जल्द मिलेगा रेरा को नया चेयरमैन, ट्रिब्यूनल अध्यक्ष की भी होगी नियुक्ति
Sanjay Sharma | Jun 04, 2026, 20:33 IST
new rera chairman
मध्य प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (RERA) में अप्रैल 2026 से चेयरमैन का पद खाली है। हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद सरकार ने 16 रिटायर्ड IAS अफसरों के नाम भेजे। ट्रिब्यूनल अध्यक्ष की नियुक्ति भी लंबित है।
BHOPAL. मध्य प्रदेश भू संपदा विनियामक प्राधिकरण यानी रेरा को जल्द नया चेयरमैन मिल जाएगा। नियुक्ति में देरी पर हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद सरकार ने रिटायर्ड आईएएस अफसरों के नाम हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को भेज दिए हैं।
रेरा चेयरमैन के साथ ही ट्रिब्यूनल अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए भी हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को पत्र भेजा गया है। रेरा चेयरमैन का पद अप्रैल 2026 से खाली है। इस वजह से सुनवाई अटकी पड़ी हैं और दूसरे कामों भी रुक गए हैं। इसको लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है।
सरकार के बेरुखी से नाराज हाईकोर्ट ने 23 जून को निर्धारित सुनवाई में मुख्य सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश दिए है। हाईकोर्ट द्वारा सीएस अनुराग जैन को तलब करने के बाद सरकार ने सक्रियता दिखाई है।
मध्य प्रदेश में रेरा चेयरमैन की नियुक्ति में सरकार की उदासीनता पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद अब सरकार हरकत में आ गई है।
सरकार ने अप्रैल 2026 से खाली पड़े रेरा चेयरमैन के पद पर नियुक्ति के लिए 16 आईएएस अधिकारियों की सूची तैयार कर ली है। यह सूची हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को भेज दी गई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली समिति सरकार द्वारा भेजे गए पैनल से नए रेरा चेयरमैन के नाम का चयन करेगी।
रेरा चेयरमैन के लिए सरकार द्वारा नवम्बर 2023 से मार्च 2026 के बीच सेवानिवृत्त हुए 16 आईएएस अधिकारियों का पैनल भेजा गया है। इनमें मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस, अजय तिर्की, कल्पना श्रीवास्तव, राजीव रंजन, अश्विनी कुमार राय, संजय बंधोपाध्याय, पंकज राग, मलय श्रीवास्तव, एसएन मिश्रा, अजीत केसरी, विनोद कुमार, मो.सुलेमान, जेएन कंसोटिया और स्मिता भारद्वाज के नाम शामिल हैं।
रेरा चेयरमैन के साथ ही रेरा अपीलेट ट्रिब्यूनल में मार्च 2026 से अध्यक्ष पद खाली है। ट्रिब्यूनल अध्यक्ष जस्टिस वीपीएस चौहान का कार्यकाल मार्च 2026 में पूरा हो चुका है।
इस पद के लिए हाईकोर्ट के पूर्व या वर्तमान न्यायाधीश के नाम का चयन होना है। इसके लिए भी सरकार ने हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को पत्र लिखा है। ट्रिब्यूनल उन मामलों में सुनवाई करता है जिनमें एक पक्ष रेरा द्वारा सुनाए गए निर्णय से असंतुष्ट होकर अपील करता है।
वहीं रेरा को सेवानिवृत्त आईएएस एपी श्रीवास्तव का कार्यकाल पूरा होने के बाद से नए चेयरमैन का इंतजार है। दोनों मुख्य पद खाली होने से रेरा और ट्रिब्यूनल में बीते तीन माह से कामकाज प्रभावित हो रहा है।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली समिति में नगरीय प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और विधि विभाग के सचिव या प्रमुख सचिव सदस्य होते हैं। समिति द्वारा चयन के बाद रेरा को 23 जून को सुनवाई से पहले नया चेयरमैन मिल सकता है।
रेरा सदस्य एसएस राजपूत का कार्यकाल भी 6 जून को पूरा होने जा रहा है। सरकार नए सदस्य की नियुक्ति के लिए सचिव पद से रिटायर्ड हुए अधिकारियों के नामों को शामिल किया जा रहा है। वर्तमान सदस्य राजपूत भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। अब इस पद को सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी से भरने की तैयारी है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण (रेरा ट्रिब्यूनल) में अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी गंभीरता दिखाई है। जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने महत्वपूर्ण संस्था में लंबे समय तक अध्यक्ष का पद खाली रखे जाने पर नाराजगी जताई थी।
कोर्ट ने कहा था ऐसी महत्वपूर्ण संस्था को बिना अध्यक्ष के लंबे समय तक नहीं छोड़ा जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने अध्यक्ष और दूसरे पदों को तत्काल करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट का कहना था ट्रिब्यूनल अध्यक्ष के रिटायर होने से पहले ही नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी। राज्य सरकार की ओर से समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
रेरा (भू संपदा विनियामक प्राधिकरण) से रजिस्टर्ड प्रदेश के करीब 450 प्रोजेक्ट की अनुमति नहीं मिल पाई है। अकेले राजधानी भोपाल में पांच से ज्यादा प्रोजेक्ट अनुमति न मिलने से रुके हुए हैं। यह सिर्फ बिल्डरों की समस्या नहीं है।
इन प्रोजेक्ट्स में फ्लैट या प्लॉट बुक करने वाले आम खरीदार भी फंसे हैं। वे अपने घर का सपना पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि ऐसे मामलों में उनके द्वारा की गई शिकायत की सुनवाई ही नहीं हो पा रही है। वहीं रेरा के निर्णयों के खिलाफ अपीलेट ट्रिब्यूनल में भी अध्यक्ष की कमी से सुनवाई अटकी हुई है।
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रेरा चेयरमैन के साथ ही ट्रिब्यूनल अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए भी हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को पत्र भेजा गया है। रेरा चेयरमैन का पद अप्रैल 2026 से खाली है। इस वजह से सुनवाई अटकी पड़ी हैं और दूसरे कामों भी रुक गए हैं। इसको लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है।
सरकार के बेरुखी से नाराज हाईकोर्ट ने 23 जून को निर्धारित सुनवाई में मुख्य सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश दिए है। हाईकोर्ट द्वारा सीएस अनुराग जैन को तलब करने के बाद सरकार ने सक्रियता दिखाई है।
हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई
सरकार ने अप्रैल 2026 से खाली पड़े रेरा चेयरमैन के पद पर नियुक्ति के लिए 16 आईएएस अधिकारियों की सूची तैयार कर ली है। यह सूची हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को भेज दी गई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली समिति सरकार द्वारा भेजे गए पैनल से नए रेरा चेयरमैन के नाम का चयन करेगी।
16 रिटायर्ड अफसरों के भेजे नाम
मार्च-अप्रैल से नहीं चेयरमैन व अध्यक्ष
इस पद के लिए हाईकोर्ट के पूर्व या वर्तमान न्यायाधीश के नाम का चयन होना है। इसके लिए भी सरकार ने हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को पत्र लिखा है। ट्रिब्यूनल उन मामलों में सुनवाई करता है जिनमें एक पक्ष रेरा द्वारा सुनाए गए निर्णय से असंतुष्ट होकर अपील करता है।
वहीं रेरा को सेवानिवृत्त आईएएस एपी श्रीवास्तव का कार्यकाल पूरा होने के बाद से नए चेयरमैन का इंतजार है। दोनों मुख्य पद खाली होने से रेरा और ट्रिब्यूनल में बीते तीन माह से कामकाज प्रभावित हो रहा है।
23 जून से पहले हो सकती है नियुक्ति
रेरा सदस्य एसएस राजपूत का कार्यकाल भी 6 जून को पूरा होने जा रहा है। सरकार नए सदस्य की नियुक्ति के लिए सचिव पद से रिटायर्ड हुए अधिकारियों के नामों को शामिल किया जा रहा है। वर्तमान सदस्य राजपूत भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। अब इस पद को सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी से भरने की तैयारी है।
ट्रिब्यूनल में नियुक्ति न होने पर भी नाराजगी
कोर्ट ने कहा था ऐसी महत्वपूर्ण संस्था को बिना अध्यक्ष के लंबे समय तक नहीं छोड़ा जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने अध्यक्ष और दूसरे पदों को तत्काल करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट का कहना था ट्रिब्यूनल अध्यक्ष के रिटायर होने से पहले ही नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी। राज्य सरकार की ओर से समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सैंकड़ों प्रोजेक्ट अटके, टल रही सुनवाई
इन प्रोजेक्ट्स में फ्लैट या प्लॉट बुक करने वाले आम खरीदार भी फंसे हैं। वे अपने घर का सपना पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि ऐसे मामलों में उनके द्वारा की गई शिकायत की सुनवाई ही नहीं हो पा रही है। वहीं रेरा के निर्णयों के खिलाफ अपीलेट ट्रिब्यूनल में भी अध्यक्ष की कमी से सुनवाई अटकी हुई है।
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