मुख्यमंत्री बोले- कांग्रेस के पास तथ्य है तो प्रमाण दे, झूठे प्रपंच की राजनीति बंद करे

Jageshwar prasad | Sept 27, 2026, 16:03 IST
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मुख्यमंत्री बोले- कांग्रेस के पास तथ्य है तो प्रमाण दे, झूठे प्रपंच की राजनीति बंद करे
मुख्यमंत्री बोले- कांग्रेस के पास तथ्य है तो प्रमाण दे, झूठे प्रपंच की राजनीति बंद करे

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनावी हार छिपाने के लिए तथ्यहीन राजनीति कर रही है। उन्होंने कांग्रेस से आरोपों के प्रमाण मांगे।

समझें क्या है पूरा मामला

  • कांग्रेस के पास तथ्य है तो प्रमाण दे
  • संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना बंद करे
  • चुनावी हार छिपाने के लिए हो रही तथ्यहीन राजनीति
  • निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाना गलत
  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बोले, जनता सब देख रही
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। साथ ही वह चुनावी हार को छिपाने के लिए तथ्यहीन राजनीति कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति अब जनता के बीच काम करने के बजाय झूठे आरोपों और भ्रम फैलाने तक सीमित रह गई है। चुनाव में हार मिलने पर कांग्रेस अपनी कमियों की समीक्षा नहीं करती। वह संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगती है।

जनता के बीच जाने की नसीहत

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति छोड़नी चाहिए। उसे जनता के बीच जाना चाहिए। उनकी समस्याओं को समझना चाहिए। उनके दुख-दर्द में साथ खड़े होने की आदत डालनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जनता सब देखती और समझती है। अगर कांग्रेस के पास किसी आरोप के समर्थन में तथ्य और प्रमाण हैं, तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए। वरना संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास बंद करना चाहिए। राजनीति मेहनत, सत्य और ईमानदारी से होती है।

निर्वाचन आयोग का स्पष्टीकरण

मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग के 26 सितंबर के संयुक्त बयान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर (SIR – Special Intensive Revision) सहित प्रमुख निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि 24 जून 2025 के मूल आदेश और विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी समय-सारणी पर भी आयोग ने स्थिति साफ की है। ये निर्णय पूरे आयोग की सहमति से लिए गए थे। ऐसे में कांग्रेस के दावों का आधार क्या है।



सुप्रीम कोर्ट का आदेश

मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 27 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध ठहराया था। इसके बावजूद कांग्रेस लगातार इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि न्यायिक प्रक्रिया के बाद किसी प्रक्रिया पर राजनीतिक आरोप लगाने के लिए उसके पास कौन से ठोस तथ्य और प्रमाण हैं। बिना निर्वाचन आयोग का पक्ष जाने किसी मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाकर संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाना ठीक नहीं है।

मतदाता सूची पर काम

मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्वाचन आयोग के अनुसार एसआईआर से जुड़े संबंधित फॉर्म सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखे गए थे। गैर-एसआईआर अवधि में लागू नियमों के तहत निर्धारित फॉर्म का ही उपयोग किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस नियमों में बदलाव का दावा करती है, तो उसे उस बदलाव का आधिकारिक दस्तावेज जनता के सामने रखना चाहिए। आयोग पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष कैंप लगा रहा है।

रैन बसेरों, मजदूरों और बेघर लोगों तक पहुंचा जा रहा है। छूटे हुए मतदाताओं के घर-घर जाकर बीएलओ (BLO – Booth Level Officer) द्वारा फॉर्म एकत्र किए जा रहे हैं। मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने के इन प्रयासों पर भी तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए।

राहुल गांधी पर हमला

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस झूठ, सनसनी और भ्रम फैलाने का काम कर रही है। लेकिन अब कांग्रेस का झूठ बेनकाब हो गया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का इतिहास ऐसे झूठे मुद्दों को उठाने का रहा है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने विदेश में जाकर भारत की चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बाद में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगनी पड़ी। इसके अलावा वे भारत की सेना के शौर्य पर भी सवाल उठाते हैं।

कांग्रेस से ये सवाल

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और राहुल गांधी से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बताए कि एसआईआर में कथित मतभेद का प्रमाण क्या है। कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को एसआईआर से जोड़ने का आधार क्या है।

उन्होंने पूछा कि संबंधित फॉर्म में कथित बदलाव का आधिकारिक दस्तावेज कहां है। मीडिया रिपोर्ट को राजनीतिक आरोप का आधार बनाने से पहले उसका सत्यापन किया गया था या नहीं। निर्वाचन आयोग के संयुक्त स्पष्टीकरण के बाद क्या कांग्रेस अपने आरोपों की समीक्षा करेगी।

शब्दों की जिम्मेदारी जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और न्यायालयों के बारे में बयान देते समय शब्दों और तथ्यों की जिम्मेदारी भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी दल द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, तो उनके समर्थन में प्रमाण और दस्तावेज भी जनता के सामने रखे जाने चाहिए। चुनावी हार के बाद कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने का रास्ता अपनाती रही है।

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