एमपी पीडब्ल्यूडी में नया कारनामा, मुरैना सहायक यंत्री को सौंपा 700 किमी दूर डिंडौरी का अतिरिक्त प्रभार

PWD ने मुरैना के सहायक यंत्री राहुल सिंह को डिंडोरी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है, जबकि दोनों जिलों की दूरी लगभग 700 किलोमीटर है। इस आदेश ने सभी को हैरान कर दिया है।

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Anjali Dwivedi
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पांच पॉइंट में पूरा मामला

  • मुरैना के सहायक यंत्री राहुल सिंह को डिंडोरी का कार्यपालन यंत्री का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
  • यह आदेश विभाग के प्रमुख अभियंता केपीएस राणा ने जारी किया गया है। जबकि दोनों जिलों की दूरी करीब 700 किलोमीटर है।
  • पिछले एक साल में PWD ने कई अधिकारियों को अजीब तरीके से अतिरिक्त प्रभार सौंपा है।
  • इसके पहले भी अधिकारियों को दूर-दूर के स्थानों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा चुकी है।
  • विभाग के अधिकारी इस आदेश पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग में एक और हैरान करने वाला कदम उठाया गया है। विभाग ने मुरैना के सहायक यंत्री, राहुल सिंह, को डिंडोरी के कार्यपालन यंत्री का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मुरैना और डिंडोरी की दूरी करीब 700 किलोमीटर है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक अधिकारी इतने दूर-दूर के जिलों में कैसे कामकाजी गुणवत्ता को सुनिश्चित कर सकता है।

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क्या है मामला?

लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख अभियंता केपीएस राणा द्वारा जारी आदेश ने सबको चौंका दिया है। 700 किलोमीटर की दूरी पर एक सहायक यंत्री को दूसरे जिले का अतिरिक्त प्रभार देना केवल अजीब ही नहीं है। यह कई सवाल भी उठाता है कि क्या विभाग ने इस कदम को पूरी तरह से सोचा-समझा है। इस आदेश के बाद मुरैना से डिंडोरी के कामकाजी हालात पर अब सवाल उठने लगे हैं।

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PWD में एक और अजीब आदेश

यह पहली बार नहीं है, जब PWD में ऐसे आदेश जारी हुए हों। पिछले एक साल में कई अधिकारियों को इसी तरह से अजीब तरीके से अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस मामले में राहुल सिंह का नाम सबसे चर्चा में है, लेकिन इससे पहले भी कई अधिकारियों को ऐसे आदेश मिल चुके हैं। उदाहरण के तौर पर, संजय डेहेरिया और कोमल उड़के जैसे अधिकारियों को भी दूर-दूर के स्थानों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा चुकी है।

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क्या कहना है महकमें का?

PWD विभाग के अधिकारी इस आदेश पर कुछ खास टिप्पणी करने से बच रहे हैं। हालांकि, महकमें से निकल रहे आदेशों और फाइलों से यह साफ है कि पिछले कुछ महीनों में विभाग ने कई बार इस तरह के अजीब निर्णय लिए हैं।

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क्या कुछ बदला है पिछले कुछ सालों में?

अधिकारियों के बीच में चल रही धन बल की होड़ ने इन आदेशों को और भी विवादित बना दिया है। खासतौर पर जब हम देखते हैं कि विभाग में पिछले एक साल में दर्जनों अधिकारियों को इस तरह से अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक असामान्य प्रशासनिक कदम है, या फिर इसके पीछे कुछ और है।

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