एमपी में ऑपरेशन मुस्कान ने हजारों गुमशुदा बच्चियों को दी नई जिंदगी, जानें क्या कहते हैं आंकड़े
Manya Jain | May 01, 2026, 16:33 IST
operation muskan
ऑपरेशन मुस्कान के तहत मध्यप्रदेश पुलिस ने गुमशुदा लड़कियों की बरामदगी में बड़ी सफलता हासिल की है। आगर मालवा जिला इस मुहिम में सबसे आगे रहा है। जानें ऑपरेशन मुस्कान की पूरी सच्चाई...
मध्यप्रदेश में लड़कियों की गुमशुदगी एक बहुत बड़ी चुनौती है। इन मामलों के पीछे अक्सर मानव तस्करी जैसे मामले जुड़े होते हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश पुलिस का 'ऑपरेशन मुस्कान' बहुत काम आ रहा है। प्रदेश में यह अभियान लापता लड़कियों को ढूंढने के लिए चलाया जा रहा है। जनवरी 2021 में इस अभियान की शुरुआत हुई थी।
पुलिस मॉडर्न टेक्नोलॉजी की मदद से नाबालिग लड़कियों को तलाशती है। बरामद होने के बाद उन्हें उनके परिवारों से मिलाया जाता है। यह हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है। पुलिस का यह कदम समाज को सुरक्षित बनाने के लिए है। आइए जानते हैं कि क्या है ऑपरेशन मुस्कान, कैसे ये संगठन करता है काम और क्या कहते हैं प्रदेश में गुमशुदगी के आंकड़े ?
ऑपरेशन मुस्कान मध्यप्रदेश पुलिस का अभियान है। इस अभिया में विशेष रूप से 18 साल से कम उम्र की लड़कियों पर केंद्रित है। इसे गृह मंत्रालय, भारत सरकार के 'ऑपरेशन स्माइल' की तर्ज पर राज्य स्तर पर लागू किया गया है।
ऑपरेशन मुस्कान के पीछे एक सुव्यवस्थित ढांचा (Framework) काम करता है। हर थाने में एक महिला पुलिस अधिकारी और साइबर विशेषज्ञ की टीम तैनात की गई है।
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पुलिस लापता लड़कियों को ढूंढने के लिए मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टॉवर लोकेशन, और CCTV फुटेज का विश्लेषण करती है। सोशल मीडिया प्रोफाइल की निगरानी और डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए आरोपियों तक पहुंचा जाता है।
टेक्नोलॉजी फेल होने पर पुलिस का पुराना नेटवर्क काम आता है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थलों पर गहन तलाशी अभियान चलाया जाता है। अंतरराज्यीय समन्वय (Inter-state Coordination) के जरिए दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ डेटा साझा किया जाता है।
आगर मालवा और
आगर मालवा जिले ने साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सफलता संभव है। हाल ही में पुलिस ने बिना किसी डिजिटल ट्रेल के, केवल मुखबिरों और फील्ड वर्क के आधार पर वडोदरा (गुजरात) से एक नाबालिग को बरामद किया। एसपी विनोद सिंह चौहान के नेतृत्व में यहां साइबर और महिला सेल का तालमेल मिसाल बना हुआ है।
आदिवासी बहुल बालाघाट जिले में भी बड़ी सफलता मिली है। मई 2025 के दौरान मात्र 20 दिनों में 22 नाबालिग लड़कियों को उनके परिवारों से मिलाया गया। एसपी आदित्य मिश्रा के मार्गदर्शन में पुलिस यहां पुराने लंबित मामलों (Pending Cases) को भी दोबारा खोलकर जांच कर रही है।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, साल 2020 से जनवरी 2026 तक की स्थिति इस प्रकार है।
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आंकड़ों के अनुसार, बड़े शहरों में गुमशुदगी के मामले अधिक रिपोर्ट होते हैं।
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ऑपरेशन मुस्कान मध्यप्रदेश का विशेष अभियान है, लेकिन कई अन्य राज्य भी Operation Muskaan / Operation Smile या इसी तरह के अभियानों के जरिए गुमशुदा बच्चों और लड़कियों को ढूंढते हैं।आइए जानते हैं अन्य राज्यों की तुलना में एमपी के हाल क्या हैं।
नोट: मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में नाबालिग लड़कियों के नए मामले लगभग बराबर हैं, लेकिन MP ने 2025 में रिपोर्टेड से ज्यादा बरामद कीं।
यह खबर हमारी बहन-बेटियों की सुरक्षा से जुड़ी है।अक्सर लड़कियां अचानक गायब हो जाती हैं। पुलिस उन्हें ढूंढने के लिए बहुत मेहनत करती है। 'ऑपरेशन मुस्कान' के जरिए पुलिस सक्रियता से काम कर रही है। इसमें आधुनिक मशीनों और नई तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। सालों पुराने पेचीदा मामलों को भी सुलझाया जा रहा है।
परिवार वाले अक्सर उम्मीद छोड़ चुके होते हैं। प्रशासन की मुस्तैदी हमें अब बड़ा भरोसा दिलाती है। अनहोनी होने पर पुलिस पूरी मजबूती से साथ खड़ी है। तकनीक और पुलिस की मेहनत से बेटियां घर लौट रही हैं।
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पुलिस मॉडर्न टेक्नोलॉजी की मदद से नाबालिग लड़कियों को तलाशती है। बरामद होने के बाद उन्हें उनके परिवारों से मिलाया जाता है। यह हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है। पुलिस का यह कदम समाज को सुरक्षित बनाने के लिए है। आइए जानते हैं कि क्या है ऑपरेशन मुस्कान, कैसे ये संगठन करता है काम और क्या कहते हैं प्रदेश में गुमशुदगी के आंकड़े ?
ऑपरेशन मुस्कान: आखिर क्या है यह अभियान?
- तुरंत बरामदगी: गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होते ही बिना समय गंवाए 'Tracing' शुरू करना।
- पुनर्वास (Rehabilitation): बरामद लड़कियों की काउंसलिंग करना और उन्हें समाज में अच्छा स्थान दिलाना।
- सख्त कार्रवाई: अपहरणकर्ताओं और दोषियों के खिलाफ
POCSO और IPC की धाराओं के तहत तुरंत कानूनी कार्यवाही। - जागरूकता: आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर विशेष जागरूकता फैलाना।
कैसे काम करता है ऑपरेशन मुस्कान
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1. आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग
2. बेसिक पुलिसिंग का रोल
आगर मालवा और बालाघाट मॉडल
आदिवासी बहुल बालाघाट जिले में भी बड़ी सफलता मिली है। मई 2025 के दौरान मात्र 20 दिनों में 22 नाबालिग लड़कियों को उनके परिवारों से मिलाया गया। एसपी आदित्य मिश्रा के मार्गदर्शन में पुलिस यहां पुराने लंबित मामलों (Pending Cases) को भी दोबारा खोलकर जांच कर रही है।
आंकड़ों की हकीकत
OPERATION MUSKAN
नोट: 2025 में पुलिस ने 12 हजार 314 नई रिपोर्ट के मुकाबले 13 हजार 774 लड़कियों को बरामद किया, जिसमें पुराने लंबित मामलों की सफल रिकवरी भी शामिल है।
बड़े शहरों में गुमशुदगी के केस
- इन्दौर (Indore): 4 हजार449 मामले (सर्वाधिक)।
- जबलपुर (Jabalpur): 2 हजार296 मामले।
- भोपाल (Bhopal): 1 हजार685 मामले।
- ग्वालियर (Gwalior): 1 हजार188 मामले।
- आगरा मालवा - 50%
- अशोक नगर - 48.3%
- हरदा - 38.5%
- राजगढ़ - 35.5%
- देवास - 30.4%
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क्या कहते हैं अन्य राज्यों के आंकड़े
| राज्य | अवधि | कुल रिपोर्टेड मामले | बरामद/ट्रेस्ड | अनट्रेस्ड (लगभग) | रिकवरी रेट |
|---|---|---|---|---|---|
| मध्यप्रदेश | 2020 से जनवरी 2026 | 2,74,311 | 2,35,977 | 68,334 | ~86% |
| महाराष्ट्र | 2024-2025 (2 वर्ष) | 1,17,369 | 86,228 | 31,141 | ~73% |
| पश्चिम बंगाल | 2023 (एक वर्ष) | ~1,20,000 | ~52% | उच्च | ~52% |
| उत्तर प्रदेश | पुराना डेटा | उच्च संख्या | सुधार हो रहा | मध्यम | 30-40% |
- महाराष्ट्र में 2025 में अकेले 48,278 महिलाएं गुमशुदा रिपोर्ट हुईं।
- पश्चिम बंगाल बच्चों (खासकर लड़कियों) के गुमशुदा मामलों में अक्सर देश में नंबर 1 रहता है।
- मध्यप्रदेश में कुल मामलों की संख्या बहुत अधिक है (लगभग 130 प्रतिदिन), लेकिन रिकवरी रेट उम्मीद बेहतर दिख रहा है।
ऑपरेशन मुस्कान / Smile के प्रदर्शन की तुलना
- मध्यप्रदेश: 2025 में विशेष फोकस नाबालिग लड़कियों पर। कई जिलों (आगर मालवा, बालाघाट) में बिना डिजिटल ट्रेल के भी सफल रिकवरी। पुराने मामले (6-7 साल पुराने) भी खोले जा रहे हैं।
- महाराष्ट्र: 2015 से 13-14 राउंड ऑपरेशन मुस्कान चला। 2025 तक 41 हजार+ बच्चों को बरामद किया। रेलवे स्टेशन और शहरी क्षेत्रों पर फोकस।
- तेलंगाना: एक महीने के अभियान में 7 हजार 600 बच्चों को रेस्क्यू किया (2025)।
- छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, ओडिशा: नियमित अभियान चलाते हैं, लेकिन MP जितना बड़ा स्केल नहीं।
- पश्चिम बंगाल
ये खबर क्यों जरूरी
परिवार वाले अक्सर उम्मीद छोड़ चुके होते हैं। प्रशासन की मुस्तैदी हमें अब बड़ा भरोसा दिलाती है। अनहोनी होने पर पुलिस पूरी मजबूती से साथ खड़ी है। तकनीक और पुलिस की मेहनत से बेटियां घर लौट रही हैं।
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