बिना तलाक दूसरी शादी करने पर नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता, हाईकोर्ट ने ठुकराई महिला की याचिका
Harrison Masih | Feb 28, 2026, 15:00 IST
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हाईकोर्ट ने दुर्ग-भिलाई की एक महिला की गुजारा भत्ता याचिका खारिज कर दी है। महिला ने अपने दूसरे पति से धारा 125 सीआरपीसी के तहत 1 लाख प्रतिमाह भत्ता मांगा था। सुनवाई में सामने आया कि महिला ने पहले पति से कानूनी तलाक लिए बिना दूसरी शादी की थी।
NEWS IN SHORT
- हाईकोर्ट ने बिना तलाक लिए दूसरी शादी करने वाली महिला की याचिका खारिज कर दी।
- महिला ने अपने दूसरे पति के खिलाफ 1 लाख प्रतिमाह गुजारा भत्ता मांगा था।
- महिला का पहला पति जीवित है और उससे कानूनी तलाक नहीं हुआ था।
- फैमिली कोर्ट ने पहले ही याचिका खारिज कर दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने सही ठहराया।
- पहली शादी के अस्तित्व में रहते दूसरी शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं, ऐसे में गुजारा भत्ता की मांग उचित नहीं।
NEWS IN DETAIL
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने यह टिप्पणी करते हुए महिला की क्रिमिनल रिवीजन याचिका खारिज कर दी।
क्या है पूरा मामला?
महिला का दावा था कि 10 जुलाई 2020 को आर्य समाज मंदिर में उसकी शादी हुई थी। उसने आरोप लगाया कि शादी के बाद पति ने उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और घर से निकाल दिया।
महिला ने पति की आय 5 लाख रूपए प्रतिमाह बताते हुए 1 लाख रूपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता की मांग की थी।
सुनवाई में क्या सामने आया?
महिला ने पहले पति से कानूनी तलाक लिए बिना ही दूसरी शादी कर ली थी। प्रति-परीक्षण में महिला ने स्वीकार किया कि पहली शादी से उसके दो बेटे हैं, जो बालिग हैं और उसके साथ रहते हैं।
फैमिली कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने यह भी माना कि महिला पहले आशा वर्कर के रूप में कार्य कर चुकी है और शारीरिक रूप से स्वस्थ है, यानी वह स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है।
20 जनवरी 2026 को फैमिली कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। बिना तलाक के दूसरी शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं है। ऐसे में धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
इस आधार पर हाईकोर्ट ने महिला की अपील खारिज कर दी।
Sootr Knowledge
- सीआरपीसी धारा 125 का उद्देश्य परित्यक्त पत्नी, बच्चों और माता-पिता को भरण-पोषण दिलाना है।
- यदि पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुई है, तो दूसरी शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अवैध मानी जा सकती है।
- अवैध विवाह के आधार पर भरण-पोषण का दावा कमजोर हो जाता है।
- भरण-पोषण का अधिकार वैध वैवाहिक संबंध पर निर्भर करता है।
- कोर्ट यह भी देखता है कि आवेदक स्वयं जीविका चलाने में सक्षम है या नहीं।
निष्कर्ष
यह फैसला वैवाहिक कानूनों के प्रति जागरूकता और कानूनी अनुशासन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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