तलाक के लिए अब छह महीने का इंतजार जरूरी नहीं, इंदौर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश पलटा
Anshika Singh Chauhan | Oct 08, 2026, 16:29 IST
mp high court order: आपसी सहमति से तलाक पर इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 6 महीने का इंतजार जरूरी नहीं
MP High Court: इंदौर बेंच ने आपसी सहमति से तलाक को लेकर अहम बात कही है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि हर मामले में तलाक के लिए छह महीने इंतजार करना जरूरी नहीं है। अगर पति-पत्नी लंबे समय से अलग रह रहे हैं और उनके बीच सुलह की उम्मीद नहीं है। तो कोर्ट इस अवधि को कम करने के बारे में सोच सकता है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
हालांकि, फैमिली कोर्ट ने उसकी अर्जी खारिज कर दी। इसके बाद पति ने इस फैसले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court) की इंदौर बेंच में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में हालात देखकर ही फैसला लेना चाहिए।
तलाक के लिए छह महीने का इंतजार कब माफ हो सकता है?
इसका मतलब यह नहीं है कि जोड़े को बिना इंतजार किए तलाक मिल जाएगा। कोर्ट प्रत्येक मामले की परिस्थितियों और कानूनी शर्तों के आधार पर फैसला करेगा।
फैमिली कोर्ट को पंद्रह दिन में फैसला लेने का निर्देश
खास बात यह है कि हाईकोर्ट ने सीधे तलाक मंजूर नहीं किया है। उसने केवल छह महीने की प्रतीक्षा अवधि माफ करने वाली अर्जी पर नए सिरे से फैसला लेने को कहा है।
आपसी सहमति से तलाक में छह महीने का नियम क्या है?
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि कुछ परिस्थितियों में यह प्रतीक्षा अवधि माफ की जा सकती है। इसके लिए जरूरी कानूनी शर्तों को पूरा करना होता है। इंदौर हाईकोर्ट का यह आदेश भी इसी कानूनी व्यवस्था से जुड़ा है।
क्या अब तुरंत तलाक मिल जाएगा?
यदि कोर्ट को लगता है कि सुलह की संभावना नहीं बची है तो इंतज़ार का समय माफ करने पर विचार किया जा सकता है। वहीं अगर कोर्ट को सुलह की संभावना नजर आती है तो वह निर्धारित प्रक्रिया अपनाने के लिए कह सकता है।
हाईकोर्ट के फैसले का क्या असर होगा?
फिलहाल इस मामले में फैमिली कोर्ट को पंद्रह दिन में नया फैसला लेना है। अब देखना होगा कि अदालत प्रतीक्षा अवधि माफ करने की मांग पर क्या निर्णय देती है।
FAQ:
- आपसी सहमति से तलाक लेने पर छह महीने की प्रतीक्षा अवधि कब माफ की जा सकती है?
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पति-पत्नी लंबे समय से अलग रह रहे हैं और सुलह की संभावना नहीं है, तब छह महीने की प्रतीक्षा अवधि को माफ किया जा सकता है। - क्या इस फैसले से तुरंत तलाक मिल जाएगा?
नहीं, यह फैसला सीधे तौर पर तुरंत तलाक देने का आदेश नहीं है। प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के आधार पर कोर्ट फैसला करेगी। - हाईकोर्ट के फैसले का क्या महत्व है?
यह आदेश उन पति-पत्नी के लिए महत्वपूर्ण है जो आपसी सहमति से तलाक लेना चाहते हैं, खासकर जब वे लंबे समय से अलग रह रहे हों और संभावित सुलह नहीं हो।
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