजह से मार्च 2027 तक जिलों की सीमाओं में बदलाव नहीं हो सकेगा।
सरकार ने विधानसभा में भी इसकी जानकारी दी थी। ऐसे में नए जिले बनने और प्रशासनिक सुविधाएं बेहतर होने का इंतजार कर रहे लोगों को फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद कम है।
प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग अब तक मध्यप्रदेश के 51 जिलों में जाकर लोगों की राय और सुझाव ले चुका है। भोपाल, इंदौर और जबलपुर समेत बाकी जिलों में भी सुनवाई पूरी करने की तैयारी है।
इसके बाद आयोग संभागीय मुख्यालयों पर जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगा। इन बैठकों में मिले सुझावों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
मध्यप्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने जुलाई 2026 में विधानसभा में बताया था कि जनगणना के कारण मार्च 2027 तक प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव करना संभव नहीं है। यानी आयोग अपनी Report तैयार कर ले, तब भी जिलों की सीमाएं तुरंत नहीं बदली जा सकेंगी। इसके लिए जनगणना से जुड़ी रोक खत्म होने का इंतजार करना होगा। सरकार ने आयोग का कार्यकाल भी मार्च 2027 तक बढ़ा दिया था।
प्रदेश में कई ऐसे इलाके हैं, जहां लोगों को सरकारी काम कराने के लिए 100 से 150 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, बुधनी के पास नर्मदापुरम है, जबकि सांची के नजदीक विदिशा जिला मुख्यालय है। लेकिन मौजूदा प्रशासनिक सीमाओं की वजह से कुछ लोगों को अपने काम के लिए दूर स्थित सरकारी दफ्तरों में जाना पड़ सकता है।
लोगों को उम्मीद है कि जिलों और तहसीलों की सीमाओं में बदलाव होने से सरकारी कार्यालयों तक पहुंचना आसान होगा और समय की भी बचत होगी।
उज्जैन के नागदा और जबलपुर के सिहोरा को नया जिला बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। हालांकि, इन जगहों को जिला बनाया जाएगा या नहीं, इसका फैसला अभी नहीं हुआ है। पहले आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को देगा। इसके बाद सरकार तय करेगी कि कहां नया जिला बनाना है और किन क्षेत्रों की सीमाएं बदलनी हैं।
सिर्फ सुनवाई पूरी होने का मतलब यह नहीं है कि किसी नए जिले को मंजूरी मिल गई है।
प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग के प्रभारी अध्यक्ष एसएन मिश्रा के मुताबिक, जिलों में सुनवाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। आयोग नवंबर तक संभागीय स्तर पर बैठकें करने की तैयारी में है। इसके बाद मार्च में सरकार को Final Report सौंपी जा सकती है। रिपोर्ट में लोगों से मिले सुझावों और प्रशासनिक जरूरतों को शामिल किया जाएगा।
आयोग सिर्फ नए जिले बनाने पर ही विचार नहीं कर रहा है, बल्कि मौजूदा जिलों, तहसीलों और विकासखंडों की सीमाओं की भी समीक्षा कर रहा है।
इसके लिए कई बातों को ध्यान में रखा जा रहा है।
फिलहाल मध्यप्रदेश में प्रशासनिक पुनर्गठन की प्रक्रिया जारी है। आयोग लोगों की राय ले रहा है और रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।
हालांकि, किसी नए जिले के गठन या मौजूदा सीमाओं में बदलाव का अंतिम फैसला राज्य सरकार को लेना है। जनगणना से जुड़ी रोक के कारण मार्च 2027 तक सीमाओं में बदलाव संभव नहीं बताया गया है।
ऐसे में नागदा, सिहोरा सहित अन्य क्षेत्रों में नए जिले बनने की उम्मीद लगाए लोगों को अभी इंतजार करना होगा।
51 जिलों में सुनवाई पूरी, बाकी जिलों की तैयारी
इसके बाद आयोग संभागीय मुख्यालयों पर जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगा। इन बैठकों में मिले सुझावों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
मार्च 2027 तक क्यों नहीं बदल सकेंगी जिलों की सीमाएं?
सरकारी काम के लिए 100 से 150 किलोमीटर तक जाना पड़ता है
लोगों को उम्मीद है कि जिलों और तहसीलों की सीमाओं में बदलाव होने से सरकारी कार्यालयों तक पहुंचना आसान होगा और समय की भी बचत होगी।
नागदा और सिहोरा के जिला बनने का फैसला भी बाकी
सिर्फ सुनवाई पूरी होने का मतलब यह नहीं है कि किसी नए जिले को मंजूरी मिल गई है।
नवंबर में बैठकों के बाद मार्च तक रिपोर्ट देने की तैयारी
सीमाएं बदलने से पहले किन बातों का ध्यान रखा जाएगा?
इसके लिए कई बातों को ध्यान में रखा जा रहा है।
- किसी क्षेत्र से जिला मुख्यालय की दूरी कितनी है।
- इलाके की आबादी कितनी है।
- सड़क और आने-जाने की सुविधाएं कैसी हैं।
- सरकारी कार्यालयों तक पहुंचना कितना आसान है।
नए जिलों के लिए अभी करना होगा इंतजार
हालांकि, किसी नए जिले के गठन या मौजूदा सीमाओं में बदलाव का अंतिम फैसला राज्य सरकार को लेना है। जनगणना से जुड़ी रोक के कारण मार्च 2027 तक सीमाओं में बदलाव संभव नहीं बताया गया है।
ऐसे में नागदा, सिहोरा सहित अन्य क्षेत्रों में नए जिले बनने की उम्मीद लगाए लोगों को अभी इंतजार करना होगा।
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