कलेक्ट्रेट में कुर्की की कार्रवाई, कलेक्टर की कुर्सी-मेज सील, कोर्ट आदेश की अवहेलना का मामला
Jageshwar prasad | May 05, 2026, 14:01 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के अलवर में कोर्ट के आदेश पर कलेक्टर कार्यालय की कुर्की कार्रवाई की गई। इस दौरान कुर्की से बचने के लिए जिला कलेक्टर सरकारी वाहन लेकर फील्ड में रवाना हो गईं।
News In Short
- अलवर में कोर्ट के आदेश पर कलेक्टर कार्यालय की कुर्की कार्रवाई।
- कुर्की कार्रवाई के दौरान अधिकारियों और अदालती टीम के बीच बहस।
- कुर्की से बचने के लिए जिला कलेक्टर सरकारी वाहन लेकर रवाना हो गईं।
- कोर्ट ने एक नियुक्ति मामले में आदेशों की अवहेलना पर दिए थे कुर्की आदेश।
- कलेक्टर कार्यालय से कुर्सी, मुख्य टेबल और तीन अन्य कुर्सियां की गई कुर्क।
News In Detail
Alwar: राजस्थान के अलवर में कलेक्टर कार्यालय की कुर्की का मामला सामने आया है। आयुर्वेद कंपाउंडर पद पर नियुक्ति से जुड़े एक पुराने मामले में अदालती आदेश की पालना नहीं करना जिला प्रशासन को भारी पड़ गया। कोर्ट ने कलेक्टर कार्यालय भवन, समस्त फर्नीचर और कलेक्टर की सरकारी गाड़ी तक को कुर्क करने के निर्देश दिए थे।
अतिरिक्त मुंसिफ एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2 के आदेश पर नजारत विभाग की टीम भारी लाव-लश्कर के साथ अलवर कलेक्ट्रेट पहुंची और कुर्की की कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
क्या है पूरा मामला?
हालांकि, जिला प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय द्वारा बार-बार इन आदेशों की अनदेखी की गई। अदालती आदेश की निरंतर अवहेलना (Contempt of Court) को देखते हुए न्यायालय ने अंततः कुर्की का वारंट जारी कर दिया।
कलेक्टर की गाड़ी को लेकर लुका-छिपी
कार्रवाई के दौरान यह चर्चा का विषय बना रहा कि जो सरकारी गाड़ी सामान्यतः कलेक्ट्रेट के मुख्य पोर्च में खड़ी रहती थी, उसे कथित तौर पर परिसर में किसी अन्य स्थान पर खड़ा कर उसकी पहचान छिपाने की कोशिश की गई, जिससे उसे कुर्क होने से बचाया जा सके।
अधिकारियों ने की रोकने की कोशिश
मामले में मोड़ तब आया जब नजारत विभाग के कार्मिक गिरीश गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यदि अदालती आदेश की तामील में बाधा डाली गई तो इसकी लिखित शिकायत सीधे न्यायालय में की जाएगी। इस चेतावनी के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के तेवर नरम पड़े और सीमित कुर्की की सहमति बनी।
कुर्सी-मेज हुई कुर्क
प्रशासनिक साख पर सवाल
हालांकि प्रशासन का पक्ष है कि प्रक्रियाधीन मामलों में समय लगता है, लेकिन कोर्ट की इस सख्त कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि न्यायपालिका की अवहेलना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।
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