सीएम मोहन यादव का बड़ा एक्शन, सीआईडी की विजिलेंस विंग लेगी भ्रष्ट पुलिस वालों पर एक्शन
Amresh Kushwaha | Mar 31, 2026, 16:03 IST
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मध्य प्रदेश में CID की इंटरनल विजिलेंस विंग फिर से एक्टिव होगी। सिवनी और गुना के हवाला कांड में पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आने के बाद CM मोहन यादव ने DGP कैलाश मकवाना को निर्देश दिए हैं। बता दें कि यह विंग 1973 में बनी थी।
News In Short
- मध्यप्रदेश में पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।
- सिवनी और गुना में हवाला पैसे दबाकर मामला रफा-दफा करने की बात सामने आई।
- CM मोहन यादव ने DGP कैलाश मकवाना को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
- CID के तहत इंटरनल विजिलेंस विंग को दोबारा पूरी तरह एक्टिव किया जाएगा।
- यह विंग भ्रष्ट पुलिसकर्मियों पर नजर रखेगी और छापेमारी भी करेगी।
News In Detail
हवाला कांड से हिली MP पुलिस
इन घटनाओं की खबर जब सीएम मोहन यादव तक पहुंची तो उन्होंने तुरंत कदम उठाया। उन्होंने DGP (Director General of Police) कैलाश मकवाना को बुलाकर साफ निर्देश दिए। निर्देश था कि CID (Central Investigation Department) के तहत काम करने वाली इंटरनल विजिलेंस विंग को फिर से पूरी ताकत के साथ चालू किया जाए।
54 साल बाद जागी विंग
वहीं, धीरे-धीरे इसके अधिकार कम होते गए। कभी बजट की कमी, कभी राजनीतिक उदासीनता। नतीजा यह हुआ कि यह विंग कागजों तक सिमट गई और इसकी उपयोगिता खत्म हो गई। अब पांच दशक से ज्यादा समय बाद इसे दोबारा खड़ा करने की तैयारी हो रही है।
क्या करेगी विजिलेंस विंग?
इसके अलावा यह विंग इंटरनल सर्विलेंस भी करेगी। यानी बिना किसी शिकायत के भी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। टीम सीधे उन इलाकों में जाएगी जहां भ्रष्टाचार की आशंका हो।
DGP को मिले साफ निर्देश
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिसकर्मियों के बीच एक कड़ा संदेश जाएगा। अब कोई भी अधिकारी या कर्मचारी यह नहीं मान सकेगा कि भ्रष्टाचार करके बच जाएगा।
पारदर्शिता की नई उम्मीद
भ्रष्टाचार से लड़ाई सिर्फ कागज पर नहीं, जमीन पर भी दिखनी चाहिए। यह विंग उसी दिशा में उठाया गया एक जरूरी कदम है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
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FAQ
- CID विजिलेंस विंग क्या है और यह कैसे काम करती है?
CID विजिलेंस विंग मध्य प्रदेश पुलिस के भीतर एक आंतरिक निगरानी इकाई है। इसे पहली बार 1973 में बनाया गया था। इसका काम पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर नजर रखना है। यह विंग रिश्वतखोरी, अवैध वसूली और आय से अधिक संपत्ति जैसे मामलों में जांच करती है। यह शिकायत मिलने पर छापेमारी भी कर सकती है। धीरे-धीरे यह विंग निष्क्रिय हो गई थी, अब इसे फिर से पूरी तरह सक्रिय किया जा रहा है। - विजिलेंस विंग के एक्टिव होने से आम नागरिक को क्या फायदा होगा?
विजिलेंस विंग के सक्रिय होने से पुलिसकर्मियों पर एक मजबूत आंतरिक नियंत्रण स्थापित होगा। इससे रिश्वत और अवैध वसूली के मामलों पर लगाम लगेगी। आम नागरिक थाने में जाने पर ज्यादा सुरक्षित महसूस करेगा। भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सीधी छापेमारी होगी। कुल मिलाकर पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी और जनता का भरोसा फिर से कायम होने की उम्मीद है।
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