सरकार के नशा मुक्त मध्यप्रदेश अभियान के शुरू होने से पहले ही पुलिसकर्मी लगा रहे पलीता, TI सहित चार हुए सस्पेंड

Neel Tiwari | Apr 09, 2026, 20:16 IST
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Photograph: (the sootr)

मध्य प्रदेश सरकार ने 1 मई से नशा मुक्त अभियान शुरू किया। इसके तहत जबलपुर में पुलिसकर्मियों द्वारा की गई लापरवाही ने अभियान को प्रभावित किया। IG ने कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया।

News in short

  • सरकार के नशा मुक्त अभियान शुरू होने के पहले ही पुलिस की लापरवाही उजागर
  • गृह मंत्रालय के निर्देशों का पालन न करने पर कार्रवाई
  • पनागर थाना प्रभारी सहित 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड
  • ड्रग सप्लाई चेन तोड़ने के निर्देशों की अनदेखी
  • अवैध लाभ के लिए नियमों से समझौते की आशंका

Intro

मध्य प्रदेश सरकार 1 मई से नशा मुक्त अभियान शुरू करने वाली है। इससे जुड़े हुए निर्देश पुलिस विभाग को दिए जा चुके हैं। इसी बीच, जबलपुर में बड़ी लापरवाही सामने आई है। गृह मंत्रालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद NDPS एक्ट में गलत कार्रवाई करने पर सख्त कदम उठाया गया है। IG ने थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर साफ संदेश दिया है कि सरकार की मंशा के खिलाफ जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

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नशा मुक्त प्रदेश बनाने की कोशिश

मध्य प्रदेश सरकार ने जिस तरह से प्रदेश को नक्सल समस्या से मुक्त करने में सफलता हासिल की, उसी तर्ज पर अब नशा मुक्त मध्य प्रदेश बनाने का व्यापक अभियान शुरू किया जा रहा है। यह अभियान एक में से शुरू होना है लेकिन गृह मंत्रालय ने पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। अब मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई केवल औपचारिक न होकर पूरी सप्लाई चेन को खत्म करने वाली होनी चाहिए। सरकार की इस मंशा को लेकर पूरे प्रदेश में सख्त संदेश पहले ही दिया जा चुका है।

पुलिस की लापरवाही ने अभियान पर डाला असर

इसके विपरीत जबलपुर के पनागर थाने में सामने आया मामला सरकार की इस मंशा के खिलाफ जाता हुआ दिखा। विभागीय सूत्रों के अनुसार थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों ने NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई करते समय गंभीर लापरवाही बरती और केवल एक आरोपी पर कार्रवाई कर मामले को सीमित कर दिया। इससे ड्रग नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की प्रक्रिया प्रभावित हुई, जो सरकार की प्राथमिकता के विपरीत है।

गृह मंत्रालय के निर्देशों की खुली अनदेखी

सूत्रों के मुताबिक, मध्यप्रदेश गृह मंत्रालय ने पुलिस विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मादक पदार्थों के मामलों में यह पता लगाना अनिवार्य है कि सामान कहां से आया और कहां सप्लाई होना था। लेकिन इस मामले में इन निर्देशों की अनदेखी की गई। इतना ही नहीं, आरोपी को थाने से ही जमानत दे दी गई, जो NDPS एक्ट के प्रावधानों के विपरीत है और कानून की गंभीर अवहेलना मानी गई।

IG का सख्त एक्शन, सरकार की मंशा को मजबूती

इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए IG ने पनागर थाना प्रभारी विपिन ताम्रकार सहित चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। अन्य तीन पुलिस कर्मियों सब इंस्पेक्टर रवि परिहार और एक ASI सहित आरक्षक संजय मिश्रा और विनोद को भी IG ने सस्पेंड किया है। यह कार्रवाई सरकार की नीतियों को लागू करने की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखी जा रही है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि जो भी अधिकारी या कर्मचारी सरकार के निर्देशों की अनदेखी करेगा, उसके खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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IG की रडार पर हैं जबलपुर के 6 थाने

पनागर थाना प्रभारी सहित पुलिस कर्मियों पर की गई कार्यवाई के अलावा जिले के 6 थानो में पुलिसकर्मियों को कारण बताओं नोटिस जारी किए गए। इसमें थाना गढ़ा, लार्डगंज, ग्वारीघाट, अधारताल, मझौली एवं गोहलपुर में कुल निरीक्षक 6, उप निरीक्षक 4 सहित सहायक उप निरीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

अब ड्रग माफिया पर आर्थिक प्रहार की तैयारी

विभागीय सूत्रों के अनुसार सरकार अब केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि मादक पदार्थों के कारोबार से अर्जित संपत्तियों पर भी कार्रवाई की योजना बना रही है। आरोपियों की संपत्तियों का वैल्यूएशन कर अवैध कमाई को चिन्हित किया जाएगा और उसे जब्त करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह कदम नशे के कारोबार की आर्थिक रीढ़ तोड़ने में अहम साबित हो सकता है।

पुलिस विभाग के लिए सख्त संदेश

यह मामला पूरे पुलिस विभाग के लिए एक चेतावनी के रूप में सामने आया है। सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश को नशा मुक्त बनाना है और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई या मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी। ऐसे में यह कार्रवाई उन सभी पुलिसकर्मियों के लिए सबक है, जो निर्देशों के बावजूद अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतते हैं या व्यक्तिगत लाभ के लिए कानून से समझौता करते हैं।

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