News Strike: मोहन भागवत के दो बयान और सियासत में तूफान! निशाने पर विपक्ष या बीजेपी?
आरएसएस चीफ मोहन भागवत के बयान जिस अंदाज में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, क्या वाकई उनके मायने वही हैं, या कहा कुछ और है और दिखाया कुछ और जा रहा है? अक्सर चंद सेकंड की कुछ रील्स की हकीकत होती कुछ और है और समझी कुछ और जाती है, जैसे राहुल गांधी का आलू और सोने वाला बयान।
संघ प्रमुख के बयान पर बाजार गर्म
एक रील में वो कह रहे हैं कि मनुष्य अहंकार में सब और मेरी सत्ता चलती है ऐसा सोचने लगता है और एक बयान में वो रिजीम चेंज वाली ताकतों पर निशाना साध रहे हैं। ये दोनों ही बयान काफी वायरल हो रहे हैं और इसे अलग-अलग मायनों के साथ अपने शब्दों से सजा कर लोग पोस्ट भी कर रहे हैं।
“जहाज़ जब डूबता है तो सबसे पहले चूहे जहाज़ छोड़कर भागते हैं”दस साल तक भाजपा की मोदी सरकार में पूरी तरह हर संवैधानिक पद पर, ब्यूरोक्रेसी में और यहां तक कि गैर सरकारी संस्थाओं का भी संघीकरण कर सत्ता की मलाई चाटते रहे। जब तक मोदी-शाह ताकतवर दिख रहे थे, तब उनके साथ हर भ्रष्टाचार, अनैतिक और लोकतंत्र विरोधी हथकंडों में उनका समर्थन करते रहे। “ये है तथाकथित राष्ट्रवादी परिवार” !@kharge @RahulGandhi @priyankagandhi @ashokgehlot51 @kcvenugopalmp @Jairam_Ramesh
— Bhandari S.INC 🇮🇳 (@s_bhandari2) October 20, 2026
रिजीम चेंज वाले बयान पर क्या बोले भागवत
सांसद आलोक शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधा
रिजीम चेंज के जुमले पर बयानबाजी
इसे उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकार भी बताया और कहा कि भारत के संविधान के अनुसार विरोध प्रदर्शन करना कोई अपराध नहीं है। जिसके बाद पूर्व सीएम और मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी रिजीम चेंज का इस्तेमाल करते हुए विपक्ष और प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधा था। तो अब अगर आप मोहन भागवत का रिजीम चेंज वाला बयान सुनें तो उसे पूरा सुनें और समझ लें कि वो आखिर किसकी तरफ निशाना है।
अहंकार वाला बयान बीजेपी के लिए चेतावनी?
क्या बीजेपी और आरएसएस के रिश्तों में दरार?
🚨Big Breaking🚨🔥 “मोदी के खिलाफ RSS के बगावती सुर! क्या बदलने जा रहा है सियासी समीकरण?”21 जुलाई 2025 को पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने अचानक स्वास्थ्य ठीक न होने का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया था। चूंकि उस दिन के शाम तक जगदीप की काम करते रहे थे और एक इंटरव्यू में 27 तक कार्यकाल पूरा कर लेने की बात की थी।खैर...किसी न किसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच गहरी नाराजगी थी,लेकिन अंत समय में सरकार ने नाराजगी जाहिर कर इस्तीफा देने की बात कही और 4 घंटे के अंदर इस्तीफा हो गया था।इस बीच कुछ सालों से RSS और मोदी जी के बीच संबंध बहुत अच्छे नहीं चल रहे हैं। कई मौकों भागवत जी ने ऐसा बयान दिया जो सरकार को असहज कर सकती थी।मोदी जी ने भागवत के जन्मदिन पर बधाई देना भी उचित नहीं समझा।इस तरह से दोनों के बीच झगड़े खुलेतौर पर तो नहीं,बुदबुदाहट के रूप में मीडिया में छाई रही।अब बात करते हैं मोहन भागवत और जगदीप धनकड़ के संबंध में।इस विजयादशमी को RSS ने धनकड़ को अपना मुख्य गेस्ट बनाकर आमंत्रित किया है। धनकड़ को मोदी जी पसंद नहीं करते हैं इसलिए भागवत जी ने आमंत्रित कर मोदी जी को एक संदेश देने की कोशिश की है।अभी तक आरोप लगते थे कि RSS मोदी के छात्र छाया में,प्रभाव में आ चुका है। इनका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व बचा नहीं है। RSS की किसी बात की कोई सुनवाई नहीं थी सरकार में, न कोई सलाह मशविरा। यहां तक कुछ झगड़े की जड़ अध्यक्ष पद को लेकर भी थी।अब दोनों के बीच नया झगड़ा का जड़ अगला प्रधानमंत्री उम्मीदवार को लेकर है।इन सब मामलों के बीच धनकड़ को विजयादशमी पर आमंत्रित कर भागवत जी ने मोदी जी को कड़ा संदेश देने की कोशिश की है।अगर RSS बीजेपी का साथ छोड़ दे तो चुनावी रिजल्ट पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है क्योंकि चुनाव के वक्त RSS का पूरा कैडर प्रचार प्रसार में लग जाता है।
— Naren Yadav (@Buland_Aawazz) October 20, 2026
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