राजस्थान के दूध कारोबारी बने एमपी के शराब किंग, भाई बना जान का दुश्मन

पुलिस के जांच पड़ताल के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि जो भाई सालों से एक साथ कारोबार करते थे, आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि वे एक-दूसरे के जान के दुश्मन बन गए। पुलिस के मुताबिक अशोक और राकेश के बीच प्रॉपर्टी का विवाद था।

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Pooja Kumari
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BHOPAL. नीमच के शराब और प्रॉपर्टी कारोबारी अशोक अरोरा की हत्या की साजिश में उन्हीं के छोटे भाई राकेश अरोरा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि राकेश अरोरा और मुख्य आरोपी बाबू सिंधी ने अशोक अरोरा की हत्या की सुपारी 2 करोड़ रुपए में दी थी।

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लालच बना जान का दुश्मन 

पुलिस के जांच पड़ताल के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि जो भाई सालों से एक साथ कारोबार करते थे, आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि वे एक-दूसरे के जान के दुश्मन बन गए। पुलिस के मुताबिक अशोक और राकेश के बीच प्रॉपर्टी का विवाद था। दरअसल, ये कोई एक प्रॉपर्टी का नहीं, बल्कि पूरे कारोबार का विवाद था। जानकारी के मुताबिक अशोक अरोरा शराब और प्रॉपर्टी के पूरे कारोबार को अपने बेटे को सौंपना चाहता था जबकि राकेश अपने बेटे को।

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नीमच और मंदसौर के शराब और प्रॉपर्टी कारोबार के बीच चल रही थी बहस

इस पूरे मामले की तहकीकात होने के बाद पता चला कि ये न केवल भाइयों के बीच की अदावत थी, बल्कि नीमच और मंदसौर के शराब और प्रॉपर्टी कारोबार पर अपनी धाक जमाने के लिए दो और ग्रुप कॉम्पिटिशन में थे। ये भी सामने आया कि जो शूटर्स अशोक अरोरा को मारने आए थे। वो इनमें से एक ग्रुप में शामिल थे। 

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कश्मीरी लाल अरोरा राजस्थान के गंगानगर में करते थे दूध का कारोबार 

बता दें कि अशोक और राकेश के पिता कश्मीरी लाल अरोरा राजस्थान के गंगानगर में दूध का कारोबार करते थे। 90 के दशक में वो नीमच आए। यहां उनकी मुलाकात अजीत जायसवाल से हुई। जायसवाल के साथ मिलकर कश्मीरी लाल ने शराब के ठेके लेना शुरू किए। ये धंधा चल निकला। दोनों ने पार्टनरशिप में खूब पैसा कमाया और कारोबार पर अपना वर्चस्व हासिल कर लिया। बताया जा रहा है कि अजीत जायसवाल का कोई वारिस नहीं था जो इस कारोबार को संभाल सके, इसलिए कारोबार की कमान कश्मीरी लाल अरोरा के हाथ में आ गई। कश्मीरी लाल की मौत के बाद उनके पांच बेटों में से दो अशोक और राकेश ने अजीत जायसवाल के साथ मिलकर शराब के कारोबार को संभाला। दोनों शराब के साथ प्रॉपर्टी का बिजनेस भी करने लगे।

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गंगानगर ग्रुप को राजस्थान के चांडक ग्रुप से मिली थी चुनौती 

दोनों ने ऐसी धाक जमाई कि नीमच में इन्हें चुनौती देने वाला कोई दूसरा नहीं था। राजस्थान के गंगानगर से जुड़ाव होने के चलते इस ग्रुप को गंगानगर नाम मिला। 90 के दशक में गंगानगर ग्रुप को राजस्थान के चांडक ग्रुप से चुनौती मिली थी। इस ग्रुप ने नीमच, मंदसौर और सीमावर्ती राजस्थान के जिलों में शराब ठेकों पर वर्चस्व कायम कर लिया था। नीमच के स्थानीय लोगों के मुताबिक चांडक ग्रुप से जुड़े लोगों ने उस दौर में आतंक फैलाया। जब लोग काफी परेशान हो गए तो स्थानीय लोगों ने चांडक ग्रुप की दुकानों पर हमला किया। लोगों के भारी विरोध को देखकर चांडक ग्रुप को अपना कारोबार समेटना पड़ा। जानकारों का कहना है कि उस वक्त ग्रुप के सदस्यों के बीच आए दिन गोलियां चलती थीं। इसके बाद गंगानगर ग्रुप ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर आंजना ग्रुप के पप्पू, जगदीश, विष्णु चंद्रवंशी समेत कई लोगों पर केस दर्ज करवा दिया।

शराब के ठेके और केबल नेटवर्क में वर्चस्व स्थापित करने की होड़

जब मामला कोर्ट में पहुंचा तो नीमच के वकील हरिओम शर्मा ने इन सभी की हाईकोर्ट से जमानत करवाई। ये बात गंगानगर ग्रुप को नागवार गुजरी। कुछ दिनों बाद वकील हरिओम शर्मा की लाश जावद रोड पर अशोक अरोरा के फार्म हाउस के पास मिली। गंगानगर ग्रुप के प्रभाव के चलते पुलिस ने मामले को एक्सीडेंट बताकर खत्म करने की कोशिश की, लेकिन शर्मा के परिजन ने इसे हत्या बताते हुए कार्रवाई की मांग की। जब मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने अशोक अरोरा, उनके सगे भाई राकेश व जगदीश पर मामला दर्ज किया। मामला दर्ज होने के बाद तीनों फरार हो गए। आंजना ग्रुप को शराब कारोबार पर अपना वर्चस्व स्थापित करने का मौका मिला। इधर, आंजना ग्रुप ने केबल कारोबार में भी गंगानगर ग्रुप को चुनौती दी। अब दोनों ग्रुप में शराब के ठेके और केबल नेटवर्क में वर्चस्व स्थापित करने की होड़ शुरू हो गई।

भाई के साथ किया ये व्यवहार

अशोक और राकेश अरोरा शराब और प्रॉपर्टी के कारोबार में स्थापित हो गए। दोनों की रसूख और हैसियत इतनी तेजी से बढ़ी कि स्थानीय पुलिस प्रशासन उनके सामने नतमस्तक हो गया। सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी दोनों भाई बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने लगे। छोटे-मोटे विवाद अपने ऑफिस में ही निपटाने लगे। अशोक का बेटा आरुल अरोरा इग्लैंड में पढ़ाई कर रहा था। जबकि उम्र में बड़ा राकेश का बेटा दानिश अरोरा पिछले पांच साल से पापा-चाचा के साथ मिलकर कारोबार में सहयोग कर रहा था। लोग दानिश को गंगानगर ग्रुप के अगले वारिस के तौर पर देखने लगे थे। दानिश के प्रभाव के चलते नीमच-मंदसौर जिले के युवा तेजी से जुड़ रहे थे। इसी बीच आरुल पढ़ाई पूरी कर विदेश से लौटा। गंगानगर ग्रुप के करीबियों की मानें तो दोनों भाइयों में विवाद काफी गहरा गया। यहां तक कि गंगानगर ऑफिस में ही राकेश अरोरा का भी ऑफिस चलता था। अशोक ने राकेश को बाहर का रास्ता दिखा दिया। बंगला अपने तीन अन्य भाइयों को दे दिया। शराब कारोबार पर खुद पूरा कब्जा जमा लिया। सालों से भाई के साथ कारोबार कर रहे राकेश को इससे झटका लगा।

राकेश को अशोक ने किया कारोबार से दरकिनार 

जब राकेश को अशोक ने अपने कारोबार से दरकिनार कर दिया तो, राकेश का दबदबा यहां खत्म हो गया। राकेश ये बर्दाश्त नहीं कर पाया। यहीं से भाइयों के बीच अदावत बढ़ना शुरू हुई। राकेश ने अपना नया ऑफिस चोपड़ा चौराहे पर बनाया। इसी ऑफिस के सामने 4 फरवरी को अशोक अरोरा पर सरे आम जानलेवा हमला हुआ था। पुलिस के एक अधिकारी का कहना है कि अशोक ने पहले ही दिन दर्ज किए बयान में भाई राकेश पर संदेह जाहिर किया था। जब राकेश के मोबाइल की कॉल डिटेल मिली तो अशोक के संदेह की पुष्टि हुई। भाई राकेश से अलगाव से पहले अशोक अरोरा बिना किसी सुरक्षा के घूमा करते थे। विवाद के बाद उन्होंने पंजाब और हरियाणा से निजी सुरक्षा गार्ड बुलवाए। हथियारों से लैस 6 सुरक्षा गार्ड हर वक्त उनकी गाड़ी के पीछे चलते थे। 19 दिसंबर 2023 को जब बाबू सिंधी पेरोल पर रिहा हुआ तो अशोक को खुद के ऊपर हमले का अंदेशा हो गया था। 

एक शूटर की हुई मौत

 4 फरवरी को हमले के दिन भी चार सुरक्षा गार्ड उनके साथ थे। यही कारण था कि जब चोपड़ा चौराहे पर उनकी कार के सामने शूटरों ने अपनी कार रोककर फायर किया, तो पीछे चल रहे सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी हमला किया। जिसमें एक शूटर बाबू फकीर मारा गया। राकेश अरोरा ने अपने भाई की हत्या की साजिश बाबू सिंधी से मिलकर रची थी। ये बात अब पूरी तरह से साफ हो चुकी है, लेकिन बाबू सिंधी की अशोक अरोरा से प्रॉपर्टी के धंधे को लेकर अदावत थी। दरअसल, बाबू सिंधी मंडी के एक मामूली आढ़तिया से डोडा चूरा और धोलापानी का तस्कर बन गया था। उसने पंजाब और हरियाणा में इसकी सप्लाई शुरू कर दी थी। इससे उसने जो पैसा कमाया उसे प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट किया। वहीं, अशोक अरोरा भी प्रॉपर्टी के कारोबार में थे। बाबू सिंधी से अरोरा को चुनौती मिली। उन्हें ये डर भी सताने लगा कि कहीं बाबू सिंधी शराब के कारोबार में भी चुनौती पेश ना करें। प्रॉपर्टी के कारोबार में दोनों का कई बार आमना-सामना भी हआ था।

दो करोड़ की दी थी सुपारी 

अगस्त 2021 में बाबू सिंधी के ठिकाने पर सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम ने छापा मारा। उसके यहां से 255 क्विंटल डोडा चूरा और धोलापानी जब्त हुआ। बाबू सिंधी के साथ नौ आरोपियों को जेल की सजा हुई। बाबू सिंधी का मानना था कि अशोक अरोरा ने टीम को ये टिप दी थी। जेल में रहकर ही बाबू सिंधी ने अशोक अरोरा के मर्डर का प्लान बनाया था। 19 दिसंबर 2023 को वो पेरोल पर रिहा हुआ। इसके बाद उसे अशोक और राकेश के बीच तनातनी की बात पता चली थी। उसने राकेश से संपर्क किया। दोनों का दुश्मन एक ही था इसलिए दोनों ने हाथ मिला लिया। बाबू सिंधी ने अशोक अरोरा को जान से मारने के लिए शूटरों को दो करोड़ की सुपारी दी थी। पुलिस इस मामले में राजस्थान के कोटा में सरेंडर कर चुके शूटर अकरम को भी पूछताछ के लिए ट्रांजिट रिमांड पर लाई है। पूछताछ में पता चला है कि सभी शूटरों के संबंध आंजना ग्रुप से भी रहे हैं। पुलिस इस ग्रुप के लोगों की भी जांच कर रही है। नीमच के शराब कारोबारी अशोक अरोरा पर हुए जानलेवा हमले की साजिश में मास्टरमाइंड बाबू सिंधी के अलावा अशोक अरोरा का छोटा भाई राकेश अरोरा भी शामिल था। बाबू सिंधी ने अशोक अरोरा पर हमले के लिए शूटरों को दो करोड़ रुपए में सुपारी दी थी।

नीमच