एमपी में 5 लाख खनिज वाहनों पर लगेगा माइनिंग टैग, टूटने पर परिवहन बंद! कलेक्टरों को एक महीने का समय
Ramanand Tiwari | Oct 21, 2026, 23:43 IST
मध्यप्रदेश में खनिज वाहनों की होगी डिजिटल निगरानी
मध्यप्रदेश में अवैध खनिज परिवहन रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू होगी। प्रदेश के पांच लाख से ज्यादा खनिज परिवहन वाहनों पर माइनिंग टैग लगाए जाएंगे। खनिज विभाग ने सभी कलेक्टरों को एक महीने में टैगिंग पूरी करने को कहा है। टैग खराब होने पर संबंधित वाहन से खनिज परिवहन रोका जा सकेगा।
प्रदेश के 25 जिलों में पहले से 40 ई-चेकगेट लगाए गए हैं। अब सरकार वाहनों की डिजिटल निगरानी और मजबूत करने की तैयारी में है।
माइनिंग टैग खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की पहचान के लिए इस्तेमाल होगा। इसे संबंधित वाहन पर लगाया जाएगा। इसकी मदद से वाहन के पंजीयन और परिवहन संबंधी जानकारी जांची जा सकेगी।
कई बार वाहनों की नंबर प्लेट टूट जाती है या साफ दिखाई नहीं देती। ऐसे में वाहन की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। माइनिंग टैग से अधिकारियों को पहचान का अतिरिक्त माध्यम मिलेगा। इससे जांच के दौरान संबंधित वाहन की जानकारी हासिल करना आसान होगा। हालांकि टैग की तकनीक और उसे पढ़ने की पूरी प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।
नई व्यवस्था में माइनिंग टैग को सुरक्षित रखना वाहन संचालकों की जिम्मेदारी होगी। टैग खराब या क्षतिग्रस्त होने पर वाहन से खनिज परिवहन प्रतिबंधित किया जा सकेगा। ई-खनिज पोर्टल पर वाहन का पंजीयन निरस्त करने का प्रावधान भी बताया गया है।
ऐसे में टैग खराब होने पर वाहन संचालकों को परेशानी हो सकती है। परिवहन दोबारा शुरू करने के लिए विभागीय प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। हालांकि टैग बदलने और दोबारा पंजीयन कराने की प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है। तकनीकी खराबी दूर करने की समयसीमा भी सामने नहीं आई है।
खनिज परिवहन करने वाले वाहन संचालकों को टैग के लिए शुल्क देना होगा। विभाग ने एक माइनिंग टैग की कीमत 138 रुपए तय की है। इस रकम पर जीएसटी अलग से देना होगा।
पांच लाख वाहनों के हिसाब से मूल शुल्क 6.90 करोड़ रुपए होगा। इस गणना में जीएसटी शामिल नहीं है। वास्तविक राशि टैग लगने वाले वाहनों की अंतिम संख्या पर निर्भर करेगी।
मध्यप्रदेश में खनिज परिवहन की डिजिटल निगरानी पहले से की जा रही है। अप्रैल 2026 से प्रदेश के 25 जिलों में ई-चेकगेट व्यवस्था शुरू हुई। इन जिलों में कुल 40 मानव रहित ई-चेकगेट लगाए गए हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।
इसका उद्देश्य खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की निगरानी करना है। हालांकि इस व्यवस्था के नतीजों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। अब तक जांचे गए वाहनों की संख्या भी सामने नहीं आई है। अवैध परिवहन के कितने मामले पकड़े गए, इसका आंकड़ा भी उपलब्ध नहीं है।
खनिज विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को टैगिंग की जिम्मेदारी सौंपी है। पहले जिलों में पंजीकृत खनिज परिवहन वाहनों की पहचान की जाएगी। इसके बाद निर्धारित समय में उन पर माइनिंग टैग लगाए जाएंगे।
प्रदेश में पांच लाख से ज्यादा पंजीकृत वाहन होने के कारण यह बड़ा काम है। अलग-अलग जिलों में इनकी संख्या भी अलग हो सकती है। ऐसे में समय पर टैग उपलब्ध कराना जरूरी होगा। सभी संबंधित वाहनों की टैगिंग पूरी होने पर व्यवस्था का व्यापक इस्तेमाल संभव होगा।
सरकार को नई व्यवस्था से अवैध खनिज परिवहन पर अंकुश लगने की उम्मीद है। हालांकि इसकी सफलता केवल टैग लगाने की संख्या से तय नहीं होगी। डिजिटल निगरानी से कितने संदिग्ध वाहन पकड़े जाते हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। अवैध परिवहन मिलने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ कार्रवाई भी जरूरी होगी। अधिकारियों को परिवहन दस्तावेजों और नियमों के पालन की जांच करनी होगी।
तकनीकी खराबी होने पर वाहन संचालकों को जल्द समाधान मिलना भी जरूरी है। इससे वैध कारोबार को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा। फिलहाल सरकार ने सभी पंजीकृत खनिज परिवहन वाहनों पर टैग लगाने के निर्देश दिए हैं। अब निर्धारित समय में काम पूरा करना संबंधित कलेक्टरों की जिम्मेदारी होगी।
क्या है माइनिंग टैग?
कई बार वाहनों की नंबर प्लेट टूट जाती है या साफ दिखाई नहीं देती। ऐसे में वाहन की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। माइनिंग टैग से अधिकारियों को पहचान का अतिरिक्त माध्यम मिलेगा। इससे जांच के दौरान संबंधित वाहन की जानकारी हासिल करना आसान होगा। हालांकि टैग की तकनीक और उसे पढ़ने की पूरी प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।
टैग टूटा तो परिवहन पर रोक
ऐसे में टैग खराब होने पर वाहन संचालकों को परेशानी हो सकती है। परिवहन दोबारा शुरू करने के लिए विभागीय प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। हालांकि टैग बदलने और दोबारा पंजीयन कराने की प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है। तकनीकी खराबी दूर करने की समयसीमा भी सामने नहीं आई है।
एक टैग की कीमत 138 रुपए
पांच लाख वाहनों के हिसाब से मूल शुल्क 6.90 करोड़ रुपए होगा। इस गणना में जीएसटी शामिल नहीं है। वास्तविक राशि टैग लगने वाले वाहनों की अंतिम संख्या पर निर्भर करेगी।
25 जिलों में लगे 40 ई-चेकगेट
इसका उद्देश्य खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की निगरानी करना है। हालांकि इस व्यवस्था के नतीजों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। अब तक जांचे गए वाहनों की संख्या भी सामने नहीं आई है। अवैध परिवहन के कितने मामले पकड़े गए, इसका आंकड़ा भी उपलब्ध नहीं है।
कलेक्टरों को एक महीने का समय
प्रदेश में पांच लाख से ज्यादा पंजीकृत वाहन होने के कारण यह बड़ा काम है। अलग-अलग जिलों में इनकी संख्या भी अलग हो सकती है। ऐसे में समय पर टैग उपलब्ध कराना जरूरी होगा। सभी संबंधित वाहनों की टैगिंग पूरी होने पर व्यवस्था का व्यापक इस्तेमाल संभव होगा।
अवैध परिवहन पर कितनी लगेगी रोक?
तकनीकी खराबी होने पर वाहन संचालकों को जल्द समाधान मिलना भी जरूरी है। इससे वैध कारोबार को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा। फिलहाल सरकार ने सभी पंजीकृत खनिज परिवहन वाहनों पर टैग लगाने के निर्देश दिए हैं। अब निर्धारित समय में काम पूरा करना संबंधित कलेक्टरों की जिम्मेदारी होगी।
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