यशवंत क्लब में चुनाव के पहले सत्ता में बने रहने संविधान बदलने की तैयारी
Sanjay Gupta | Mar 01, 2026, 14:00 IST
yashwant club indore election 2026 constitution amendment controversy
मध्यप्रदेश के सबसे बड़े क्लब यशवंत क्लब की मैनेजिंग कमेटी के जून माह में होने वाले चुनाव के पहले बड़ा पावर गेम शुरू हो गया है। इसके लिए क्लब के सालों पुराने संविधान को बदलने की तैयारी है।
INDREO. यशवंत क्लब की मैनेजिंग कमेटी की द्विवार्षिक चुनाव जून 2026 के अंत में है। क्लब संविधान के मुताबिक कोई भी पदाधिकारी लगातार दो टर्म तक (यानी चार साल तक) पद पर बने रह सकता है। इसके बाद उसे एक बार ब्रेक देना होता है और फिर वह चुनाव लड़ सकता है।
वर्तमान मैनेजिंग कमेटी चेयरमैन मनजीत सचदेवा (टोनी) और सचिव संजय गोरानी दो बार लगातार चुनाव जीत चुके हैं। साथ ही, कार्यकाल जून में खत्म हो रहा है। इसके पहले अब मैनेजिंग कमेटी संविधान को बदलने के लिए नया प्रस्ताव लेकर आ रही है। इसके लिए जल्द ईओजीएम (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग) बुलाई जा रही है।
इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें क्लब संविधान के रूल नंबर 42 को बदला जाएगा। इसके तहत अभी प्रावधान है कि चेयरमैन, सचिव, सह सचिव, कोषाध्यक्ष और कमेटी सदस्य (पांच होते हैं), वह चुनाव लड़ने के लिए पात्र होगा यदि वह लगातार दो टर्म पर नहीं हो। अब इसमें संशोधन कर प्रस्तावित किया जा रहा है कि चेयरमैन, सचिव, सह सचिव, कोषाध्यक्ष व कमेटी मेंबर वह फिर चुनाव के लिए योग्य होगा बिना किसी टर्म संबंधी प्रतिबंध के।
इस पूरे बदलाव को सत्ता में लगातार बने रहने की चाहत माना जा रहा है। इस बदलाव की तैयारी हो रही है, इसे द सूत्र ने पहले ही ब्रेक कर दिया था। इसके तहत मैनेजिंग कमेटी के सदस्य लगातार क्लब सदस्यों से बात करके उनका मन टटोल रहे थे और माहौल बना रहे थे।
इसके बाद कुछ सदस्यों के जरिए इस संबंध में कमेटी ने पत्र लिया और इस पत्र को आधार बनाकर अब ईओजीएम कॉल करने की तैयारी हो रही है। वहीं ईओजीएम पर भी मांग उठ रही है कि यह प्रस्ताव आता है तो क्योंकि संविधान का मामला है, तो इसमें गुप्त मतदान (बैलेटिंग) कर ही इस पर फैसला हो। अभी तक हाथ खड़े कर के फैसला किया जाता है, जिसमें गफलत होती है।
इसी माह यह प्रस्ताव पास कराना जरूरी है। कारण है कि इसी चुनाव में इसका फायदा लेते हुए मैनेजिंग कमेटी पदाधिकारियों को फिर से चुनाव लड़ना है। मार्च माह अंतिम है, इसके बाद पदाधिकारियों के हाथ में कुछ ही रहेगा क्योंकि वह केवल केयरटेकर की भूमिका में होंगे।
कारण है कि जून में चुनाव है। ऐसे में यह चुनाव के पहले जल्दबाजी की जा रही है। लेकिन इससे कई सदस्यों में भारी नाराजगी देखी जा रही है और इसे क्लब के लोकतंत्र और सालों पुरानी गौरवशाली परंपरा पर हमला माना जा रहा है। साथ ही इसे तानाशाही रवैये के रूप में देखा जा रहा है।
वर्तमान चेयरमैन टोनी सचदेवा बीते 50 सालों से मैनेजिंग कमेटी से लेकर विविध कमेटी, पदों पर रह चुके हैं। वह अभी लगातार दो बार से चेयरमैन हैं। पहली बार 1992 में चेयरमैन बने थे। इसके बाद वह 1998, 2004, 2008, 2014, 2016, 2022, 2024 में चुनाव जीतकर चेयरमैन बन चुके हैं। गोरानी लगातार दो टर्म से सचिव पद पर हैं। इसके बाद अब सत्ता की राह में बाधा बन रहे क्लब संविधान को ही बदलने की तैयारी की जा रही है।
क्लब में साल 2000 से ही सदस्यता प्रतिबंधित थी। इसके बाद इसी मैनेजिंग कमेटी के कार्यकाल में 100 नए सदस्य 25-25 लाख रुपए देकर बनाने का प्रस्ताव पास हुआ। इसमें तय हुआ था कि 25-25 करके चार साल में सदस्य बनाए जाएंगे।
वहीं, चुनावी लाभ लेने के लिए यह सभी 100 सदस्य केवल दो साल में बना लिए गए। जिससे जून में इसका लाभ मिल सके। इसके बाद अब सत्ता में बाधा बन रहे संविधान को भी बदलने की तैयारी हो रही है।
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वर्तमान मैनेजिंग कमेटी चेयरमैन मनजीत सचदेवा (टोनी) और सचिव संजय गोरानी दो बार लगातार चुनाव जीत चुके हैं। साथ ही, कार्यकाल जून में खत्म हो रहा है। इसके पहले अब मैनेजिंग कमेटी संविधान को बदलने के लिए नया प्रस्ताव लेकर आ रही है। इसके लिए जल्द ईओजीएम (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग) बुलाई जा रही है।
यह बन रहा है प्रस्ताव
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सत्ता में बने रहने की चाहत
इसके बाद कुछ सदस्यों के जरिए इस संबंध में कमेटी ने पत्र लिया और इस पत्र को आधार बनाकर अब ईओजीएम कॉल करने की तैयारी हो रही है। वहीं ईओजीएम पर भी मांग उठ रही है कि यह प्रस्ताव आता है तो क्योंकि संविधान का मामला है, तो इसमें गुप्त मतदान (बैलेटिंग) कर ही इस पर फैसला हो। अभी तक हाथ खड़े कर के फैसला किया जाता है, जिसमें गफलत होती है।
इसी माह यह प्रस्ताव पास कराना जरूरी
कारण है कि जून में चुनाव है। ऐसे में यह चुनाव के पहले जल्दबाजी की जा रही है। लेकिन इससे कई सदस्यों में भारी नाराजगी देखी जा रही है और इसे क्लब के लोकतंत्र और सालों पुरानी गौरवशाली परंपरा पर हमला माना जा रहा है। साथ ही इसे तानाशाही रवैये के रूप में देखा जा रहा है।
नए को मौका कब मिलेगा
इसके पहले जमीन मजबूत करने सदस्य बनाए
वहीं, चुनावी लाभ लेने के लिए यह सभी 100 सदस्य केवल दो साल में बना लिए गए। जिससे जून में इसका लाभ मिल सके। इसके बाद अब सत्ता में बाधा बन रहे संविधान को भी बदलने की तैयारी हो रही है।
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