कागजों पर नहीं चलेंगे फर्जी खेल: अब डिजिटल देना होगा पाई-पाई का हिसाब

Amresh Kushwaha | Aug 25, 2026, 11:35 IST
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मध्य प्रदेश एनजीओ ऑनलाइन नियम
मध्य प्रदेश एनजीओ ऑनलाइन नियम

मध्य प्रदेश में करीब 3.5 लाख एनजीओ, सामाजिक संगठन और ट्रस्टों की निगरानी अब पूरी तरह ऑनलाइन होगी। रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटीज ने आधार आधारित ई-साइन अनिवार्य किया है। जानें वजह...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में करीब 3.5 लाख एनजीओ और संस्थाएं हैं।
  • इनकी निगरानी अब पूरी तरह ऑनलाइन होगी।
  • आधार आधारित ई-साइन सबसे बड़ा बदलाव है।
  • बिना ऑडिट-चुनाव चल रही संस्थाओं की पहचान आसान होगी।
  • वार्षिक हिसाब और ऑडिट रिपोर्ट भी ऑनलाइन जमा होगी।

क्या है नया नियम

मध्य प्रदेश में करीब 3.5 लाख गैर-सरकारी संस्थाएं काम कर रही हैं। इनमें एनजीओ (Non-Governmental Organisation), सामाजिक संगठन, शिक्षण समितियां और ट्रस्ट शामिल हैं। इन सभी की निगरानी अब ऑनलाइन होगी। रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटीज ने वार्षिक जानकारी जमा करने की व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल कर दी है।

अब तक ज्यादातर काम कागजों पर होता था। इससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश काफी ज्यादा रहती थी। नए नियम से यह प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी। सबसे बड़ा बदलाव आधार आधारित ई-साइन का है। अब किसी व्यक्ति को उसकी जानकारी के बिना सदस्य या पदाधिकारी बनाना मुश्किल होगा। साथ ही जो संस्थाएं सालों से बिना ऑडिट और चुनाव के सिर्फ कागजों पर चल रही थीं, उनकी पहचान भी आसान हो जाएगी।

धारा-27 में क्या बदलाव

नए नियम के तहत साधारण सभा की बैठक के 45 दिन के भीतर नई कार्यकारिणी की सूची जमा करनी होगी। संस्था के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों का आधार आधारित ई-साइन जरूरी होगा। सभी सदस्यों का सत्यापन होने के बाद ही आवेदन आगे बढ़ेगा। बिना सत्यापन के कार्यकारिणी को मान्यता नहीं मिलेगी।

इससे फर्जी नाम जोड़ने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। तय समय में आवेदन करने पर एक हजार रुपए शुल्क लगेगा। देरी होने पर यह शुल्क बढ़कर दो हजार रुपए हो जाएगा। इस नियम से संस्थाएं समय पर कागजी काम पूरा करने के लिए प्रेरित होंगी। जो संस्थाएं लापरवाही बरतेंगी, उन्हें ज्यादा शुल्क चुकाना होगा।

धारा-28 का नया प्रावधान

हर साल 30 अप्रैल के बाद 90 दिनों के भीतर संस्था को वार्षिक आय-व्यय और बैलेंस शीट जमा करनी होगी। यह प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन रहेगी। अगर संस्था का वार्षिक लेन-देन एक लाख रुपए से ज्यादा है तो नया नियम और सख्त हो जाता है। ऐसी संस्थाओं को चार्टर्ड अकाउंटेंट का यूडीआईएन (Unique Document Identification Number) देना अनिवार्य होगा।

साथ ही सीए (Chartered Accountant) की ऑडिट रिपोर्ट भी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इसके अलावा कोषाध्यक्ष का ई-साइन जरूरी होगा। अध्यक्ष या सचिव में से किसी एक का सत्यापन भी अनिवार्य किया गया है। इस प्रावधान से बड़ी रकम संभालने वाली संस्थाओं पर खास निगरानी रहेगी। इससे फंड के गलत इस्तेमाल पर लगाम लगने की उम्मीद है।

क्यों जरूरी था यह बदलाव

लंबे समय से शिकायतें आ रही थीं कि कई संस्थाएं सिर्फ कागजों पर चल रही हैं। कुछ संस्थाओं में सालों से न चुनाव हुए और न ऑडिट। कुछ मामलों में लोगों के नाम बिना बताए सदस्य सूची में जोड़ दिए जाते थे। इससे बाद में विवाद खड़े होते थे। कई बार लोगों को पता ही नहीं होता था कि वे किसी संस्था के पदाधिकारी बन चुके हैं।

नए नियम इन्हीं समस्याओं को खत्म करने के लिए लाए गए हैं। आधार आधारित सत्यापन से हर सदस्य की सहमति सुनिश्चित होगी। इससे संस्थाओं के कामकाज में जवाबदेही बढ़ेगी।

आपत्ति भी अब ऑनलाइन सुधरेगी

यदि विभाग किसी दस्तावेज पर आपत्ति लगाता है तो पहले यह प्रक्रिया लंबी और उलझी हुई होती थी। अब संस्था यह आपत्ति सीधे पोर्टल पर देख सकेगी। फॉर्म में सुधार कर उसे दोबारा जमा भी किया जा सकेगा। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ही पूरी होगी। इससे बार-बार दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं रहेगी।

आवेदन जमा करते ही कंप्यूटर जनरेटेड वैध पावती भी तुरंत मिल जाएगी। इससे फाइल और पावती के लिए बाबुओं या एजेंटों पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। संस्थाओं का काम पहले से तेज और आसान हो जाएगा।

किसे होगा फायदा

इस बदलाव से सबसे ज्यादा फायदा उन संस्थाओं को होगा जो पारदर्शी तरीके से काम करती हैं। उनका सत्यापन तेजी से पूरा हो सकेगा। वहीं जो संस्थाएं सिर्फ कागजों पर चल रही थीं, उन पर सीधा असर पड़ेगा। ऐसी संस्थाओं की पहचान अब आसानी से हो सकेगी।

आम सदस्यों को भी फायदा होगा क्योंकि अब उनकी सहमति के बिना नाम नहीं जोड़ा जा सकेगा। सरकार को भी हर संस्था का सही डेटा मिल सकेगा। इससे फंड के हिसाब-किताब में पारदर्शिता आएगी। कुल मिलाकर यह कदम पूरे सिस्टम को साफ-सुथरा बनाने की कोशिश है।

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