सत्ता के संरक्षण में आरोपी! फर्जी बीमा घोटाले में घिरे रोहित खटवानी के साथ मंच साझा करते दिखे मंत्री
Neel Tiwari | Apr 08, 2026, 13:54 IST
rohit khatwani eow fraud case minister rakesh singh
जबलपुर में फर्जी बीमा और वाहन रजिस्ट्रेशन घोटाले का मुख्य आरोपी खुलेआम घूम रहा है। जिला अदालत से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद भी EOW उसे नहीं पकड़ रही है।
News In Short
- EOW जांच में रोहित खटवानी और उसके सहयोगियों पर आरोप सिद्ध हुए।
- लोअर कोर्ट से खटवानी की अग्रिम जमानत खारिज दी है।
- आरोपी मंत्री और महापौर के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखा है।
- चार्जशीट के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई। एजेंसी पर भी मिलीभगत के आरोप लगे हैं।
- रोहित खटवानी बाहर रहकर गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है।
News In Detail
इस बीच मंत्री के साथ मंच साझा करने की तस्वीरें सामने आई हैं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्रवाई ठंडी पड़ गई है?
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मंत्री के साथ मंच पर आरोपी, तस्वीरों ने खड़े किए सवाल
आरोपी खुलेआम सोशल मीडिया पर अपने राजनीतिक रसूख का दिखावा कर रहा है। एक ई-स्कूटर शोरूम के उद्घाटन कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह उसके साथ दीप प्रज्वलन करते नजर आए।
यह महज औपचारिक उपस्थिति नहीं थी, बल्कि कार्यक्रम के दौरान खटवानी लगातार मंत्री के साथ मौजूद रहा था। इससे पहले भी शहर के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू उसके शोरूम के कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में अब आरोपी के राजनीतिक संबंधों और रसूख को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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क्या था मामला: मौत के बाद खुला फर्जी बीमा का खेल
इससे मृतक के परिवार को बीमा लाभ नहीं मिल सका था। यही नहीं जांच में यह भी पाया गया कि एक ही वाहन के लिए अलग-अलग दस्तावेज तैयार किए गए और तारीखों में जानबूझकर हेराफेरी की गई थी।
फर्जीवाड़े का पूरा सिस्टम उजागर
फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त की गई हार्ड डिस्क को CFSL भेजा गया था। इससे यह सामने आया कि ‘Madan Mahal Invoice 19-20.xlsx’ जैसी फाइलों के जरिए वाहन की जानकारी और तारीखों को बदला जा सकता था।
इसके अलावा इंश्योरेंस के एडिटेबल वर्ड फॉर्मेट भी मिले जिनका उपयोग फर्जी बीमा दस्तावेज बनाने में किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार किए गए थे।
सरकारी राजस्व की भी चोरी
यह केवल एक केस नहीं था बल्कि रानी मिश्रा समेत अन्य ग्राहकों के मामलों में भी इसी तरह की गड़बड़ी पाई गई थी। इससे यह साफ हो गया कि यह एक संगठित और सुनियोजित धोखाधड़ी थी।
चार्जशीट के बाद भी नहीं हुई गिरफ्तारी
जबकि कानूनी रूप से संज्ञेय अपराध में FIR के बाद ही गिरफ्तारी की जा सकती थी। लोअर कोर्ट ने अग्रिम जमानत खारिज कर दी, फिर भी आरोपी खुलेआम घूम रहा है और हाईकोर्ट में तारीख पर तारीख ले रहा है।
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हाईकोर्ट में तारीखों का खेल
कोर्ट ने टिप्पणी की कि इससे यह प्रतीत होता है कि, आवेदक खुद मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। इसके बाद अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 तय की गई है। इस दौरान EOW ने आरोपी को खुली छूट दे रखी है कि वह बाहर रहकर साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
EOW द्वारा तुरंत की जानी चाहिए आरोपी की गिरफ्तारी
उन्होंने बताया कि EOW को आरोपी को तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए। जब हमने उनसे पूछा कि EOW की ओर से या बहाना बनाया जाता है कि उनके पास लॉकअप नहीं है।
इस पर अधिवक्ता ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर जज के सामने पेश करने के बाद ज्यूडिशल कस्टडी की मांग की जा सकती है। इसके बाद ईओडब्ल्यू को यदि कोई पूछताछ करनी होगी, तो वह जेल जाकर आरोपी से पूछताछ करेंगे।
EOW के द्वारा आरोपी को गिरफ्तार न करने को उन्होंने सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन और आरोपी से मिली भगत होना बताया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें लोकायुक्तियां या ईओडब्ल्यू जैसी एजेंसियों ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया है।
रोहित खटवानी के मामले में ऐसा न होने पर यह साफ नजर आ रहा है कि ईओडब्ल्यू के ऊपर दबाव है। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि जब आरोपी को सजा ही नहीं दिलानी है, तो फिर EOW द्वारा FIR और जांच करने की कवायत ही क्यों की जाती है।
EOW के अस्तित्व पर खड़ा सवाल
जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद भी आरोपी खुलेआम घूमेगा तो EOW जैसी एजेंसी के अस्तित्व में होने का फायदा ही क्या है।
मंत्री और जनप्रतिनिधियों के साथ आरोपी की नजदीकियां, लोअर कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होना और गिरफ्तारी न होना, ये सभी इस ओर इशारा करते हैं कि कहीं न कहीं सिस्टम दबाव में है।
इस पूरे दबाव का फायदा आरोपी को मिलेगा। वह पूरी जांच को प्रभावित करेगा। अब यह मामला केवल एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और न्याय व्यवस्था की साख का मुद्दा बन चुका है।
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