MP कैंपस में फिर सियासी एंट्री, कांग्रेस ने बिछाया 13 जोन का जाल
Ramanand Tiwari | Aug 21, 2026, 22:28 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्यप्रदेश में करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव की आहट के साथ कांग्रेस ने कैंपस पॉलिटिक्स में अपनी जमीन मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने प्रदेश को 13 क्षेत्रों में बांटकर प्रभारियों की तैनाती की है।
ऐसे समझें पूरा मामला...
- कांग्रेस ने चुनाव से पहले 13 प्रभारी उतारे
- भोपाल की कमान प्रकाश चौकसे को मिली
- इंदौर में अमन बजाज संभालेंगे रणनीति
- NSUI प्रत्यक्ष चुनाव की मांग पर अड़ी
- सितंबर में चुनाव का प्रावधान किया गया
पार्टी ने चुनाव की तारीख और प्रक्रिया पूरी तरह साफ होने से पहले ही प्रदेश को 13 हिस्सों में बांटकर अपने चेहरे मैदान में उतार दिए हैं। यानी चुनावी बिगुल बजने से पहले ही कांग्रेस ने कैंपस की जमीन नापनी शुरू कर दी है।
चुनाव से पहले ही कांग्रेस ने क्यों कसी कमर?
इसका सीधा मतलब है कि कांग्रेस छात्रसंघ चुनाव को आने वाले समय की छात्र राजनीति के लिए संगठन खड़ा करने की पहली सीढ़ी की तरह देख रही है।
कौन-कहां संभालेगा मोर्चा?
- भोपाल में प्रकाश चौकसे, इंदौर में अमन बजाज और ग्वालियर में हेवरन कसाना को जिम्मेदारी दी गई है।
- रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज और मैहर की कमान मंजुल त्रिपाठी के पास रहेगी। सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, निवाड़ी और टीकमगढ़ में अक्षय दुबे प्रभारी होंगे।
- शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में अजय यादव जिम्मेदारी संभालेंगे। जबलपुर संभाग के बड़े क्षेत्र में विजय रजक को लगाया गया है।
- नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल में मयूर जायसवाल, जबकि भिंड, मुरैना और श्योपुर में सचिन द्विवेदी प्रभारी होंगे।
- रायसेन, राजगढ़, सीहोर और विदिशा की जिम्मेदारी अर्पित उपाध्याय को मिली है। शिवपुरी, गुना, अशोकनगर और दतिया में सौरभ यादव मोर्चा संभालेंगे।
- मालवा-निमाड़ के धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर में दीपक डुंडीर प्रभारी होंगे। उज्जैन, देवास, आगर-मालवा, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर और नीमच में डॉ. विजय बोडाना जिम्मेदारी संभालेंगे।
असली पेंच चुनाव की प्रणाली में है
कांग्रेस और NSUI प्रत्यक्ष चुनाव के पक्ष में हैं। NSUI का तर्क है कि जिस विद्यार्थी को अपना प्रतिनिधि चुनना है, उसे सीधे वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए। संगठन ने प्रत्यक्ष चुनाव नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
हाईकोर्ट के आदेश ने खोला रास्ता
15 जुलाई 2026 की सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार से 2026-27 का अकादमिक कैलेंडर पेश करने को कहा। इसके बाद 3 अगस्त को सरकार ने कैलेंडर पेश किया, जिसमें सितंबर में चुनाव का प्रावधान रखा गया।
इसके बाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में चुनाव कराने के निर्देश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया।
लिंगदोह नियम तय करेंगे चुनाव का ढांचा
यही वजह है कि चुनाव की तारीख सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल चुनाव कैसे होगा? का है।
2003 से बंद था प्रत्यक्ष मॉडल
2017 में चुनाव दोबारा शुरू हुए, लेकिन व्यवस्था पूरी तरह प्रत्यक्ष नहीं थी। 2017 के बाद कोरोना समेत कई कारणों से चुनाव नहीं हो सके। अब करीब नौ साल बाद फिर चुनाव का रास्ता खुला है।
अब कैंपस में किसकी ताकत दिखेगी?
अब मुकाबला केवल अध्यक्ष और सचिव की कुर्सी का नहीं होगा। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि करीब नौ साल बाद कॉलेज परिसरों में लौटने वाली छात्र राजनीति किस मॉडल में होती है और उसमें राजनीतिक दल कितनी जगह बना पाते हैं।
यही वजह है कि सितंबर का छात्रसंघ चुनाव सिर्फ कैंपस का चुनाव नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की नई छात्र राजनीति ( Student politics ) का पहला बड़ा टेस्ट माना जा रहा है।
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