पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा केस: ED रिपोर्ट में लोकायुक्त पर उठे सवाल, चूक से मिली थी डिफॉल्ट जमानत

Amresh Kushwaha | May 07, 2026, 13:15 IST
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saurabh sharma rto default bail ed report lokayukta
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भोपाल के पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा को लोकायुक्त की चूक से डिफॉल्ट जमानत मिली है। ED की वार्षिक रिपोर्ट में 108 करोड़ की आपराधिक आय का खुलासा हुआ है। हाईकोर्ट ने नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।

News In Short

  • भोपाल के पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा पर 108 करोड़ की काली कमाई का आरोप है।
  • लोकायुक्त पुलिस समय पर चार्जशीट नहीं दे सकी, इसलिए सौरभ को डिफॉल्ट जमानत मिली।
  • ईडी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में इस चूक का खुलासा किया है।
  • हाईकोर्ट ने बाद में सौरभ की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।
  • अभी पांच अलग-अलग सरकारी एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं।

News In Detail

लोकायुक्त की चूक, सौरभ को फायदा

भोपाल में आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी वार्षिक लीगल रिपोर्ट में साफ कहा है कि लोकायुक्त पुलिस ने तय समय सीमा में चार्जशीट दाखिल नहीं की। इसी वजह से सौरभ को 01 अप्रैल 2025 को डिफॉल्ट जमानत मिल गई थी।

यह खुलासा इसलिए अहम है क्योंकि यह दिखाता है कि जांच में देरी किस तरह आरोपी को कानूनी राहत दिला सकती है। हालांकि ईडी की सख्त कार्रवाई के चलते सौरभ जेल से बाहर नहीं निकल सका है।

हाईकोर्ट ने जमानत ठुकराई

सौरभ शर्मा ने भोपाल स्थित ईडी कार्यालय के जरिए 2024 में दर्ज ईसीआईआर के संबंध में नियमित जमानत की मांग की थी। सौरभ 10 फरवरी 2025 से हिरासत में है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 27 सितंबर 2025 को सौरभ की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि सौरभ पीएमएलए की धारा 45 की दोहरी शर्तें पूरी नहीं कर सका है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ईडी ने दोनों अनिवार्य शर्तों का पालन किया है।

108 करोड़ की आपराधिक आय

ईडी की वार्षिक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सौरभ ने शेल कंपनियों, असुरक्षित ऋणों और फर्जी वित्तीय लेनदेन के जरिए करीब 108 करोड़ रुपए की आपराधिक आय बनाई। इनकम के स्रोत छिपाकर पैसे इधर-उधर किए गए थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सौरभ ने फर्जी संस्थाओं और बिचौलियों का पूरा नेटवर्क खड़ा किया था। ऋणों, फर्जी कंपनियों और पारिवारिक बैंक खातों के जरिए धन का बड़े पैमाने पर हेरफेर हुआ है। सौरभ ने खुद इन सभी ऑपरेशन का प्रबंधन किया, जिससे उसकी सीधी आपराधिक संलिप्तता साबित होती है।

लोकायुक्त की FIR से शुरू हुआ था मामला

ईडी का यह केस लोकायुक्त की एफआईआर के बाद दर्ज हुआ था। लोकायुक्त के एसपीई (SPE - Special Police Establishment) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(B) के तहत मामला दर्ज किया था। आरोप था कि सौरभ ने अनुपात से अधिक संपत्ति अर्जित की।

17 दिसंबर 2024 को लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ के अरेरा कॉलोनी स्थित ठिकानों पर छापा मारा था। वहां से करोड़ों रुपए नकद और संपत्ति के दस्तावेज जब्त हुए थे। इसके बाद 18-19 दिसंबर की रात राजधानी के मेंडोरी इलाके में एक इनोवा कार से 51.8 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए थे। यह कार्रवाई आयकर विभाग ने की थी।

घर से क्या-क्या निकला

लोकायुक्त के छापे में सौरभ के घर से 2.95 करोड़ रुपए नकद मिले थे। दो क्विंटल चांदी की सिल्लियां, 10 किलो चांदी के जेवरात और 50 लाख रुपए का सोना भी बरामद हुआ था। नोट गिनने की सात मशीनें, दो लग्जरी कारें और करीब दो करोड़ रुपए का अन्य सामान जब्त हुआ था।

संपत्ति के दस्तावेजों में एक स्कूल, एक निर्माणाधीन बंगला और भोपाल, इंदौर व ग्वालियर सहित कई शहरों में प्रॉपर्टी के एग्रीमेंट मिले थे। तीन अलग-अलग बैंकों में खातों की जांच अभी भी जारी है।

पांच एजेंसियां एक साथ जांच में

इस मामले की जांच एक नहीं बल्कि पांच सरकारी एजेंसियां कर रही हैं। डीआरआई (DRI - Directorate of Revenue Intelligence) यह देख रही है कि जिस गाड़ी से 54 किलो सोना मिला, वह कानूनी तरीके से लिया गया था या नहीं।

आयकर विभाग जांच कर रहा है कि 54 किलो सोने का भुगतान किस तरह हुआ, क्योंकि दो लाख रुपए से ज्यादा का नकद भुगतान कानूनी रूप से नहीं किया जा सकता।

ईडी देख रही है कि अपराध से कमाए पैसे का ट्रेल कहां-कहां जाता है और किन-किन लोगों के नाम बेनामी संपत्ति है। लोकायुक्त इस बात की जांच कर रही है कि सात साल की नौकरी में सौरभ की तनख्वाह कितनी थी और उसने इस दौरान कितनी संपत्ति बनाई। पुलिस यह जांच कर रही है कि सौरभ ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए झूठा शपथपत्र दिया और बड़े भाई सतीश शर्मा की सरकारी नौकरी छिपाई।

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