ट्विशा शर्मा केस: पूर्व जज गिरिबाला सिंह का फैज कुरैशी हत्याकांड पर फैसला सुर्खियों में
Sandeep Kumar | May 30, 2026, 18:48 IST
Former Judge giribala singh
ट्विषा शर्मा मौत मामले में सीबीआई कार्रवाई के बाद पूर्व जज गिरिबाला सिंह फिर सुर्खियों में हैं। उनका फैज कुरैशी हत्याकांड का फैसला चर्चा का विषय बन गया है।
ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह गिरफ्तारी हुई है। गिरफ्तारी के बाद गिरिबाला सिंह के आखिरी फैसले की चर्चा तेज हो गई। यह फैसला भोपाल के फैज कुरैशी हत्याकांड से जुड़ा था।
अदालत ने आरोपी शफीक कुरैशी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया। गिरिबाला सिंह ने 13 फरवरी 2023 को यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा अभियोजन पक्ष हत्या का आरोप साबित नहीं कर सका। प्रत्यक्षदर्शी गवाह, वैज्ञानिक साक्ष्य और एफएसएल रिपोर्ट आरोपी की संलिप्तता साबित नहीं कर पाए।
25 जुलाई 2021 की रात तलैया थाना क्षेत्र में फैज कुरैशी पर चाकू से हमला हुआ था। गंभीर रूप से घायल फैज की अस्पताल में मौत हो गई थी। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया और आरोपी शफीक कुरैशी को गिरफ्तार किया था। साथ ही चाकू और अन्य सामग्री बरामद होने का दावा किया गया।
इस मामले में तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने 13 फरवरी 2023 को फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या का आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। गवाहों के मुकरने और वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी के कारण आरोपी को दोषमुक्त किया गया।
सुनवाई में प्रमुख गवाह अमान कुरैशी, अफसान कुरैशी, जीशान और समीर अपने पुराने बयानों से मुकर गए। किसी ने अदालत में यह स्वीकार नहीं किया कि उसने आरोपी को हमला करते देखा था। गवाहों के बयानों में यह अंतर अभियोजन पक्ष के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।
अदालत ने कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट (FSL Report) अभियोजन के दावों को निर्णायक रूप से साबित नहीं कर सकती। वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर्याप्त नहीं थे। केवल पुलिस के बयानों पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत का हवाला दिया कि अभियोजन को आरोप संदेह से परे साबित करना होता है। हर उचित संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए। इसी आधार पर शफीक कुरैशी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषमुक्त किया गया।
पूर्व जज गिरिबाला सिंह के फैसले को अब ट्विशा शर्मा केस में सीबीआई की कार्रवाई के बाद फिर से देखा जा रहा है। उनके न्यायिक करियर के अहम फैसले, सार्वजनिक और मीडिया में चर्चा का विषय बन गए हैं।
ट्विशा शर्मा की 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया है, जबकि मायके वालों ने हत्या का आरोप लगाया है। इस मामले में 24 मई को दिल्ली एम्स की टीम ने भोपाल एम्स में दूसरा पोस्टमार्टम किया था।
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अदालत ने आरोपी शफीक कुरैशी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया। गिरिबाला सिंह ने 13 फरवरी 2023 को यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा अभियोजन पक्ष हत्या का आरोप साबित नहीं कर सका। प्रत्यक्षदर्शी गवाह, वैज्ञानिक साक्ष्य और एफएसएल रिपोर्ट आरोपी की संलिप्तता साबित नहीं कर पाए।
क्या है फैज कुरैशी हत्याकांड ?
13 फरवरी 2023 का फैसला
गवाहों के मुकरने का प्रभाव
एफएसएल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य
सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत का हवाला
गिरिबाला सिंह का फैसला
कब हुई थी ट्विशा शर्मा की मौत
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