5 साल संभाला अफसर का काम, अब प्रमोशन पर संकट! पुलिसकर्मियों के साथ ऐसा क्यों?

Neel Tiwari | Jul 10, 2026, 11:18 IST
Share
एमपी में हजारों पुलिसकर्मियों पर मंडरा रहा खतरा
एमपी में हजारों पुलिसकर्मियों पर मंडरा रहा खतरा

मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में कार्यवाहक प्रभार के कारण 5 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों के प्रमोशन पर संकट मंडरा रहा है। जीओपी नियमों और विभागीय जांच के चलते सीनियर पुलिसकर्मी अब अपने ही जूनियर के अधीन काम करने को मजबूर हो सकते हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • कार्यवाहक प्रभार के दौरान हुई जांच और कार्रवाई प्रमोशन के आड़े आ रही है।
  • दूसरे विभागों में कार्यवाहक अधिकारियों को नियमित पदोन्नति मिल गई।
  • जांच और लंबित कार्रवाइयों के चलते, प्रमोशन के लिए अनफिट होंगे पुलिसकर्मी।
  • पुलिस विभाग में GOP के नियमों के कारण 5 हजार कर्मियों के अनफिट होने की आशंका।
  • सीनियर पुलिसकर्मी अपने ही जूनियर के अधीन काम करने की स्थिति में आ सकते हैं।

कार्यवाहक प्रभार ही बना प्रमोशन में अड़ंगा

मध्य प्रदेश में वर्ष 2016 से नियमित पदोन्नतियां कोर्ट में लंबित मामलों के कारण लगभग रुक गई थीं। इसका असर पूरे सरकारी तंत्र पर पड़ा। हजारों अधिकारी और कर्मचारी बिना प्रमोशन पाए ही सेवानिवृत्त हो गए।

विभागों में वरिष्ठ पद खाली होने लगे तो शासन ने 2021 से एक वैकल्पिक व्यवस्था लागू की। इसके तहत वरिष्ठता और विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की अनुशंसा के आधार पर पात्र कर्मचारियों को नियमित प्रमोशन की जगह उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार दिया जाने लगा।

वहीं अब यही कार्यवाहक प्रभार पुलिस कर्मियों पर भारी पड़ रहा है।

पुलिस विभाग में बढ़ी मुश्किल

अब जुलाई 2026 में जब नियमित पदोन्नतियों का रास्ता साफ हुआ तो अधिकांश सरकारी विभागों ने कार्यवाहक प्रभार पर काम कर रहे अधिकारियों को उसी पद पर नियमित पदोन्नति दे दी। यानी उनके पद से सिर्फ कार्यवाहक शब्द हटा दिया गया।

वहीं पुलिस विभाग में मामला इतना आसान नहीं दिख रहा है। यहां विभागीय पदोन्नति के लिए लागू जीओपी (GOP) के नियमों के कारण कई पुलिसकर्मी नियमित प्रमोशन से वंचित हो सकते हैं।

हजारों पुलिसकर्मियों पर प्रमोशन का संकट

सूत्रों के अनुसार पुलिस विभाग में ऐसे करीब पांच हजार या उससे अधिक अधिकारी और कर्मचारी हो सकते हैं, जिन्हें पिछले पांच वर्षों में कार्यवाहक प्रभार दिया गया था।

अब विभागीय जांच, लंबित अनुशासनात्मक मामलों या पूर्व में मिली प्रमुख सजा के कारण उन्हें अनफिट घोषित किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो वर्षों तक उच्च पद का दायित्व निभाने के बावजूद उन्हें नियमित पदोन्नति नहीं मिलेगी।

जूनियर बन जाएंगे सीनियर

यदि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी अनफिट घोषित होते हैं तो उनके कनिष्ठ अधिकारी नियमित पदोन्नति पाकर उनसे वरिष्ठ बन जाएंगे। ऐसे में कई अनुभवी पुलिस अधिकारी अपने ही जूनियर अधिकारियों के अधीन काम करने को मजबूर होंगे।

इससे न केवल वरिष्ठता की पूरी व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि पुलिस बल का मनोबल और प्रशासनिक संतुलन भी बिगड़ सकता है।

कार्यवाहक प्रभार निभाना बना नुकसान?

कई पुलिसकर्मियों का मानना है कि कार्यवाहक प्रभार उन्होंने अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि शासन की प्रशासनिक जरूरत के कारण संभाला था। यदि समय पर नियमित पदोन्नतियां होतीं तो संभव है कि वे अपने मूल पद पर ही रहते।

ऐसे में उच्च पद पर काम करने के दौरान हुई परिस्थितियों या निर्णयों के कारण विभागीय कार्रवाई का सामना भी नहीं करना पड़ता। इसलिए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि शासन की बनाई व्यवस्था का पूरा दुष्परिणाम सिर्फ संबंधित पुलिसकर्मी ही क्यों भुगतें?

भविष्य की पदोन्नतियां भी हो सकती हैं प्रभावित

यदि भविष्य में किसी कारण से पदोन्नतियां फिर से अटकती हैं तो इस बार अनफिट घोषित हुए कई अधिकारी अपने पूरे सेवाकाल में नियमित प्रमोशन से वंचित रह सकते हैं।

इसका असर केवल व्यक्तिगत करियर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों की वरिष्ठता सूची, पदोन्नति श्रृंखला और पुलिस विभाग की प्रशासनिक संरचना पर भी पड़ेगा।

अब नजर शासन और पुलिस मुख्यालय पर

यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों के प्रमोशन का नहीं, बल्कि पुलिस विभाग में संस्थागत न्याय, मनोबल और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।

ऐसे में पुलिस मुख्यालय और राज्य शासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अनुशासन के नियमों से समझौता किए बिना ऐसा संतुलित समाधान निकाला जाए। इससे वर्षों तक उच्च पद का दायित्व निभाने वाले पुलिसकर्मियों के साथ भी न्याय हो सकेगा।

सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है कि जब नियमित पदोन्नतियां समय पर नहीं हो सकीं और शासन ने स्वयं कार्यवाहक प्रभार की व्यवस्था लागू की, तो उस व्यवस्था के दौरान पैदा हुई परिस्थितियों का दंड आखिर अकेले पुलिसकर्मी ही क्यों भुगतें?

ये खबरें भी पढ़िए...

एमपी पुलिस के मास्टर प्लान से ड्रग्स तस्कर और साइबर माफियाओं का टूटेगा नेटवर्क

एमपी में जल्द बनेगा नया पुलिस भर्ती बोर्ड, ईएसबी का बोझ होगा कम!

एमपी पुलिस की सुस्ती पर सीएम मोहन सख्त, 11 हजार से ज्यादा लोगों ने की शिकायत

भोपाल पुलिस का कारनामा, अपराध कहीं भी हो इनके पास गवाह पहले से तैयार



Tags:
  • मध्य प्रदेश
  • पुलिस विभाग
  • पुलिसकर्मी
  • सरकारी विभाग
  • DPC
  • कार्यवाहक प्रभार
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि