रामसर साइट बन सकती है राजस्थान की सिलीसेढ़ झील, केन्द्रीय मंत्री ने रामसर COP15 में दिया प्रस्ताव
Nitin Kumar Bhal | Jul 24, 2025, 16:58 IST
अलवर सांसद एवं केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव वेटलैंड कन्वेंशन की महासचिव डॉ. मुसोंड़ा मुम्बा से मुलाकात के दौरान सिलीसेढ़ का चित्र सौंपते हुए। Photograph: (The Sootr)
राजस्थान के अलवर से सांसद और केन्द्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने जिंबाब्वे में आयोजित रामसर COP15 में अलवर की सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट घोषित करने का प्रस्ताव रखा।
सुनील जैन
भारत के केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव (Bhupendra Yadav) ने जिंबॉब्वे में आयोजित रामसर COP15 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए राजस्थान (Rajasthan) के अलवर की प्रतिष्ठित सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट (Ramsar Site) घोषित करने का प्रस्ताव रखा। यादव ने वेटलैंड कन्वेंशन की महासचिव डॉ. मुसोंड़ा मुम्बा से मुलाकात के दौरान इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया और झील के सांस्कृतिक (Cultural) और आध्यात्मिक (Spiritual) महत्व को भी साझा किया।
अलवर शहर से 16 किमी दूर यह सिलीसेढ़ झील बनी हुई है। अलवर के तत्कालीन शासक महाराज विनय सिंह ने 1845 में अपनी रानी शीला के लिए इस झील के किनारे भव्य महल का निर्माण कराया था। सिलीसेढ़ झील महल की स्थापना शुरू में आखेट करने और उसमें रहने के उद्देश्य से आवास के रूप में की गई थी। बाद में इसे महल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। अब आरटीडीसी का हेरिटेज होटल संचालित है।
इस झील के निर्माण के पीछे तत्कालीन शासक का मुख्य उद्देश्य अलवर को पानी उपलब्ध कराना था। झील से अलवर शहर तक नहर पक्की नहर बनी हुई है, लेकिन वर्तमान में अतिक्रमण की भेंट चढ़ने के कारण अलवर शहर में सिलीसेढ़ का पानी नहीं आ पाता है। झील के चारों ओर पहाड़ी क्षेत्र स्थित है। यह झील अलवर शहर के नजदीक होने के कारण सबसे बड़ा टूरिस्ट पॉइंट है, जिसमें नौका विहार की सुविधा भी उपलब्ध है।
अलवर सांसद यादव ने इस अवसर पर भारत की अन्य महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों को भी रामसर स्थलों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव रखा। इसमें अरुणाचल प्रदेश के ग्लो लेक (Glo Lake), बिहार के गोगाबिल लेक (Gogabil Lake), गुजरात के छारी ढांड वेटलैंड रिज़र्व (Chhari Dhand Wetland Reserve) और गोसाबरा वेटलैंड (Gosabara Wetland) शामिल हैं। इन प्रस्तावों का उद्देश्य भारत की आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और संरक्षण देना है।
रामसर साइट के रूप में किसी भी आर्द्रभूमि का नामांकन अंतर्राष्ट्रीय मान्यता, संरक्षण प्रयासों में वृद्धि, और सतत विकास (Sustainable Development) के अवसर प्रदान करता है। इसके अलावा, यह स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग के नए रास्ते खोलता है।
यह खबर भी देखें ... कांग्रेस का आरोप-मंत्री भूपेंद्र यादव और संजय शर्मा भ्रष्टाचार कर सरिस्का की सीमा बदल रहे
भारत में पिछले एक दशक में रामसर स्थलों की संख्या में 250% की वृद्धि हुई है। वर्तमान में भारत में कुल 91 रामसर साइटें हैं, जो एशिया में सबसे अधिक हैं। हाल ही में, राजस्थान के फलौदी (Phalodi) में खीचन (Khechan) और उदयपुर (Udaipur) में मेनार (Menar) को भी रामसर स्थल घोषित किया गया है।
यह खबर भी देखें ... केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के डॉगी की मौत, फॉलोअर डूबे शोक में, बोले- हम संकट की घड़ी में आपके साथ...!
रामसर साइटों की संख्या में वृद्धि भारत की आर्द्रभूमि के संरक्षण और प्रबंधन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसके अलावा, भारत में "अमृत धरोहर" (Amrit Dharohar) जैसी पहल और वेटलैंड शहरों की मान्यता से यह स्पष्ट है कि भारत वेटलैंड्स के संरक्षण को एक महत्वपूर्ण कदम मानता है।
यह खबर भी देखें ... BJP में उम्मीदवारों की बैठक में बोले भूपेंद्र यादव- कांग्रेस नेरेटिव सेट कर रही है, रूठों को मनाएंगे
सबसे बड़ा रामसर स्थल : सुंदरबन आर्द्रभूमि, पश्चिम बंगाल में स्थित है।
सबसे छोटा रामसर स्थल : रेणुका वेटलैंड, हिमाचल प्रदेश में स्थित है।
सबसे पुराने रामसर स्थल : चिल्का झील (ओडिशा) और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) को भारत के पहले रामसर स्थलों के रूप में मान्यता दी गई थी।
हाल ही में शामिल किए गए स्थल (जून 2025)
खीचन (फलोदी राजस्थान) और मेनार (उदयपुर राजस्थान)
यह खबर भी देखें ... राजस्थान हाईकोर्ट : न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल अवैध, कल से काम पर लौटें अन्यथा लागू करेंगे रेस्मा
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃
🤝💬👩👦👨👩👧👧
केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव | केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव | केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव | केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव | राजस्थान न्यूज | राजस्थान न्यूज अपडेट | राजस्थान न्यूज हिंदी
भारत के केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव (Bhupendra Yadav) ने जिंबॉब्वे में आयोजित रामसर COP15 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए राजस्थान (Rajasthan) के अलवर की प्रतिष्ठित सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट (Ramsar Site) घोषित करने का प्रस्ताव रखा। यादव ने वेटलैंड कन्वेंशन की महासचिव डॉ. मुसोंड़ा मुम्बा से मुलाकात के दौरान इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया और झील के सांस्कृतिक (Cultural) और आध्यात्मिक (Spiritual) महत्व को भी साझा किया।
रानी के लिए बनवाया भव्य महल
नौका विहार की सुविधा भी उपलब्ध
भारत ने किन आर्द्रभूमियों को रामसर साइट बनाने का प्रस्ताव दिया?
रामसर साइट का क्या महत्व है?
यह खबर भी देखें ... कांग्रेस का आरोप-मंत्री भूपेंद्र यादव और संजय शर्मा भ्रष्टाचार कर सरिस्का की सीमा बदल रहे
भारत में कितने रामसर स्थल हैं?
यह खबर भी देखें ... केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के डॉगी की मौत, फॉलोअर डूबे शोक में, बोले- हम संकट की घड़ी में आपके साथ...!
रामसर साइट क्या है और यह नाम कैसे पड़ा?रामसर साइट एक ऐसी आर्द्रभूमि (wetland) होती है जिसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की मान्यता मिली होती है। इसका नाम 02 फरवरी 1971 में ईरान के रामसर शहर में आयोजित सम्मेलन (Ramsar Convention) के नाम पर पड़ा, जहां इस आर्द्रभूमि संरक्षण से संबंधित अंतर-सरकारी संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे।जानें ... रामसर साइट क्या है?
| |
भारत की आर्द्रभूमि संरक्षण में प्रतिबद्धता
यह खबर भी देखें ... BJP में उम्मीदवारों की बैठक में बोले भूपेंद्र यादव- कांग्रेस नेरेटिव सेट कर रही है, रूठों को मनाएंगे
भारत में कुछ महत्वपूर्ण रामसर साइट
सबसे छोटा रामसर स्थल : रेणुका वेटलैंड, हिमाचल प्रदेश में स्थित है।
सबसे पुराने रामसर स्थल : चिल्का झील (ओडिशा) और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) को भारत के पहले रामसर स्थलों के रूप में मान्यता दी गई थी।
हाल ही में शामिल किए गए स्थल (जून 2025)
खीचन (फलोदी राजस्थान) और मेनार (उदयपुर राजस्थान)
यह खबर भी देखें ... राजस्थान हाईकोर्ट : न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल अवैध, कल से काम पर लौटें अन्यथा लागू करेंगे रेस्मा
भारत में जून 2025 तक घोषित रामसर साइट के बारे में जानें
| रामसर साइट का नाम | राज्य | विशेषता / महत्त्व |
|---|---|---|
| कोल्लेरु झील | आंध्र प्रदेश | दक्षिण भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील |
| दीपोर बील | असम | जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों का महत्वपूर्ण स्थल |
| नागी पक्षी अभयारण्य | बिहार | पक्षी संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण अभयारण्य |
| नकटी पक्षी अभयारण्य | बिहार | पक्षी संरक्षित क्षेत्र |
| नंदा झील | गोवा | समुद्री और तटीय जैव विविधता |
| खिजड़िया, नलसरोवर, थोल झील, वाधवाना | गुजरात | तटीय और दलदलीय आर्द्रभूमि |
| सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान | हरियाणा | पक्षी अभयारण्य एवं वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र |
| भिंडावास वन्यजीव अभयारण्य | हरियाणा | पक्षी एवं प्राणी निवास |
| चंद्र ताल | हिमाचल प्रदेश | उच्च ऊंचाई वाली झील |
| पोंग बांध झील | हिमाचल प्रदेश | पर्वतीय जलाशय |
| रेणुका झील | हिमाचल प्रदेश | हिमाचल का सबसे छोटा रामसर स्थल |
| होकरसर झील | जम्मू और कश्मीर | प्राचीन आर्द्रभूमि एवं जैव विविधता |
| शालबुघ, वुलर झील | जम्मू और कश्मीर | ताजगी से भरपूर उच्च ऊंचाई वाली झीलें |
| रंगनाथिटु पक्षी अभयारण्य | कर्नाटक | पक्षी संरक्षण और पर्यावरणीय संरक्षण |
| अष्टमुडी झील | केरल | मैंग्रोव और तटीय जलमार्ग |
| सस्थमकोट्टा झील | केरल | देश की सबसे बड़ी ताजे पानी की झील |
| वेम्बनाड-कोल वेटलैंड | केरल | महत्वपूर्ण मैंग्रोव और पक्षी अभयारण्य |
| त्सो कार झील | लद्दाख | उच्च ऊंचाई वाली विस्तृत झील |
| त्सोमोरिरी झील | लद्दाख | संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र |
| भोज वेटलैंड | मध्य प्रदेश | जलचर और पक्षी संरक्षण बिंदु |
| सिरपुर झील | मध्य प्रदेश | तटीय जल और दलदलीय क्षेत्र |
| तवा जलाशय | मध्य प्रदेश | महत्वपूर्ण जलाशय, पक्षी एवं मछली निवास |
| खीचन | राजस्थान | प्रवासी पक्षी (कुरजां) के लिए प्रसिद्ध, मध्य एशियाई उड़ान मार्ग का प्रमुख पड़ाव |
| मेनार | राजस्थान | "पक्षी गाँव", 150 से अधिक पक्षी प्रजातियों का घर |
| केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान | राजस्थान | संरक्षण क्षेत्र, पक्षी और वन्य जीवों के लिए प्रमुख स्थल |
| सांभर झील | राजस्थान | पर्यावरणीय और पक्षी संरक्षण महत्व |
| चिल्का झील | ओडिशा | भारत का सबसे बड़ा खारे पानी का लैगून, समुद्री कछुओं का घोंसला |
| भितरकनिका | ओडिशा | मैंग्रोव और जैव विविधता संरक्षण क्षेत्र |
| काज़ुवेली पक्षी अभयारण्य | तमिलनाडु | प्रवासी पक्षियों के लिए प्रमुख स्थल |
| नागरकोइल जलाशय | तमिलनाडु | पक्षी और जलजीव संरक्षण केंद्र |
| सिरपुर वेटलैंड | छत्तीसगढ़ | जैव विविधता समृद्ध आर्द्रभूमि |
| लोकटक झील | मणिपुर | भारत की सबसे बड़ी तैरती झील |
| लाल जोपासलगढ़ का तटवर्ती क्षेत्र | महाराष्ट्र | तटीय और दलदल क्षेत्र |
| नंदूर मदमेश्वर | महाराष्ट्र | वन्यजीव अभयारण्य और जलस्तर नियंत्रण |
| ठाणे क्रीक | महाराष्ट्र | महत्वपूर्ण तटीय जल क्षेत्र |
| बखिरा पक्षी अभयारण्य | उत्तर प्रदेश | पक्षी संरक्षण के लिए प्रमुख स्थल |
| हैदरपुर पक्षी अभयारण्य | उत्तर प्रदेश | पक्षी संरक्षण और प्रवासी पक्षी आवास |
| नवाबगंज पक्षी अभयारण्य | उत्तर प्रदेश | जैव विविधता केंद्र |
| पार्वती-आर्गा वेटलैंड | उत्तर प्रदेश | आर्द्रभूमि और वन्यजीव संरक्षण |
| आमरापुर वेटलैंड | उत्तर प्रदेश | आर्द्रभूमि संरक्षण क्षेत्र |
| सुंदरबन | पश्चिम बंगाल | विश्व धरोहर, विशाल मैंग्रोव वन, बंगाल टाइगर आवास |
| पूर्वी कोलकाता वेटलैंड | पश्चिम बंगाल | महत्वपूर्ण शहरी आर्द्रभूमि |
| कर्नाटक के अन्य 3 रामसर साइट (जैसे काबिनी डेल्टा) | कर्नाटक | जैव विविधता, जल संसाधन संरक्षण |
| अरुणाचल प्रदेश के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्र | अरुणाचल प्रदेश | संवेदनशील आर्द्रभूमि और पारिस्थितिकी तंत्र |
| केरल में अन्य मैंग्रोव क्षेत्रों | केरल | पारिस्थितिकी संरक्षण क्षेत्र |
| मिजोरम का एक रामसर स्थल | मिजोरम | जैव विविधता संरक्षण क्षेत्र |
| सिक्किम का एक रामसर स्थल | सिक्किम | हिमालयी आर्द्रभूमि |
| झारखंड के भी एक रामसर स्थल | झारखंड | जीव विविधता समृद्ध क्षेत्र |
| अन्य राज्यों के छोटे-छोटे रामसर स्थल | विभिन्न राज्यों | स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण |
FAQ
- रामसर साइट क्या है और इसका महत्व क्या है?
रामसर साइट एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त आर्द्रभूमि है, जिसे वेटलैंड कन्वेंशन द्वारा संरक्षित किया जाता है। यह साइट पर्यावरणीय संरक्षण, सतत विकास और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देती है। - भारत में रामसर साइटों की संख्या कितनी है?
वर्तमान में भारत में कुल 91 रामसर साइटें हैं, जो एशिया में सबसे अधिक हैं। यह संख्या पिछले दशक में 250% बढ़ी है। - सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट बनाने का प्रस्ताव क्यों रखा गया?
सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट बनाने का प्रस्ताव इसके सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के कारण रखा गया है, जिससे इसका संरक्षण और विकास सुनिश्चित किया जा सके।
thesootr links
- मध्यप्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- जॉब्स और एजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃
🤝💬👩👦👨👩👧👧
केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव | केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव | केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव | केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव | राजस्थान न्यूज | राजस्थान न्यूज अपडेट | राजस्थान न्यूज हिंदी
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA