टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय का संकल्प बन गया ग्रामीणों का समाधान
Amresh Kushwaha | Feb 15, 2026, 14:51 IST
tikamgarh collector vivek shrotriya sankalp se samadhan revenue cases relief
टीकमगढ़ जिले में कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय के संकल्प से समाधान अभियान ने प्रशासन के मानवीय पहलू को उजागर किया है। इस अभियान ने न केवल ग्रामीणों की राजस्व संबंधित समस्याओं को चुटकियों में हल करने में मदद की है। इनका समाधान कई सालों में नहीं हो पाया था…
कहते हैं सौ कहीं और, एक लिखी… इस एक लिखी के फेर में हर गांव-शहर के लोग सालों साल परेशान रहते हैं। कभी पटवारी कागजों पर गलत कलम चला देते हैं, तो कभी सही कलम सही करने के लिए "आज-कल", "आज-कल" में सालों निकाल देते हैं। कलम की इसी गड़बड़ी को टीकमगढ़ जिले में कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने संकल्प लेकर समाधान में बदल दिया। और अपने इस नवाचार को नाम दिया है- “संकल्प से समाधान”
दरअसल, टीकमगढ़ जिले के ग्रामीण इलाकों में विशेषकर मोहनगढ़ और दिगोड़ा तहसीलों में कुछ साल पहले राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी की समस्या सामने आई थी। 2011 से 2014 के बीच, कंप्यूटराइजेशन के दौरान कई गलतियां हो गईं। इनमें सबसे सामान्य गलती यह थी कि कई व्यक्तियों के नाम गलत दर्ज कर दिए गए थे।
उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति का नाम "मुन्ना" से "मुन्नी" कर दिया गया था। इसके अलावा, कुछ लोगों के नाम में उनके पिता के नाम की जगह कुछ और दर्ज कर दिया गया था। कई मामलों में भूमि का रकबा भी गलत दर्ज किया गया था।
इन गलतियों के कारण, जब लोगों को अपनी संपत्ति का नामांतरण या रजिस्ट्री करनी होती थी, तो वे आसानी से यह नहीं कर पा रहे थे। जैसे-जैसे यह गलतियां बढ़ती गईं, ग्रामीणों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ने लगे।
वे अपने मामलों को हल करने के लिए तहसीलदार, पटवारी और अन्य अधिकारियों के पास जाते, लेकिन हर बार उन्हें नई समस्याओं का सामना करना पड़ता। इसके कारण न सिर्फ ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा, बल्कि उनका समय भी बर्बाद होने लगा।
अभी इन समस्याओं को दूर करने का अधिकार भू-राजस्व संहिता में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को दिया गया है। अनुविभागीय अधिकारी तहसीलदार से रिपोर्ट लेता है और तहसीलदार पटवारी से। अगर 5 साल से ज्यादा पुराना केस हो तो कलेक्टर की अनुमति लगती है। ऐसे में इस दफ्तर से उस दफ्तर के फेर में हाजिरी लगाते-लगाते ग्रामीणों की चप्पलें घिस जाती हैं।
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने इस समस्या को गंभीरता से लिया और इसका समाधान खोजने के लिए एक अभिनव कदम उठाया। उन्होंने "संकल्प से समाधान" अभियान के तहत मोहनगढ़ और दिगोड़ा में विशेष कैम्प आयोजित किए। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की राजस्व संबंधी समस्याओं का त्वरित और एक ही दिन में समाधान करना था। कलेक्टर के नेतृत्व में इन कैम्पों में प्रशासन के विभिन्न अधिकारियों की टीम जुटी थी।
इस विशेष जनसुनवाई में कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय, अनुविभागीय अधिकारी संजय दुबे और तहसीलदार रमेश परमार ने मिलकर एक ही जगह पर कोर्ट का आयोजन किया। एक ही दिन में पटवारी, तहसीलदार और कलेक्टर से संबंधित सभी रिपोर्ट ली गईं और मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया गया।
इसके अलावा, कलेक्टर ने उन मामलों को तत्काल पारित करने के लिए अनुमतियां दीं, जो 5 साल से ज्यादा पुराने थे, ताकि प्रशासन की कार्यप्रणाली में कोई रुकावट न आए।
इस पहल का मुख्य आकर्षण यह था कि एक ही दिन में 129 प्रकरणों का निवारण किया गया, जिनमें से 52 मामले मोहनगढ़ में और 77 मामले दिगोड़ा में हल किए गए। कलेक्टर ने व्यक्तिगत रूप से इन मामलों की सुनवाई की और सभी प्रकरणों का समाधान उसी दिन दिया।
इस अभियान में आईएएस विवेक श्रोत्रिय ने जो पहल की, वह एक मानवीय दृष्टिकोण का प्रतीक बन गई। प्रशासन का काम सिर्फ कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे जनता की वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए तत्पर रहना चाहिए। कलेक्टर श्रोत्रिय ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रशासन सिर्फ एक मशीन की तरह काम नहीं करता, बल्कि वह समाज की भलाई के लिए एक सक्रिय भागीदार बन सकता है।
इस कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने कलेक्टर और प्रशासन की पहल की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कदम उनके लिए एक लंबे समय से प्रतीक्षित राहत लेकर आया है। अब तक, वे बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे और हर बार नकारात्मक जवाब मिल रहा था। लेकिन इस विशेष पहल ने उनकी उम्मीदों को नया जीवन दिया। कई ग्रामीणों ने यह कहा कि इससे यह स्पष्ट संदेश मिला है कि प्रशासन न केवल जनता के करीब है, बल्कि उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध भी है।
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने अभियान के अंतर्गत यह भी कहा कि उनका लक्ष्य 31 मार्च तक जिले में सभी लंबित राजस्व सुधार प्रकरणों का समाधान करना है। उनका मानना था कि यदि प्रशासन इस प्रकार की पहल करता रहे, तो न केवल ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि सरकारी सिस्टम पर जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय की यह पहल प्रशासन के मानवीय पहलू को उजागर करने वाली एक उत्कृष्ट मिसाल है। यह दिखाता है कि जब प्रशासन अपनी कार्यप्रणाली को जनता की जरूरतों और समस्याओं के अनुसार ढालता है, तो उसका असर न केवल कानूनी व्यवस्था पर, बल्कि समाज पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।
कलेक्टर श्रोत्रिय के प्रयासों ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रशासन सिर्फ कानून लागू करने का काम नहीं करता, बल्कि यह जनता के लिए एक सहायक और संवेदनशील संस्थान हो सकता है, जो उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
लोक अदालत से यह इस तरह अलग है कि, लोक अदालत में एक कोर्ट एक आदमी को सुनता है। रिकॉर्ड सुधार में एक फैसले के लिए तीन कोर्ट फाइल घूमती हैं। बस, मैंने तीनों कोर्ट एक साथ एक ही दिन लगवा दी।
-विवेक श्रोत्रिय, टीकमगढ़ कलेक्टर
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दरअसल, टीकमगढ़ जिले के ग्रामीण इलाकों में विशेषकर मोहनगढ़ और दिगोड़ा तहसीलों में कुछ साल पहले राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी की समस्या सामने आई थी। 2011 से 2014 के बीच, कंप्यूटराइजेशन के दौरान कई गलतियां हो गईं। इनमें सबसे सामान्य गलती यह थी कि कई व्यक्तियों के नाम गलत दर्ज कर दिए गए थे।
उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति का नाम "मुन्ना" से "मुन्नी" कर दिया गया था। इसके अलावा, कुछ लोगों के नाम में उनके पिता के नाम की जगह कुछ और दर्ज कर दिया गया था। कई मामलों में भूमि का रकबा भी गलत दर्ज किया गया था।
इन गलतियों के कारण, जब लोगों को अपनी संपत्ति का नामांतरण या रजिस्ट्री करनी होती थी, तो वे आसानी से यह नहीं कर पा रहे थे। जैसे-जैसे यह गलतियां बढ़ती गईं, ग्रामीणों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ने लगे।
वे अपने मामलों को हल करने के लिए तहसीलदार, पटवारी और अन्य अधिकारियों के पास जाते, लेकिन हर बार उन्हें नई समस्याओं का सामना करना पड़ता। इसके कारण न सिर्फ ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा, बल्कि उनका समय भी बर्बाद होने लगा।
एक समस्या- तीन अफसर…
और एक संकल्प ऐसे बन गया समाधान
इस विशेष जनसुनवाई में कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय, अनुविभागीय अधिकारी संजय दुबे और तहसीलदार रमेश परमार ने मिलकर एक ही जगह पर कोर्ट का आयोजन किया। एक ही दिन में पटवारी, तहसीलदार और कलेक्टर से संबंधित सभी रिपोर्ट ली गईं और मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया गया।
इसके अलावा, कलेक्टर ने उन मामलों को तत्काल पारित करने के लिए अनुमतियां दीं, जो 5 साल से ज्यादा पुराने थे, ताकि प्रशासन की कार्यप्रणाली में कोई रुकावट न आए।
इस पहल का मुख्य आकर्षण यह था कि एक ही दिन में 129 प्रकरणों का निवारण किया गया, जिनमें से 52 मामले मोहनगढ़ में और 77 मामले दिगोड़ा में हल किए गए। कलेक्टर ने व्यक्तिगत रूप से इन मामलों की सुनवाई की और सभी प्रकरणों का समाधान उसी दिन दिया।
मानवीय पहल और प्रशासन की सक्रियता
सालों की समस्या एक दिन में समाधान
लक्ष्य और भविष्य
निष्कर्ष
कलेक्टर श्रोत्रिय के प्रयासों ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रशासन सिर्फ कानून लागू करने का काम नहीं करता, बल्कि यह जनता के लिए एक सहायक और संवेदनशील संस्थान हो सकता है, जो उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
वर्जन
-विवेक श्रोत्रिय, टीकमगढ़ कलेक्टर
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