सोम डिस्टिलरीज पर 575 करोड़ का बकाया, फिर भी धड़ल्ले से लिकर बिजनेस कर रही कंपनी
Amresh Kushwaha | Mar 25, 2026, 13:38 IST
som distilleries 575 crore loan default liquor license controversy
सोम डिस्टिलरीज पर MPSIDC का 575 करोड़ रुपए बकाया है। दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी वसूली नहीं हुई। आइए जानते हैं भ्रष्टाचार की पूरी कहानी...
News In Short
- सोम डिस्टिलरीज ने साल 1999 से 2001 के बीच कर्ज लिया था।
- ब्याज जुड़ने से अब यह बकाया 575 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।
- दिल्ली हाई कोर्ट ने 2013 में कंपनी बंद करने का आदेश दिया था।
- अफसरों पर कंपनी के साथ रिश्वत और मिलीभगत के गंभीर आरोप हैं।
- सरकारी नियमों के तहत अब शराब लाइसेंस रद्द करने की मांग उठी है।
News In Detail
एमपी में नियम स्पष्ट हैं कि किसी भी स्थिति में डिफॉल्टर कंपनी को लिकर बिजनेस नहीं करने दिया जाएगा। इसके बावजूद सोम का खेल धड़ल्ले से जारी है। राज्य का पैसा निजी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल हो रहा है। प्रशासन और कानून के सामने यह बड़ी चुनौती बन गई है।
ये है सोम के लोन का पूरा इतिहास
कर्ज की शुरुआती किश्तें इस प्रकार थीं:
- 24.11.1998: एक करोड़ रुपए की पहली किश्त।
- 13.01.1999: दो करोड़ रुपए की दूसरी किश्त।
- 09.08.1999: एक करोड़ रुपए की तीसरी किश्त।
- 11.01.2000: तीन करोड़ रुपए की चौथी किश्त।
बता दें कि साल 2011 में समझौते का एक मौका दिया गया था। तब 48 करोड़ के बदले सिर्फ सात करोड़ 98 लाख मांगे गए थे। कंपनी ने इस भारी छूट के बाद भी भुगतान नहीं किया। इससे कंपनी की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
कोर्ट का कड़ा रुख
कंपनी ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि कंपनी की दलीलों में दम नहीं है। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश अंतिम हो गया। कंपनी ने अपनी 2010 की बैलेंस शीट में कर्ज स्वीकारा था। वहां 10 करोड़ 97 लाख रुपए की देनदारी खुद कंपनी ने दिखाई थी। इसके बावजूद उन्होंने राज्य का पैसा वापस नहीं किया। यह व्यवहार पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना और संदिग्ध रहा है।
भ्रष्टाचार के आरोप
26 जुलाई 2017 की सुनवाई में संस्था के वकील गायब थे। वकील की जानबूझकर अनुपस्थिति के कारण कंपनी को स्टे मिला। शिकायत में एक करोड़ रुपए की रिश्वत का आरोप है। इस मिलीभगत से वसूली की प्रक्रिया पूरी तरह थम गई।
लाइसेंस पर लटकी तलवार
अब मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से इसकी शिकायत की गई है। कंपनी का शराब लाइसेंस तुरंत रद्द करने की मांग उठी है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त जांच की जरूरत है। प्रशासन को अब अपनी सख्ती दिखानी होगी। अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल 2026 की तारीख तय है। तब तक खजाने को भारी नुकसान होता रहेगा। राज्य को अब और इंतजार नहीं करना चाहिए।
देखें शिकायतकर्ता की चिट्ठी-
मुख्य संदर्भ:
- MPSIDC आधिकारिक शिकायत पत्र (24.03.2026)
- दिल्ली हाई कोर्ट आदेश संख्या 198/2008 (03.05.2013)
- सुप्रीम कोर्ट आदेश SLP 19834/2013 (26.09.2016)
- SDBL की वार्षिक बैलेंस शीट (31.03.2010)
FAQ
- सोम डिस्टिलरीज पर कुल कितना बकाया है?
30 नवंबर 2023 के आंकड़ों के अनुसार: कुल बकाया: 575.26 करोड़ रुपए। मूल राशि: लगभग 7 से 12 करोड़ रुपए। ब्याज दर: 18% से 21% (अनुबंध के अनुसार)।
सोम डिस्टिलरीज को हाईकोर्ट का करारा झटका, फर्जी परमिट कांड में 8 लाइसेंस निलंबन बरकरार
सोम डिस्टिलरी मामले में कोर्ट सख्त: एक्साइज कमिश्नर अभिजीत अग्रवाल की भूमिका पर उठाए सवाल
मदिरा टेंडर पर विवाद: तारीख बढ़ाकर सोम डिस्टिलरीज को फायदा पहुंचाने की आशंका
सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ी सोम डिस्टिलरी, हाईकोर्ट ने दिखाया कानून का आईना
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari