अंता उपचुनाव : हार के बाद भाजपा में विवाद जारी, दिग्गज MLA सिंघवी ने आलाकमान से बयां की पीड़ा

राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र से सातवीं बार के विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र। अंता उपचुनाव में अपमान और अनदेखी का दंश झेलने के बारे में विस्तार से बताया। भाजपा की गुटबाजी पर भी खोला मोर्चा।

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Rakesh Sharma
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Baran. राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर हुए चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मोरपाल सुमन की करारी हार के बाद भाजपा पार्टी में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। चुनाव नतीजे के बाद भाजपा में हार के कारणों की समीक्षा की बातें हो रही हैं। वहीं चुनाव में वरिष्ठ नेताओंं और स्टार प्रचारकों की अनदेखी के आरोप भी सामने आने लगे हैं। 

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पत्र लिखकर बयां की पीड़ा

हाड़ौती में भाजपा के दिग्गज नेता और बारां जिले की छबड़ा विधानसभा सीट से सात बार के विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने अंता उपचुनाव में उनकी अनदेखी का आरोप लगाया है। सिंघवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल को पत्र लिखकर चुनाव प्रचार में अपमान, उपेक्षा और अनदेखी की पीड़ा बयां की है।

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प्रचार से दूर रखा, अपमान-अनदेखी की

मतदान से चार दिन पहले सिंघवी ने प्रधानमंत्री समेत अन्य नेताओं को पत्र लिखा था। पत्र में बताया कि अंता सीट बारां जिले में आती है। वे बारां जिले से छबड़ा सीट से सात बार विधायक रह चुके हैं। अंता चुनाव प्रचार के दौरान सिंघवी ने खुद की अनदेखी और पार्टी के भीतर चल रही आपसी खींचतान का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें चुनाव प्रचार से दूर रखा गया। उन्हें ना तो प्रचार के लिए बुलाया और ना ही किसी तरह के प्रचार-प्रसार की जानकारी दी। 

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षड्यंत्र की होनी चाहिए जांच

6 नवंबर को अंता-मांगरोल में आयोजित सीएम भजनलाल शर्मा की विजय संकल्प यात्रा के समाचार-पत्रों में दिए गए विज्ञापन में विधायक के तौर पर मेरी फोटो प्रकाशित नहीं की, जबकि बारां जिले के भाजपा के दोनों विधायक राधेश्याम बैरवा और ललित मीणा की फोटो दी गई। मेरा नाम तक नहीं दिया। सिंघवी ने पत्र में सवाल उठाया है कि ऐसा षड्यंत्र किसने, क्यों और किस स्वार्थ से किया गया, यह समझ से परे हैं। इसकी जांच की जानी चाहिए।

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स्टार प्रचारकों में शामिल नहीं किया

सिंघवी ने बताया कि छबड़ा सीट से मेरे पिता जनसंघ और बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते। 1977 में भैरोंसिंह शेखावत के लिए उन्होंने इस सीट को खाली किया। इसी सीट से भाजपा के बैनर पर मुझे सात बार जीतने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

पार्टी के लगातार विश्वास से ही राजस्थान विधानसभा में दूसरा सबसे वरिष्ठ विधायक बना। बावजूद इसके मुझे अंता सीट के स्टार प्रचारकों में नहीं रखा गया। 17 अक्टूबर को 40 नेताओं की सूची जारी की गई। इसमें मुझे शामिल नहीं किया। मुझसे जूनियर अन्य विधायकों का नाम सूची में था।

जिम्मेदारी नहीं दी

पत्र में सिंघवी ने बताया कि लगातार उपेक्षा और अपमान के बारे में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को अवगत कराया। इस पर पार्टी की ओर से 24 अक्टूबर को उपचुनाव के लिए चुनाव समिति घोषित की गई, जिसमें मेरा नाम सदस्य के तौर पर सातवें नंबर पर रखा गया, लेकिन चुनाव समिति ने चुनाव प्रचार और प्रबंधन के बारे में न तो मुझे कोई संपर्क किया और ना ही मुझे कोई जिम्मेदारी देना उचित समझा।

राजे और पुत्र के हाथों में रही कमान

अंता उपचुनाव में मोरपाल सुमन को टिकट दिलवाने और उनके चुनाव प्रचार-प्रबंधन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और उनके पुत्र बारां-झालावाड़ से सांसद दुष्यंत सिंह के हाथों में रही। चुनाव में कौन प्रचार करेगा और कौन नहीं, वे ही तय कर रहे थे। इसका खामियाजा चुनाव नतीजों में देखने को मिला, जब मोरपाल 15 हजार से ज्यादा वोटों से कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद जैन भाया से हार गए। मोरपाल पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के समर्थक हैं और उन्हीं की सिफारिश पर टिकट मिला था।

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सिंघवी का बयान

अंता में पार्टी प्रत्याशी की हार के बाद सिंघवी ने ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए बयान दिया कि कार्यकर्ताओं ने सरकार द्वारा पिछले दो वर्षों में किए गए व्यापक और लोकोपकारक कार्यों को अंता की जनता तक पूर्ण रूप से नहीं पहुंचाया, जिसके कारण यह अनिच्छित परिणाम मिला है। सिंघवी ने कहा कि हाड़ौती भाजपा का सुदृढ़ गढ़ रहा है। इसलिए इस हार से कार्यकर्ताओं के उत्साह पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। पीएम मोदी के मार्गदर्शन में सभी जनसेवा के काम सतत जारी रहेंगे।  

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हार के बाद उठ रहे कई सवाल

अंता उपचुनाव में हार के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। पार्टी ने जिन 40 नेताओं को स्टार प्रचारक की जिम्मेदारी दी थी, उनमें से आधे से ज्यादा नेता प्रचार के लिए ही नहीं पहुंचे। चुनाव प्रबंधन कमजोर रहा। चुनाव प्रचार में अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी हावी रही। देरी से टिकट मिलने से माहौल खराब हुआ।

हार की समीक्षा कर रही है भाजपा

अंता उपचुनाव में मोरपाल की हार के बाद पार्टी नेता सकते में है। सरकार और पार्टी के धुआंधार प्रचार के बावजूद मोरपाल की हार से पार्टी नेता आत्मचिंतन में हैं। हार के कारणों की समीक्षा की जा रही है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष राठौड़ ने कहा कि हार किसी एक की नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। सबसे ज्यादा जिम्मेदारी मेरी है। हम हार की समीक्षा करेंगे और कहीं कोई ऑपरेशन भी करना पड़ा तो वह भी करेंगे।

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