लैंड पूलिंग पर सरकार के नए आदेश से किसान संघ नाराज, किसान बोले- उलझाया तो दोबारा करेंगे आंदोलन
Amresh Kushwaha | Nov 20, 2025, 10:00 IST
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उज्जैन में लैंड पूलिंग एक्ट को लेकर किसानों और सरकार के बीच विवाद बढ़ गया है। भारतीय किसान संघ ने सरकार पर वादों को न निभाने का आरोप लगाया है। संशोधित आदेश में किसानों को अपनी जमीन पर सरकारी नियंत्रण होने की चिंता है।
UJJAIN. उज्जैन में लैंड पूलिंग का विवाद फिर गरमा गया है। सरकार के नए आदेश से स्थिति उलझ गई है। दो दिन पहले जब भारतीय किसान संघ के दबाव में सरकार ने मध्यप्रदेश लैंड पूलिंग एक्ट वापस लेने का ऐलान किया था, तब प्रदेशभर में किसानों ने राहत की सांस ली थी। इसके अगले ही दिन नगरीय प्रशासन विभाग ने संशोधित आदेश जारी कर दिया। इसी आदेश ने किसान संगठनों को नाराज कर दिया है।
किसान संघ का आरोप है कि सरकार ने बातचीत में जो आश्वासन दिया था, उसे आदेश में शामिल नहीं किया गया। अब किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे बड़े आंदोलन की तरफ बढ़ेंगे।
किसान नेताओं का कहना है कि नए आदेश में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) की धारा 50 और 12(क) पहले की तरह है। किसानों को इन्हीं धाराओं से आपत्ति है। प्रदेश अध्यक्ष आंजना ने कहा कि यही धाराएं किसानों की जमीन पर सरकारी अधिकार की शुरुआत करती हैं। बातचीत में यह तय हुआ था कि इन धाराओं को हटाया जाएगा, लेकिन आदेश से ऐसा लगता है कि सरकारी योजनाएं जस की तस चलेंगी।
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किसानों का कहना है कि यह नया मॉडल असल में लैंड पूलिंग की ही संशोधित तस्वीर है, जिसमें जमीन पर नियंत्रण सरकार के हाथ रह जाता है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। उसके बाद ही बुधवार 19 नवंबर को संशोधित आदेश जारी किया गया।
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सिंहस्थ क्षेत्र में सरकार ने 2344 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर स्पिरिचुअल सिटी बनाने की योजना बनाई थी। इसके लिए चार क्षेत्र टीडीएस 8, 9, 10 और 11 को चुना गया था। इन क्षेत्रों पर उज्जैन विकास प्राधिकरण का अधिकार था। अब इन चारों क्षेत्रों की जमीन का हक किसानों को वापस मिल गया है।
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नगरीय विकास विभाग के अनुसार, सरकार को निर्माण के लिए 70 हेक्टेयर जमीन चाहिए। इसमें से 23 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। बाकी 45-50 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत होगा। सरकार का प्रयास है कि पक्का निर्माण ज्यादा सरकारी जमीन पर हो। इसके अलावा, 50 किलोमीटर सड़क बनाने की योजना है।
सरकार सिंहस्थ मेला क्षेत्र के लिए एक नया कानून लाने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य मेला क्षेत्र में अतिक्रमण रोकना है। वर्तमान में मध्यभारत सिंहस्थ मेला एक्ट 1955 लागू है। जब मेला क्षेत्र में नया इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा, तो सरकार नए एक्ट में सख्त दंड जोड़ेगी। इस दंड का विवरण और जुर्माना कितनी राशि तक होगा, यह जल्द तय होगा।
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लैंड पूलिंग एक्ट के तहत, सरकार किसानों की जमीन लेकर पक्का निर्माण करती थी। इसके बाद आधी जमीन वापस लौटाई जाती थी, लेकिन मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं था। इससे किसानों में असंतोष था। विरोध के बाद सरकार ने एक्ट में संशोधन किया है। अब नए नियमों के तहत सरकार 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा देने की बात कर रही है।
किसान संघ का आरोप है कि सरकार ने बातचीत में जो आश्वासन दिया था, उसे आदेश में शामिल नहीं किया गया। अब किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे बड़े आंदोलन की तरफ बढ़ेंगे।
लिखित में तय हुआ था कि एक्ट समाप्त होगा
भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने मीडिया से बातचीत में कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा, सरकार के साथ हुई बैठक में साफ सहमति बनी थी। तय किया गया था कि सिंहस्थ क्षेत्र से लैंड पूलिंग एक्ट खत्म किया जाएगा। नगर विकास योजना (TDS–8, 9, 10, 11) के तहत जारी गजट नोटिफिकेशन को रद्द किया जाएगा। संघ ने यह भी मांग रखी थी कि सिंहस्थ पहले की परंपरा के अनुसार आयोजित हो। किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं। मेला क्षेत्र में स्थायी निर्माण पूरी तरह रोके जाएं। आंजना ने कहा, हमने सरकार को लिखित में अपनी शर्तें दी थीं, लेकिन संशोधित आदेश में ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है। आदेश उलझाने वाला है। सरकार को दो दिन का समय दिया है। संशोधन को निरस्त किया जाए और बातचीत में जो वादे किए गए, उन्हें पूरा करे।
किसान बोले-
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यह है सरकार का नया आदेश
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किसानों का कहना है कि यह नया मॉडल असल में लैंड पूलिंग की ही संशोधित तस्वीर है, जिसमें जमीन पर नियंत्रण सरकार के हाथ रह जाता है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। उसके बाद ही बुधवार 19 नवंबर को संशोधित आदेश जारी किया गया।
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स्पिरिचुअल सिटी की योजना का असर
एमपी में लैंड पूलिंग एक्ट की खबर पर एक नजर...
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सरकारी जमीन पर ही होगा पक्का निर्माण
सिंहस्थ के लिए नए नियम लाने की योजना
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क्या था लैंड पूलिंग एक्ट?
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