ईडी का बड़ा एक्शन: जयपुर और लुधियाना में पीएसीएल की 37 संपत्तियां अटैच

Ashish Bhardwaj | Jan 27, 2026, 13:20 IST
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Photograph: (the sootr)

निवेशकों से धोखाधड़ी के मामले में ईडी ने पीएसीएल के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। उसने राजस्थान के जयपुर और पंजाब के लुधियाना में पीएसीएल की 37 कंपनियां जब्त की।

News In Short

  • ईडी का पीएसीएल के खिलाफ बड़ा कदम, निवेशकों से धोखाधड़ी का मामला
  • पीएसीएल की 1,986.48 करोड़ रुपए की 37 संपत्तियां अटैच
  • ये संपत्तियां राजस्थान के जयपुर और पंजाब के लुधियाना में थीं
  • ईडी अब तक पीएसीएल की 7589 संपत्तियों को कर चुका है अटैच
  • निवेशकों से 60 हजार करोड़ रुपए से अधिक की रकम एकत्रित की

News In Detail

Jaipur: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा कदम उठाते हुए पीएसीएल लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनियों की 1,986.48 करोड़ रुपए की 37 संपत्तियों को अटैच किया है। ईडी के दिल्ली जोनल ऑफिस-2 ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002 के तहत राजस्थान के जयपुर और पंजाब के लुधियाना में की है। ईडी इस मामले में अब तक कंपनी से जुड़ी 7,589 अचल संपत्तियों को अटैच कर चुकी है।

निवेश योजनाओं में की धोखाधड़ी

ईडी पीएसीएल और उसकी सहयोगी कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों की जांच कर रही है। ईडी ने 19 फरवरी 2014 को सीबीआई में दर्ज एक केस के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के पहलु पर यह जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया है कि पीएसीएल और उसकी सहयोगी कंपनियों ने अवैध रूप से साझा निवेश योजनाओं का संचालन किया। इसमें 60 हजार करोड़ रुपए से अधिक की रकम एकत्रित की गई।



भ्रामक दस्तावेजों से जुटाई राशि

पीएसीएल और सहयोगी कंपनियों ने कृषि भूमि के रूपांतरण, बिक्री और विकास के नाम पर निवेशकों से धोखाधड़ी की। उनसे भ्रामक दस्तावेजों से निवेश का झांसा देकर फर्जी नकदी और इन्स्टॉलमेंट में रकम ली गई।
अधिकतर मामलों में एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे दस्तावेजों के सहारे लोगों को झांसे में लिया गया। जांच में सामने आया कि निवेशकों को दावे के मुताबिक कोई जमीन हस्तांतरित नहीं की गई।

निवेशकों को लौटाने हैं 48 हजार करोड़

जांच में खुलासा हुआ कि निवेशकों को करीब 48 हजार करोड़ रुपए का भुगतान करना बाकी है। इन मामलों में सहयोगी इकाइयों की सहायता से जमीनों की खरीद-फरोख्त धोखाधड़ी की गई और गैर वाजिब फायदा उठाया गया। पड़ताल में यह भी सामने आया है कि निवेशकों से जो रकम जुटाई गई, उसे सहयोगी इकाइयों के जरिए आखिर में दिवंगत निर्मल सिंह, उनके परिजनों और पीएसीएल की सहयोगी इकाइयों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है।

कंपनी संचालकों के गैर जमानती वारंट

ईडी की जांच में पता लगा कि कंपनी ने निवेशकों की राशि उपयोग उनके नाम अचल संपत्ति खरीदने के लिए किया गया। जांच के बाद दिवंगत निर्मल सिंह की पत्नी प्रेम कौर, बेटी बरिंदर कौर, सुखविंदर कौर, दामाद गुरप्रताप और करीबी प्रतीक कुमार के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया।

क्या है पीएसीएल

पीएसीएल जिसे पर्ल्स ग्रुप (पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के नाम से लोकप्रिय थी। 1996 में स्थापित एक रियल एस्टेट और कृषि भूमि विकास कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड किया गया था। यह कम्पनी फोरस्ट्री इन्वेस्टमेन्ट के नाम पर लोगों से निवेश कराती थी। राजस्थान में खासकर शेखावाटी में इसका बड़ा काम था।

क्या हैं पूरा घोटाला

ईडी की जांच सीबीआई के एक पुराने मामले पर आधारित है, जो पीएसीएल लिमिटेड और उसके प्रमोटर निर्मल सिंह भंगू से जुड़ा है। भंगू का निधन अगस्त 2024 में हो चुका है। ईडी के अनुसार, पीएसीएल ने एक गैरकानूनी निवेश योजना चलाई, जिसके जरिए देशभर के लाखों लोगों से 60 हजार करोड़ रुपए से अधिक की रकम जुटाई गई। निवेशकों को खेती की जमीन बेचने और उसके विकास का झांसा दिया गया।

निवेशकों को कैसे बनाया गया शिकार

जांच में सामने आया है कि लोगों को आकर्षक वादों का लालच देकर निवेश के लिए तैयार किया गया। उनसे नकद और किस्तों में पैसा लिया गया और बदले में भ्रामक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। इन दस्तावेजों में एग्रीमेंट और पावर ऑफ अटॉर्नी शामिल थे। ईडी का कहना है कि अधिकांश निवेशकों को कभी कोई जमीन नहीं दी गई और आज भी करीब 48 हजार करोड़ रुपए की राशि निवेशकों को वापस नहीं मिल पाई है।

सुप्रीम कोर्ट भी ले चुका है संज्ञान

ईडी ने इस मामले में 2018 में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेन फाइल की। इसके बाद उसने 2022 और 2025 में सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंस भी फाइल की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। पीएसीएल और उसकी सहयोगी कंपनियों से देश के अधिकतर हिस्सों से निवेशकों के जरिए पैसा एकत्रित किया।

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