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पांच पॉइंट में समझें पूरा मामला
- भोपाल में दे हजार से ज्यादा भावी शिक्षक DPI और जनजातीय कार्य विभाग का घेराव कर रहे हैं।
- शिक्षक भर्ती में हजारों पद रिक्त होने के बावजूद घोषित सीटें बेहद कम हैं।
- प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इससे शिक्षा गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
- उनकी मुख्य मांगों में पदों की संख्या बढ़ाना और द्वितीय काउंसिलिंग शुरू करना शामिल है।
- प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन अनिश्चितकालीन हो सकता है।
भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक की भारी कमी और चयन परीक्षाओं में कम पद घोषित किए जाने के खिलाफ मंगलवार 6 जनवरी को भोपाल में अभ्यर्थियों का बड़ा आंदोलन हुआ है।
प्रदेशभर से लगभग दो हजार भावी शिक्षक राजधानी पहुंचे। ये लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और जनजातीय कार्य विभाग का संयुक्त घेराव करने पहंचे। हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए अभ्यर्थियों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है।
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अभ्यर्थियों क्या आरोप लगा रहे हैं?
अभ्यर्थियों का कहना है कि हजारों पद खाली होने के बावजूद शिक्षक भर्ती में घोषित सीटें बहुत कम हैं। इससे योग्य उम्मीदवार बाहर हो रहे हैं, और स्कूलों में शिक्षण की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि पदों की कमी की वजह से शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात सही से काम नहीं कर पा रहा है, जो नई शिक्षा नीति-2020 (New Education Policy-2020) के उद्देश्य के खिलाफ है।
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अभ्यर्थियों ने सरकार को दी चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन और भूख हड़ताल जैसे चरणों में बदल दिया जाएगा। यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं को न्याय दिलाने की मांग को लेकर किया जा रहा है।
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प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें क्या है?
अभ्यर्थियों का कहना है कि मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित माध्यमिक शिक्षक चयन परीक्षा और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाई जाए। साथ ही उनका यह भी कहना है कि विभाग द्वारा घोषित पदों की संख्या वास्तविक जरूरतों से बहुत कम है।
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EWS और OBC वर्ग में शून्य पदों का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने जनजातीय कार्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई विषयों में EWS और OBC वर्ग के लिए शून्य पद दिखाए गए हैं, जिससे इन वर्गों के युवाओं में गहरी निराशा है। यह स्थिति सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है, और इससे आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
शिक्षकों की कमी का असर
शिक्षक संगठनों का कहना है कि पदों की कमी का सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को हो रहा है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं, जिससे शिक्षण गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और परीक्षा परिणाम पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें:
शिक्षक भर्ती (वर्ग-2) के सभी विषयों में कम से कम 3-3 हजार पदों की वृद्धि।
प्राथमिक शिक्षक भर्ती (वर्ग-3) में पदों की संख्या बढ़ाकर 25 हजार करना।
द्वितीय काउंसिलिंग जल्द शुरू करने की मांग।
जब तक शिक्षक भर्ती 2025 पद वृद्धि के साथ पूरी नहीं हो जाती, तब तक नई पात्रता परीक्षा आयोजित न की जाए।
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