हंगामे के बीच शुरू हुआ विधानसभा का बजट सत्र, अभिभाषण में भागीरथपुरा का जिक्र ही नहीं

Ramanand Tiwari | Feb 16, 2026, 19:13 IST
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The budget session of the assembly started under the shadow of uproar
Photograph: (the sootr)

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा उठा। विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। बीजेपी ने सरकार के कार्यों की सराहना की।

NEWS IN SHORT

  • एमपी का बजट सत्र शुरू, राज्यपाल के अभिभाषण में भागीरथपुरा कांड का जिक्र नहीं हुआ।
  • कांग्रेस ने आरोप लगाया, सरकार ने संवेदनशील मुद्दों पर चुप्पी साधी।
  • विपक्ष ने भागीरथपुरा कांड पर मंत्रियों की बर्खास्तगी की मांग की।
  • जीतू पटवारी ने सरकार की नैतिक जिम्मेदारी और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
  • विधानसभा अध्यक्ष ने सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निर्देश दिए हैं।

NEWS IN DETAIL

BHOPAL. मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को शुरू हुआ। पहले दिन ही सरकार को तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। राज्यपाल के अभिभाषण में इंदौर के भागीरथपुरा में हुई मौतों का उल्लेख नहीं था। इसे लेकर कांग्रेस विधायकों ने सदन में हंगामा कर दिया। हालात ऐसे बने कि कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

पहले दिन ही गरमाया सदन

बजट सत्र की शुरुआत औपचारिक होनी थी, लेकिन माहौल राजनीतिक टकराव में बदल गया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने गंभीर घटनाओं पर चुप्पी साध ली।

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क्या है पूरा मामला?

जैसे ही राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अभिभाषण शुरू किया, कांग्रेस विधायक अपनी सीटों से खड़े हो गए। उनका कहना था कि अभिभाषण में भागीरथपुरा कांड जैसे मुद्दे को नजरअंदाज करना पीड़ितों के साथ अन्याय है। हंगामा बढ़ने पर राज्यपाल ने कार्यवाही अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

कांग्रेस का आरोप: सच्चाई से दूर था अभिभाषण

सदन से बाहर आए कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि:

  • इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोगों की मौत हुई।
  • जहरीले कफ सिरप से बच्चों की जान गई।
  • इन घटनाओं का अभिभाषण में जिक्र तक नहीं हुआ।
  • कांग्रेस ने इसे जमीन की सच्चाई से दूर भाषण बताया।

मंत्रियों की बर्खास्तगी की मांग

विपक्ष ने भागीरथपुरा कांड को लेकर संबंधित मंत्रियों को बर्खास्त करने की मांग उठाई। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि कार्यवाही के दौरान केवल राज्यपाल का अभिभाषण ही रिकॉर्ड में जाएगा। परासिया से कांग्रेस विधायक सोहनलाल बाल्मीक ने आरोप लगाया कि विपक्ष को बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा।

जीतू पटवारी का बड़ा बयान

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि तीन आपराधिक मंत्री सदन में बैठे हैं। यह प्रदेश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कानून-व्यवस्था और नैतिक जिम्मेदारी को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए।

पहले से थे टकराव के संकेत

यह पहले से माना जा रहा था कि इस बजट सत्र में विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरेगा। सोमवार को सदन में यह देखने को भी मिला। विपक्ष सरकार पर बीते दिनों में हुई कुछ घटनाओं को लेकर हमलावर रहेगा।

जिनमें शामिल हैं:

  • इंदौर का दूषित जल कांड
  • जहरीला कफ सिरप मामला
  • कर्नल सोफिया कुरैशी पर मंत्री विजय शाह की टिप्पणी
  • प्रदेश की कानून-व्यवस्था
पहले दिन का घटनाक्रम बताता है कि सत्र के दौरान राजनीतिक तापमान ऊंचा रह सकता है।

आंकड़ों में समझिए बजट सत्र की तैयारी

विधानसभा सचिवालय के अनुसार इस सत्र के लिए:

  • 1,750 तारांकित प्रश्न लगाए गए हैं।
  • 1,728 अतारांकित प्रश्न दर्ज हुए हैं।
  • 10 स्थगन प्रस्ताव दिए गए हैं।
  • 236 ध्यानाकर्षण सूचनाएं प्राप्त हुई हैं।
  • 41 अशासकीय संकल्प लगाए गए हैं।
  • 83 शून्यकाल सूचनाएं दी गई हैं।
यह संकेत है कि सरकार को कई मुद्दों पर जवाब देना होगा।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर सख्ती

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निर्देश दिए गए कि सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी रहे। केवल वैध प्रवेश पत्र के जरिए ही सदन में प्रवेश हो।

अब आगे क्या?

बजट सत्र की शुरुआत ही विवादों से हुई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच बहस का रुख क्या होगा-संवाद की ओर या फिर टकराव की ओर।

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तारांकित प्रश्न और अतारांकित प्रश्नों में क्या अंतर है

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान 'प्रश्नकाल' (Question Hour) कार्यवाही का हिस्सा होता है। सरल शब्दों में कहें तो, यह वह समय है जब विधायक (MLA) मंत्रियों सीधे सवाल करते हैं और उनसे उनके विभागों के कामकाज का हिसाब मांगते हैं।

इन सवालों को मुख्य रूप से दो कैटेगरी में बांटा गया है: तारांकित (Starred) और अतारांकित (Unstarred)। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं:

1. तारांकित प्रश्न (Starred Questions)

तारांकित प्रश्न वे सवाल होते हैं जिनका जवाब संबंधित मंत्री को सदन में जुबानी (Oral) देना पड़ता है।

पहचान: इन सवालों के ऊपर एक 'तारा' या स्टार (*) का निशान बना होता है, इसलिए इन्हें 'तारांकित' कहते हैं।

सप्लीमेंट्री सवाल (Cross-Questioning): इसकी सबसे खास बात यह है कि जब मंत्री जवाब देते हैं, तो विधायक तुरंत उनसे 'अनुपूरक प्रश्न' (Supplementary Questions) पूछ सकते हैं। यानी, अगर मंत्री के जवाब से विधायक संतुष्ट नहीं हैं, तो वो मौके पर ही दूसरा सवाल दाग सकते हैं।

ऐसे समझें: यह वैसा ही है जैसे क्लास में टीचर ने आपसे खड़े होकर सवाल पूछा और आपने सबके सामने उसका जवाब दिया, फिर टीचर ने उसी में से एक और सवाल पूछ लिया।

2. अतारांकित प्रश्न (Unstarred Questions)

अतारांकित प्रश्न वे होते हैं जिनका जवाब मंत्री जी को लिखित (Written) रूप में देना होता है।

पहचान: इन सवालों पर कोई स्टार का निशान नहीं होता।

कोई क्रॉस-क्वेश्चनिंग नहीं: क्योंकि इनका जवाब कागज पर लिखकर दिया जाता है, इसलिए सदन में इन पर कोई बहस या चर्चा नहीं होती है। न ही कोई सप्लीमेंट्री सवाल पूछा जा सकता है।

डेटा और जानकारी: आमतौर पर ऐसे सवाल जिनमें बहुत ज्यादा डेटा, आंकड़े या लंबी जानकारी चाहिए होती है, उन्हें अतारांकित श्रेणी में रखा जाता है।

ऐसे समझें: यह वैसा ही है जैसे आपको होमवर्क मिला, आपने उसे कॉपी में लिखा और टीचर की टेबल पर जमा कर दिया। कोई आमने-सामने की पूछताछ नहीं।

ध्यानाकर्षण सूचना क्या है?

जब प्रदेश में अचानक कोई बड़ी घटना हो जाए-जैसे कहीं बाढ़ आ गई, जहरीली शराब से मौतें हो गईं, या किसानों की फसल बर्बाद हो गई-तो विधायक सदन में 'ध्यानाकर्षण सूचना' देते हैं। इसका सीधा मतलब है: "मंत्री जी, जरा इधर देखिए! प्रदेश में यह गंभीर मामला हो गया है और इस पर सरकार का जवाब चाहिए।"

2. यह काम कैसे करता है? (The Process)

इस सूचना के जरिए विधायक किसी मंत्री का ध्यान 'जनहित' (Public Importance) के किसी खास और जरूरी मुद्दे की ओर खींचते हैं।

स्पीकर की मंजूरी: विधायक को पहले विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) को लिखित नोटिस देना होता है। अगर अध्यक्ष को लगता है कि मुद्दा वाकई गंभीर है, तो ही इसे मंजूरी मिलती है।

मंत्री का बयान: सूचना मिलने पर संबंधित विभाग के मंत्री को उस मुद्दे पर सदन में एक आधिकारिक बयान (Official Statement) देना पड़ता है।

सवाल-जवाब: मंत्री के बयान के बाद, जिस विधायक ने सूचना दी थी, वह स्पष्टीकरण के लिए छोटे सवाल भी पूछ सकता है।

स्थगन प्रस्ताव क्या है? (The 'Stop Everything' Motion)

मान लीजिए विधानसभा में बजट या किसी पुराने बिल पर चर्चा चल रही है। अचानक प्रदेश में कोई बहुत बड़ी घटना हो जाती है-जैसे कोई बड़ा दंगा, जहरीली गैस का रिसाव, या करोड़ों का कोई ताजा घोटाला सामने आ जाए।

ऐसे में विपक्ष 'स्थगन प्रस्ताव' लाता है। इसका सीधा मतलब है: "अध्यक्ष महोदय, बाकी सब काम छोड़ो, पहले इस अर्जेंट और गंभीर मुद्दे पर चर्चा करो!"

अशासकीय संकल्प क्या है?

सदन में दो तरह के सदस्य होते हैं: एक सरकारी (मंत्री) और दूसरे गैर-सरकारी (बाकी सभी विधायक, चाहे वो सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के)।

जब कोई ऐसा विधायक जो मंत्री नहीं है, सदन में किसी खास मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचने या कोई नीति बदलवाने के लिए कोई प्रस्ताव लाता है, तो उसे 'अशासकीय संकल्प' कहते हैं। इसे 'प्राइवेट मेंबर रेजोल्यूशन' भी कहा जाता है।

यह 'संकल्प' क्यों लाया जाता है?

इसका मकसद किसी कानून को पास कराना नहीं, बल्कि सरकार की राय जानना या सरकार पर दबाव बनाना होता है।

मान लीजिए कोई विधायक चाहता है कि उसके क्षेत्र की किसी खास भाषा को राजभाषा का दर्जा मिले, या किसी पुरानी परंपरा को बंद किया जाए। वह इस मुद्दे पर एक 'संकल्प' तैयार करता है और सदन में पेश करता है। इस पर चर्चा होती है, और अंत में वोटिंग होती है।

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