RTI की कीमत इतनी भारी क्यों? दतिया में सूचना मांगने पर मांगे गए 1.66 लाख, फिर शुरू हुआ ‘जानकारी बनाम व्यवस्था’ का विवाद

Ramanand Tiwari | May 13, 2026, 23:04 IST
Share
rti-fee-dispute-datia-information-access-controversy
Photograph: (the sootr)

मध्य प्रदेश के दतिया में RTI के बदले 1.66 लाख रुपए मांगने पर बवाल। वकील और अफसर के बीच तीखी बहस का वीडियो वायरल। क्या सूचना छिपाने की है ये साजिश?

मध्य प्रदेश के दतिया में सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग में एक RTI आवेदन के जवाब में 1 लाख 66 हजार रुपए की फीस मांगे जाने के बाद विवाद इतना बढ़ गया कि मामला बहस, आरोप और वायरल वीडियो तक पहुंच गया।

पूरा घटनाक्रम अब सिर्फ एक RTI आवेदन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे “सूचना रोकने की प्रशासनिक रणनीति” के तौर पर भी देखा जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

दतिया के अधिवक्ता शंभू गोस्वामी ने आंगनबाड़ी व्यवस्था और विभागीय अनियमितताओं को लेकर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। आवेदन के जवाब में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से करीब 1.66 लाख रुपए जमा करने का नोटिस भेजा गया। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।

अधिवक्ता का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम इसलिए मांगी गई ताकि आवेदक खुद पीछे हट जाए और विभाग को जानकारी सार्वजनिक न करनी पड़े।

यह खबरें भी पढ़ें...

सत्ता का रिपोर्ट कार्ड ऑपरेशन शुरू! MP में मंत्री कुर्सियों पर मंथन तेज, संगठन ने लगा दी अंतिम मुहर

जौरा की ‘भाजपा नेत्री’ निकली हनी ट्रैप गैंग की मास्टरमाइंड, कई कारोबारी बने शिकार; FIR के बाद फरार

सबसे बड़ा सवाल: इतनी फीस आखिर किस बात की?

विवाद सिर्फ रकम को लेकर नहीं है। आवेदक का कहना है कि विभाग ने यह स्पष्ट ही नहीं किया कि इतनी राशि किस आधार पर तय की गई। न दस्तावेजों की संख्या बताई गई और न ही भुगतान का स्पष्ट तरीका। यानी सूचना देने से पहले प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई। RTI एक्ट पारदर्शिता के लिए बनाया गया था, लेकिन यहां मामला “सूचना की पहुंच” बनाम “प्रशासनिक दीवार” जैसा दिखाई देने लगा।

नकद लेकर दफ्तर पहुंचा वकील, फिर बढ़ गई तनातनी

सोमवार को अधिवक्ता शंभू गोस्वामी 1.66 लाख रुपए नकद लेकर सीधे जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने कर्मचारियों से राशि जमा कर जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की। लेकिन कर्मचारियों ने नकद लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद माहौल गर्म हो गया। बताया जा रहा है कि जब दस्तावेजों के अवलोकन की मांग भी नहीं मानी गई, तब अधिवक्ता और DPO अरविंद उपाध्याय के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

कॉलर पकड़ने वाला वीडियो वायरल

घटनास्थल का वीडियो अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में DPO अरविंद उपाध्याय अपनी कुर्सी से उठकर अधिवक्ता के सामने आते दिखाई देते हैं। इसी दौरान वे अपना कॉलर आगे बढ़ाते हुए कहते नजर आते हैं कि “पकड़ो कॉलर।” इसके बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोग इसे सरकारी तंत्र की कार्यशैली और जवाबदेही से जोड़कर देख रहे हैं।

भ्रष्टाचार छिपाने के आरोप भी लगे

अधिवक्ता शंभू गोस्वामी ने आरोप लगाया कि विभाग सूचना देने से बच रहा है और अनियमितताओं को छिपाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि अगर विभाग पारदर्शी है तो फिर इतनी बड़ी फीस और अस्पष्ट प्रक्रिया की जरूरत क्यों पड़ी? हालांकि, विभाग की ओर से अब तक इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

सिर्फ दतिया का मामला नहीं, सिस्टम पर बड़ा सवाल

प्रशासनिक स्तर पर सूचना रोकने या प्रक्रिया को जटिल बनाने के आरोप पहले भी कई बार सामने आते रहे हैं। अक्सर RTI आवेदकों को लंबी प्रक्रिया, तकनीकी कारणों या भारी दस्तावेज शुल्क के जरिए उलझाने की शिकायतें मिलती रही हैं। लेकिन अधिकतर मामले चर्चा में नहीं आ पाते। दतिया का मामला इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि यहां विवाद कैमरे में कैद हो गया और सोशल मीडिया तक पहुंच गया।

मामले की मुख्य बातें

  • दतिया के महिला एवं बाल विकास विभाग का मामला
  • RTI आवेदन पर मांगे गए 1.66 लाख रुपए
  • अधिवक्ता ने अनियमितताओं की जानकारी मांगी थी
  • नकद राशि लेकर कार्यालय पहुंचे आवेदक
  • फीस जमा न होने पर विवाद बढ़ा
  • DPO और अधिवक्ता के बीच तीखी बहस
  • कॉलर पकड़ने वाला वीडियो वायरल
  • सूचना छिपाने और भ्रष्टाचार बचाने के आरोप
  • विभाग की ओर से अब तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
यह खबरें भी पढ़ें...

एमपी में बदले सर्विस नियम: अब दो से ज्यादा बच्चों पर नहीं जाएगी नौकरी, जानें पूरी डिटेल

एमपी सरकार फिर ले रही 1800 करोड़ का लोन, कुल कर्ज पहुंचा 4.14 लाख करोड़ के पार

डिजिटल दौर में अब ‘सूचना विवाद’ भी सार्वजनिक

पहले ऐसे विवाद दफ्तरों तक सीमित रह जाते थे। लेकिन अब मोबाइल कैमरा और सोशल मीडिया के दौर में हर बहस सार्वजनिक हो रही है। दतिया का यह मामला भी सरकारी पारदर्शिता, RTI व्यवस्था और सूचना तक आम आदमी की पहुंच पर नई बहस छेड़ रहा है।



Tags:
  • सोशल मीडिया
  • महिला एवं बाल विकास विभाग
  • RTI
  • जिला कार्यक्रम अधिकारी
  • सूचना के अधिकार
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा