आदिवासी धर्म कोड का मुद्दा फिर गरमाया, उमंग सिंघार ने कहा- आदिवासी एकजुट होकर आवाज उठाएं
Pawan Modiya | Mar 09, 2026, 20:35 IST
Photograph: (the sootr)
आदिवासी धर्म कोड को लेकर उमंग सिंघार ने अमरकंटक में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि आदिवासी समाज अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए संगठित होकर आवाज उठाए।
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आदिवासी धर्म कोड (Tribal Religion Code) का मुद्दा चर्चा में आ गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार (Umang Singhar) ने अनूपपुर जिले के अमरकंटक (Amarkantak) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि देशभर का आदिवासी समाज (Tribal Community) अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए संगठित होकर आवाज उठाए। सिंघार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अभी आदिवासी समाज ने बड़ी संख्या में अलग धर्म कोड की मांग (Separate Religion Code Demand) का समर्थन नहीं किया, तो भविष्य में उनकी धार्मिक पहचान किसी अन्य धर्म की श्रेणी में दर्ज हो सकती है।
अनूपपुर जिले के अमरकंटक में आयोजित कार्यक्रम में उमंग सिंघार ने कहा कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश के अन्य राज्यों में रहने वाले आदिवासियों को इस मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मांग नहीं बल्कि आदिवासी अस्मिता (Tribal Identity) और संस्कृति को बचाने की लड़ाई है।
सिंघार ने कहा कि यदि आदिवासी समाज समय रहते इस मुद्दे पर संगठित नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में उनकी पहचान कमजोर पड़ सकती है।
उमंग सिंघार ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति (Tribal Culture) प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई है। आदिवासी समुदाय सदियों से जंगल, पहाड़ और नदियों के साथ सामंजस्य में जीवन जीता आया है। उनकी धार्मिक मान्यताएं और पूजा पद्धति भी प्रकृति से ही जुड़ी होती हैं।
सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी परम्पराएं, आस्था और सामाजिक व्यवस्था है, इसलिए उन्हें किसी अन्य धर्म के दायरे में रखना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अलग धर्म कोड (Separate Religion Code) मिलने से आदिवासी समुदाय को संवैधानिक पहचान मिल सकती है।
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उमंग सिंघार ने आदिवासी समाज से अपील की कि वे बड़ी संख्या में फॉर्म भरकर अपनी मांग राष्ट्रपति (President of India) तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि यदि देशभर के आदिवासी संगठित होकर यह मांग उठाएंगे, तो सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। उन्होंने युवाओं से भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए आदिवासी संस्कृति (Tribal Culture) और परंपराएं सुरक्षित रह सकें।
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आदिवासी धर्म कोड (Tribal Religion Code) एक ऐसी मांग है जिसमें आदिवासी समुदाय के लिए जनगणना और सरकारी रिकॉर्ड में अलग धर्म श्रेणी बनाने की मांग की जाती है।
इस मांग के प्रमुख उद्देश्य:
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि देशभर का आदिवासी समाज (Tribal Community) अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए संगठित होकर आवाज उठाए। सिंघार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अभी आदिवासी समाज ने बड़ी संख्या में अलग धर्म कोड की मांग (Separate Religion Code Demand) का समर्थन नहीं किया, तो भविष्य में उनकी धार्मिक पहचान किसी अन्य धर्म की श्रेणी में दर्ज हो सकती है।
अमरकंटक में दिया बड़ा बयान
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मांग नहीं बल्कि आदिवासी अस्मिता (Tribal Identity) और संस्कृति को बचाने की लड़ाई है।
सिंघार ने कहा कि यदि आदिवासी समाज समय रहते इस मुद्दे पर संगठित नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में उनकी पहचान कमजोर पड़ सकती है।
समय आ गया है कि हम सभी आदिवासी एकजुट हों। यदि अभी मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के आदिवासी समाज ने अपने अलग धर्म कोड की मांग के लिए अधिक से अधिक आवेदन नहीं भेजे, तो हमारी पहचान को किसी अन्य धर्म की श्रेणी में दर्ज कर दिया जाएगा।
मैं अपने सभी आदिवासी भाई-बहनों से आग्रह… pic.twitter.com/W9nP34M4fi
— Umang Singhar (@UmangSinghar) March 9, 2026
आदिवासी समाज की अलग संस्कृति और आस्था
सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी परम्पराएं, आस्था और सामाजिक व्यवस्था है, इसलिए उन्हें किसी अन्य धर्म के दायरे में रखना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अलग धर्म कोड (Separate Religion Code) मिलने से आदिवासी समुदाय को संवैधानिक पहचान मिल सकती है।
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बड़ी संख्या में आवेदन भेजने की अपील
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क्या है आदिवासी धर्म कोड
इस मांग के प्रमुख उद्देश्य:
- आदिवासी संस्कृति की अलग पहचान
- धार्मिक परंपराओं को संवैधानिक मान्यता
- जनगणना में अलग धार्मिक श्रेणी
- सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा
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