सोम डिस्टिलरीज को फिर हाईकोर्ट से बड़ा झटका! टेंडर से भी बाहर, राहत की उम्मीद टूटी
Neel Tiwari | Jun 29, 2026, 23:32 IST
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जबलपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सोम डिस्टिलरीज को शराब टेंडर में राहत देने से इनकार कर दिया। कंपनी के पास वैध डी-1 लाइसेंस नहीं है। तकनीकी बोली पहले ही खारिज हो चुकी थी। लाइसेंस नवीनीकरण का मामला अब सिंगल बेंच में सुना जाएगा।
समझें क्या है पूरा मामला
- सोम डिस्टिलरीज की टेंडर में राहत मांगने वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की।
- कोर्ट ने माना कि कंपनी के पास वर्तमान में वैध डी-1 लाइसेंस नहीं है।
- तकनीकी बोली पहले ही खारिज हो चुकी, इसलिए वित्तीय बोली पर विचार नहीं होगा।
- लाइसेंस नवीनीकरण रद्द करने वाले आदेश की सुनवाई अब सिंगल बेंच करेगी।
- डिवीजन बेंच ने टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप से साफ इनकार कर दिया।
टेंडर में राहत की मांग पर हाईकोर्ट ने लगाया विराम
कंपनी का कहना था कि उसे टेंडर प्रक्रिया से बाहर करने के उद्देश्य से जानबूझकर लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन खारिज किया गया, लेकिन डिवीजन बेंच ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और टेंडर से जुड़ी राहत देने से इनकार कर दिया।
लाइसेंस नहीं तो टेंडर में भागीदारी भी नहीं
ऐसे में कंपनी टेंडर प्रक्रिया में बने रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं रखती। कोर्ट ने भी इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि बिना वैध लाइसेंस के कंपनी को किसी प्रकार की अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती।
तकनीकी बोली पहले ही हो चुकी थी खारिज
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तकनीकी स्तर पर ही कंपनी अयोग्य घोषित हो चुकी है तो टेंडर प्रक्रिया में उसे बनाए रखने का कोई आधार नहीं बनता।
कंपनी ने लगाए थे पूर्वाग्रह और जल्दबाजी के आरोप
कंपनी का कहना था कि इतना विस्तृत आदेश इतनी कम अवधि में पारित होना इस बात का संकेत है कि निर्णय पहले से तय था और उसे शराब टेंडर से बाहर करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई।
सरकार ने बताया क्यों खारिज किया नवीनीकरण आवेदन
इन सभी बिंदुओं पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और कंपनी को जवाब देने का पूरा अवसर दिया गया, जिसके बाद ही विस्तृत आदेश पारित किया गया।
पुराने आपराधिक मामले का भी रहा उल्लेख
कंपनी का दावा था कि वे लोग उसके कर्मचारी नहीं थे और न ही कंपनी अथवा उसके निदेशक उस आपराधिक मामले में आरोपी थे। इसके बावजूद आबकारी विभाग ने इस पूरे मामले को लाइसेंस नवीनीकरण पर विचार करते समय महत्वपूर्ण माना।
अब सिंगल बेंच में होगी अगली कानूनी लड़ाई
कोर्ट ने कहा कि इस हिस्से की सुनवाई सिंगल बेंच के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए अब वही इस विवाद पर आगे फैसला करेगी। यानी टेंडर में राहत का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है, लेकिन लाइसेंस नवीनीकरण को लेकर कंपनी की कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी।
आखिर देशी शराब के D1 लाइसेंस के लिए क्यों परेशान हुआ सोम
आम भाषा में यदि कहें तो हर प्रकार की शराब के निर्माण में यह स्प्रिट इस्तेमाल होता है। आयुक्त के द्वारा दी गई इस जानकारी के आधार पर यह अनुमान लगाना गलत नहीं होगा कि सोम ने शराब बनाने के बेस प्रोडक्ट के लाइसेंस पर जोर केवल इसलिए दिया था ताकि वह मध्य प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों के शराब कारोबार पर दबदबा बना सके।
यदि उसे शराब का बेस प्रोडक्ट बनाने का लाइसेंस मिल जाता तो परोक्ष रूप से भी वह शराब के व्यापार को कंट्रोल करने में सक्षम था। आपको बता दें कि इस स्प्रिट का इस्तेमाल सिर्फ शराब में नहीं बल्कि मेडिकल फील्ड में भी बड़े पैमाने में होता है और इसका प्रयोग हमने कोविड के समय सैनिटाइजर में भी देखा है। तो इस तरह से सोम की यह एक बड़ी चाल थी जो हाईकोर्ट में फेल हो गई है।
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