अब जनता बताएगी स्कूलों की हकीकत, ओपन फोरम में कमिश्नर करेंगे सीधा संवाद
Ramanand Tiwari | Aug 10, 2026, 20:27 IST
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मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ओपन फोरम शुरू करेगा। इसमें अभिभावक और विद्यार्थी सीधे अधिकारियों से सवाल पूछ सकेंगे। साथ ही 9वीं से 12वीं तक ऑनलाइन उपस्थिति डेटा के जरिए स्कूलों की निगरानी और शिक्षा गुणवत्ता सुधारने की तैयारी है।
मध्य प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग बड़ा प्रयोग करने जा रहा है। अब सिर्फ अधिकारियों की रिपोर्ट और स्कूलों के रजिस्टर के भरोसे काम नहीं चलेगा। विभाग आमजन से सीधे संवाद की तैयारी में है। विभाग जल्द ही ओपन फोरम के जरिए विद्यार्थियों, अभिभावकों और आम लोगों से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल और सुझाव लेने जा रहा है।
इस फोरम में स्कूल शिक्षा विभाग के कमिश्नर अभिषेक सिंह खुद आमजन से रूबरू होंगे। सवाल सिर्फ सुने नहीं जाएंगे, बल्कि विभाग की ओर से उनका जवाब देने और उपयोगी सुझावों को व्यवस्था में लागू करने की कोशिश भी होगी।
लेकिन इस ओपन फोरम की असली अहमियत इससे आगे है। विभाग एक तरफ जनता से पूछेगा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की स्थिति कैसी है। वहीं दूसरी तरफ 9वीं से 12वीं तक विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति का डेटा जुटाने की व्यवस्था भी शुरू कर रहा है।
अब तक स्कूल शिक्षा विभाग की चर्चाओं में साइकिल, लैपटॉप, शिक्षक उपलब्धता, रिक्त पद और दूसरी योजनाओं से जुड़े आंकड़े प्रमुख रहे हैं।
अगर यह फोरम प्रभावी तरीके से चलता है तो स्कूल शिक्षा से जुड़े कई जमीनी सवाल सीधे विभाग के सामने आ सकते हैं।
यहीं से इस पूरी कवायद का दूसरा और ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्सा शुरू होता है। स्कूल शिक्षा विभाग 9वीं से 12वीं तक विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति का ऑनलाइन डेटा जुटाने की व्यवस्था कर रहा है। इसकी एंट्री संबंधित शिक्षक करेंगे। अब तक उपस्थिति का रिकॉर्ड स्कूलों में रजिस्टरों के जरिए दर्ज होता रहा है।
ऑनलाइन सिस्टम में आने के बाद यही जानकारी उच्च स्तर पर भी देखी जा सकेगी। यानी किसी स्कूल में विद्यार्थी लगातार कम आ रहे हैं तो वह स्थिति सिर्फ प्राचार्य के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगी।
मान लीजिए किसी स्कूल में विद्यार्थियों की औसत उपस्थिति लगातार 50 से 60 प्रतिशत के आसपास रहती है। तब सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि बाकी विद्यार्थी स्कूल क्यों नहीं आ रहे।
यह भी पूछा जा सकता है कि इतनी कम उपस्थिति का परीक्षा परिणाम और पढ़ाई की निरंतरता पर क्या असर पड़ रहा है? अगर किसी स्कूल में उपस्थिति कमजोर है और परिणाम भी लगातार खराब है, तो वह स्कूल विभाग की निगरानी में आ सकता है।
हालांकि सिर्फ उपस्थिति के आधार पर शिक्षा की गुणवत्ता का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन यह एक महत्वपूर्ण संकेतक जरूर बन सकता है।
पहले स्कूल में विद्यार्थियों की हाजिरी दर्ज होती थी। प्राचार्य और शिक्षक उस रिकॉर्ड को देखते थे। अब ऑनलाइन डेटा के जरिए विभागीय अधिकारी स्कूलवार और कक्षावार उपस्थिति को ज्यादा व्यापक स्तर पर देख सकेंगे। इसका मतलब यह हुआ कि किसी स्कूल में लगातार गैरहाजिरी की समस्या होने पर उस पर ऊपर के स्तर से भी सवाल उठ सकता है। यही डिजिटल डेटा स्कूल शिक्षा विभाग की जवाबदेही का नया आधार बन सकता है।
ऑनलाइन छात्र उपस्थिति का असर सिर्फ विद्यार्थियों पर नहीं पड़ेगा। शिक्षकों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। हर दिन विद्यार्थियों की सही उपस्थिति दर्ज करनी होगी।
अगर किसी स्कूल की उपस्थिति लगातार कमजोर दिखाई देती है तो विभाग को यह देखने का मौका मिलेगा कि समस्या विद्यार्थियों की है, स्कूल प्रबंधन की है या किसी और कारण से बच्चे नियमित नहीं आ रहे। इससे स्कूलों की निगरानी सिर्फ निरीक्षण के भरोसे रहने के बजाय डेटा आधारित हो सकती है।
यही इस पूरी व्यवस्था की असली परीक्षा है। ऑनलाइन डेटा तैयार हो जाना अपने आप में सुधार नहीं है। अगर किसी स्कूल की उपस्थिति लगातार खराब मिलती है और विभाग सिर्फ आंकड़ा दर्ज करके आगे बढ़ जाता है, तो डिजिटल सिस्टम भी पुरानी कागजी व्यवस्था का नया रूप बनकर रह जाएगा।
लेकिन अगर डेटा के आधार पर स्कूलों की समीक्षा, अभिभावकों से संपर्क, विद्यार्थियों की समस्याओं की पहचान और अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता शुरू होती है, तभी इसका वास्तविक असर दिखाई देगा।
अगर ओपन फोरम और ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था साथ-साथ प्रभावी होती है, तो विभाग के पास शिक्षा व्यवस्था को समझने के दो अलग स्रोत होंगे। एक तरफ जनता बताएगी कि स्कूल में उसे क्या समस्या दिखाई दे रही है। दूसरी तरफ ऑनलाइन डेटा बताएगा कि स्कूल में विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति क्या है। इन दोनों को मिलाकर देखा गया तो कई ऐसे मामले सामने आ सकते हैं, जो सिर्फ सरकारी रिपोर्ट में दिखाई नहीं देते।
स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ही ‘ओपन फोरम’ शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसका खाका तैयार किया जा रहा है। इस फोरम के जरिए जनमानस से सीधे संवाद कर शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और सुझावों को समझने की कोशिश की जाएगी।
आयुक्त अभिषेक सिंह ने बताया कि किसी एक दिन जनमानस से बातचीत के लिए वे स्वयं और विभाग के अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहेंगे। इसके माध्यम से आम लोगों को अपनी बात सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में इस आयोजन को सभागार स्तर पर भी आयोजित करने की योजना है। इसमें शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर लोगों से सुझाव लिए जाएंगे।
आयुक्त के मुताबिक, इस संवाद से मिलने वाली महत्वपूर्ण जानकारियां और फीडबैक स्कूल स्तर तक भी पहुंचेंगे, ताकि जमीनी समस्याओं को समझकर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
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आईएएस अभिषेक सिंह
इस फोरम में स्कूल शिक्षा विभाग के कमिश्नर अभिषेक सिंह खुद आमजन से रूबरू होंगे। सवाल सिर्फ सुने नहीं जाएंगे, बल्कि विभाग की ओर से उनका जवाब देने और उपयोगी सुझावों को व्यवस्था में लागू करने की कोशिश भी होगी।
लेकिन इस ओपन फोरम की असली अहमियत इससे आगे है। विभाग एक तरफ जनता से पूछेगा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की स्थिति कैसी है। वहीं दूसरी तरफ 9वीं से 12वीं तक विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति का डेटा जुटाने की व्यवस्था भी शुरू कर रहा है।
कमिश्नर जनता के सामने होंगे, अब स्कूलों पर सीधे सवाल उठेंगे!
- सरकारी स्कूल में वास्तव में पढ़ाई कैसी हो रही है?
- विद्यार्थी नियमित आ रहे हैं या नहीं?
- किस स्कूल में बच्चे लगातार गायब हैं?
- किस स्कूल का परिणाम कमजोर है?
- कहां शिक्षक हैं, लेकिन विद्यार्थी कम पहुंच रहे हैं?
ओपन फोरम में जनता क्या पूछ सकती है?
मसलन-
- स्कूल में शिक्षक नियमित आते हैं या नहीं?
- कक्षाएं नियमित लगती हैं या नहीं?
- विद्यार्थियों की उपस्थिति कितनी है?
- पढ़ाई का स्तर कैसा है?
- परीक्षा परिणाम कमजोर क्यों है?
- स्कूल में संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं?
- किसी योजना का लाभ वास्तव में विद्यार्थियों तक पहुंच रहा है या नहीं?
सबसे बड़ा ट्विस्ट-जनता की बात के साथ डेटा भी आएगा
ऑनलाइन सिस्टम में आने के बाद यही जानकारी उच्च स्तर पर भी देखी जा सकेगी। यानी किसी स्कूल में विद्यार्थी लगातार कम आ रहे हैं तो वह स्थिति सिर्फ प्राचार्य के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगी।
अगर डेटा खुला तो कई स्कूलों की असली तस्वीर सामने आएगी
यह भी पूछा जा सकता है कि इतनी कम उपस्थिति का परीक्षा परिणाम और पढ़ाई की निरंतरता पर क्या असर पड़ रहा है? अगर किसी स्कूल में उपस्थिति कमजोर है और परिणाम भी लगातार खराब है, तो वह स्कूल विभाग की निगरानी में आ सकता है।
हालांकि सिर्फ उपस्थिति के आधार पर शिक्षा की गुणवत्ता का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन यह एक महत्वपूर्ण संकेतक जरूर बन सकता है।
रजिस्टर से ऑनलाइन डेटा तक-यहीं बदलेगा खेल
शिक्षक पर भी आएगा अप्रत्यक्ष दबाव
अगर किसी स्कूल की उपस्थिति लगातार कमजोर दिखाई देती है तो विभाग को यह देखने का मौका मिलेगा कि समस्या विद्यार्थियों की है, स्कूल प्रबंधन की है या किसी और कारण से बच्चे नियमित नहीं आ रहे। इससे स्कूलों की निगरानी सिर्फ निरीक्षण के भरोसे रहने के बजाय डेटा आधारित हो सकती है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल-डेटा आने के बाद होगा क्या?
लेकिन अगर डेटा के आधार पर स्कूलों की समीक्षा, अभिभावकों से संपर्क, विद्यार्थियों की समस्याओं की पहचान और अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता शुरू होती है, तभी इसका वास्तविक असर दिखाई देगा।
स्कूल शिक्षा विभाग के सामने पहली बार ‘जनता + डेटा’ मॉडल?
स्कूल शिक्षा विभाग में जल्द शुरू होगा ‘ओपन फोरम’: आयुक्त अभिषेक सिंह
आयुक्त अभिषेक सिंह ने बताया कि किसी एक दिन जनमानस से बातचीत के लिए वे स्वयं और विभाग के अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहेंगे। इसके माध्यम से आम लोगों को अपनी बात सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में इस आयोजन को सभागार स्तर पर भी आयोजित करने की योजना है। इसमें शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर लोगों से सुझाव लिए जाएंगे।
आयुक्त के मुताबिक, इस संवाद से मिलने वाली महत्वपूर्ण जानकारियां और फीडबैक स्कूल स्तर तक भी पहुंचेंगे, ताकि जमीनी समस्याओं को समझकर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
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15 की पानी की बोतल के देने होंगे 15 हजार, कंज्यूमर कोर्ट ने लगाया जुर्माना
आईएएस अभिषेक सिंह
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