एमपी में महिला आयोग अध्यक्ष का नाम तय, सालों पूराने केस से नियुक्ति पर लगी रोक
Amresh Kushwaha | Apr 30, 2026, 15:32 IST
mp women commission chairperson appointment legal delay shobha ojha case
मध्यप्रदेश में महिला आयोग अध्यक्ष और सदस्यों के नाम तय हो चुके हैं। वहीं, छह साल पुराना कोर्ट केस अड़चन बन गया है। अब सरकार ने एजी से कानूनी राय मांगी है। अगले सप्ताह तक स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
News In Short
- मध्य प्रदेश महिला आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति अटकी है।
- सरकार ने रेखा यादव, साधना स्थापक और समीक्षा गुप्ता के नाम तय कर दिए थे।
- मार्च-अप्रैल 2020 की एक नियुक्ति से जुड़ी याचिका अभी कोर्ट में लंबित है।
- अब सरकार ने AG (Advocate General) यानी महाधिवक्ता से कानूनी राय मांगी है।
News In Detail
क्यों अटकी है यह नियुक्ति?
जानकारी के अनुसार, सरकार ने अध्यक्ष पद के लिए पूर्व विधायक रेखा यादव और सदस्य के रूप में गाडरवारा की पूर्व विधायक साधना स्थापक और ग्वालियर की पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता का नाम तय किए हैं। वहीं, आदेश जारी होने से पहले ही एक पुरानी अड़चन सामने आ गई।
मध्य प्रदेश महिला एवं बाल विकास विभाग (Women and Child Development Department) में जब फाइल आगे बढ़ी तो पता चला कि मार्च-अप्रैल 2020 में की गई एक नियुक्ति से जुड़ी याचिका अब भी कोर्ट में लंबित है। यह छह साल पुराना मामला अब नई नियुक्ति के रास्ते में रोड़ा बन गया है।
जानें क्या है पूरा मामला?
अप्रैल 2020 में शोभा ओझा की नियुक्ति रद्द कर दी गई थी। शोभा ओझा ने इसे कोर्ट में चुनौती दी थी। तब से यह पद खाली ही पड़ा है। यही याचिका अब भी कोर्ट में चल रही है, जो नई नियुक्ति के लिए कानूनी उलझन बन गई है।
सरकार के सामने क्या हैं विकल्प?
अब दो विकल्पों पर हो रही है चर्चा
दूसरा, यथास्थिति आदेश के दायरे को समझते हुए नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
दोनों में से जो भी रास्ता कानूनी रूप से सही होगा, उसी पर अमल होगा।
कब तक मिल सकता है हल?
महिला आयोग का पद लंबे समय से खाली पड़ा है। यह आयोग महिलाओं से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई, उनके अधिकारों की रक्षा और नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। पद खाली रहने से आयोग का काम प्रभावित हो रहा है।
नियुक्तियों की नोटशीट से खुला राज
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि राजनीतिक दबाव में जल्दी नियुक्ति करने की कोशिश हुई, लेकिन कानूनी अड़चन ने ब्रेक लगा दिया। अब सरकार सोच-समझकर कदम उठाना चाहती है ताकि कोर्ट में नई मुश्किल न खड़ी हो।
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