प्रदेश का सबसे बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय, लेकिन छवि सबसे ज्यादा सवालों में, आरजीपीवी में फिर कुलपति चयन की कवायद

Ramanand Tiwari | Jan 03, 2026, 08:07 IST
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मध्य प्रदेश के सबसे बड़े तकनीकी विश्वविद्यालय आरजीपीवी में नए कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है। लंबे समय से विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे इस संस्थान में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी है।

5 पॉइंट में समझें पूरा मामला...

  • आरजीपीवी कुलपति पद के लिए 10 फरवरी 2026 तक आवेदन शुरु हो गए हैं।
  • भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों के बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई।
  • सिलेक्शन के लिए बेदाग छवि और उच्च योग्यता अनिवार्य शर्त रखी गई है।
  • आवेदकों को विभागीय जांच मुक्त होने का प्रमाण देना होगा।
  • नए कुलपति का कार्यकाल पदभार ग्रहण से चार वर्ष होगा।
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय है। इसमें सैकड़ों इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेज जुड़े हुए हैं। फिर भी यह विश्वविद्यालय कई सालों से विवादों, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों में घिरा रहा है। हालात ये हो गए हैं कि यह प्रदेश का एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय बार-बार नकारात्मक खबरों में रहा है।

एक के बाद एक खुलते रहे घोटालों के आरोप

पिछले कुछ सालों में आरजीपीवी में परीक्षा मूल्यांकन, उत्तर पुस्तिका जांच और कॉलेजों की मान्यता को लेकर कई सवाल उठे हैं। इसके अलावा, विश्वविद्यालय की टेंडर प्रक्रिया और वित्तीय लेन-देन में भी बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। कई बार इन मामलों की जांच की मांग की गई, और कुछ मामलों ने तो छात्र आंदोलनों का रूप भी ले लिया।

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परीक्षा व्यवस्था से लेकर प्रशासन तक सवालों के घेरे में

कभी रिजल्ट में बड़ी गड़बड़ी, कभी रीचेकिंग में फर्जीवाड़ा, तो कभी समय पर डिग्री न मिलने की शिकायतें आती रहीं। इस वजह से छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए आरजीपीवी की कार्यप्रणाली भरोसे के बजाय चिंता का कारण बन गई।

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विवादों का दबाव, कुलपति को छोड़ना पड़ा पद

लगातार बढ़ते आरोपों और विरोध प्रदर्शनों के बीच तत्कालीन कुलपति पर प्रशासनिक विफलता के आरोप लगे। अंततः उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद से विश्वविद्यालय अस्थायी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहा है।

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राजभवन ने संभाला मोर्चा, आवेदन प्रक्रिया शुरू

विवादों के इस लंबे दौर के बाद अब राजभवन ने नए कुलपति की नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए अधिसूचना जारी कर ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, ताकि नेतृत्व परिवर्तन के जरिए हालात सुधारे जा सकें।

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10 फरवरी तक आवेदन, लेकिन निगाहें कड़ी

राजभवन की अधिसूचना के अनुसार कुलपति पद के लिए इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी 10 फरवरी 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।इस बार चयन प्रक्रिया पर सरकार और राजभवन दोनों की कड़ी नजर बताई जा रही है।

छात्र संगठनों के आंदोलनों ने खोली पोल

आरजीपीवी में छात्र संगठनों ने मूल्यांकन प्रणाली, प्रशासनिक फैसलों और पारदर्शिता की कमी को लेकर कई बार आंदोलन किए। इन आंदोलनों ने विश्वविद्यालय की अंदरूनी कार्यप्रणाली को सार्वजनिक मंच पर ला दिया।

सरकार और राजभवन दोनों सतर्क

प्रदेश के सबसे बड़े तकनीकी विश्वविद्यालय में बार-बार उठे विवादों को देखते हुए सरकार और राजभवन इस बार कोई चूक नहीं चाहते। माना जा रहा है कि कुलपति चयन में सख्त मापदंड अपनाए जाएंगे।

नई जिम्मेदारी, पुरानी गड़बड़ियों की विरासत

नए कुलपति के सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्वविद्यालय की बिगड़ी छवि को सुधारने की होगी। प्रशासनिक पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और शैक्षणिक गुणवत्ता को पटरी पर लाना आसान नहीं होगा।

चार साल का कार्यकाल, लेकिन उम्मीदें लंबी

अधिसूचना के मुताबिक कुलपति की नियुक्ति आरजीपीवी अधिनियम 1998 के तहत गठित चयन समिति की अनुशंसा पर राज्यपाल द्वारा की जाएगी। कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से चार वर्ष का होगा।

उच्च योग्यता के साथ दाग रहित छवि जरूरी

कुलपति विश्वविद्यालय का सर्वोच्च शैक्षणिक और प्रशासनिक अधिकारी होगा। इसलिए अभ्यर्थी से न सिर्फ उच्च शैक्षणिक योग्यता और प्रशासनिक अनुभव, बल्कि बेदाग छवि, नैतिकता और संस्थागत प्रतिबद्धता की अपेक्षा की गई है।

दो चरणों में आवेदन, सख्त शर्तें लागू

आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य है। दूसरे चरण में सभी दस्तावेजों के साथ आवेदन की हार्ड कॉपी राजभवन भेजनी होगी।

जांच-मुक्त होने की घोषणा अनिवार्य

उम्मीदवार को यह घोषणा देना होगी कि उसके खिलाफ लोकायुक्त, आर्थिक अपराध शाखा या किसी अन्य एजेंसी में कोई मामला लंबित नहीं है। सेवा में कार्यरत अभ्यर्थियों को विभागीय जांच न होने का प्रमाण पत्र भी देना होगा।

बिना ऑनलाइन आवेदन, सीधे बाहर

राजभवन ने स्पष्ट किया है कि बिना ऑनलाइन आवेदन के प्राप्त किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। चयन प्रक्रिया को पूरी तरह नियमबद्ध और नियंत्रित रखा जाएगा।

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